Power Sector

NTPC चीफ ने 100 GW न्यूक्लियर एनर्जी प्लान पर दी बड़ी चेतावनी, कहा- ड्रैगन-अमेरिका पर निर्भरता पड़ेगी भारी!

chaturpost ब्यूरो। देश इस समय अपने ऊर्जा इतिहास के सबसे बड़े बदलाव (Energy Transition) से गुजर रहा है। भारत ने साल 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 100 गीगावाट (GW) करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। सरकार ने इसके लिए SHANTI Act, 2025 जैसा ऐतिहासिक कदम भी उठाया है।

लेकिन, इसी बीच देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी (NTPC) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) गुरदीप सिंह ने भारत को एक बड़ी चेतावनी (Alert) दी है। उन्होंने साफ कहा है कि भारत को न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी (Nuclear Technology) के लिए किसी एक देश या सप्लायर पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

अगर भारत ऐसा करता है, तो भविष्य में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले संकट (Global Supply-Chain Vulnerabilities) देश की संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की कार्यशाला में उठी आवाज

यह महत्वपूर्ण बयान केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (Central Electricity Authority – CEA) द्वारा आयोजित एक विशेष वर्कशॉप में सामने आया। यह कार्यशाला “SHANTI Act, 2025” पर केंद्रित थी।

गुरदीप सिंह ने कार्यक्रम में बोलते हुए जोर दिया कि भारत को तकनीक और संसाधनों पर अपना नियंत्रण (Control) प्राथमिकता के आधार पर मजबूत करना होगा। इसके परिणामस्वरूप (As a result), यदि शुरुआती दौर में घरेलू विकल्प (Domestic Options) 5 से 10 फीसदी महंगे भी साबित होते हैं, तो भी हमें आत्मनिर्भरता का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए।

क्या है भारत का 100 GW न्यूक्लियर एनर्जी रोडमैप?

वर्तमान में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता काफी सीमित है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा समय (मार्च 2026 तक) में भारत की न्यूक्लियर कैपेसिटी लगभग 8.78 गीगावाट (GW) है।

NTPC का मेगा प्लान: $62 बिलियन का निवेश और 30 GW का टारगेट

इस महामिशन में एनटीपीसी (NTPC) एक लीडर की भूमिका में सामने आ रही है। कंपनी का लक्ष्य अकेले 2047 तक 30 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करना है। इसके लिए देश के 14 राज्यों में उपयुक्त स्थानों (Feasible Locations) की तलाश की जा रही है।

इसके अलावा (Furthermore), रॉयटर्स (Reuters) की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, एनटीपीसी इस 30 GW के लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगभग 62 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम निवेश करने की योजना बना रही है। यह कदम तब उठाया गया है जब सरकार ने इस क्षेत्र को विदेशी और निजी निवेश (Foreign and Private Investment) के लिए खोल दिया है।

SMR के बजाय बड़े रिएक्टर्स पर ध्यान क्यों?

गुरदीप सिंह ने प्रोजेक्ट्स के आकार को लेकर कंपनी की नीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा:

“एनटीपीसी जैसे बड़े पैमाने के बिजली उत्पादक के लिए, फोकस स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) के बजाय बड़े क्षमता वाले रिएक्टर सेट (Large Capacity Reactor Sets) पर होना चाहिए।”

हालांकि (However), उन्होंने यह भी माना कि एसएमआर (SMR) तकनीक औद्योगिक उपयोग (Captive Industrial Use) के लिए बेहतर हो सकती है, लेकिन उनकी उच्च स्टैंडबाय लागत के कारण बड़े ग्रिड के लिए बड़े रिएक्टर्स ही सबसे सही विकल्प हैं।

पावर सेक्टर में NTPC का दबदबा (मार्केट शेयर)

31 मार्च 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एनटीपीसी थर्मल, गैस, हाइड्रो, सोलर और विंड एनर्जी को मिलाकर कुल 89,805.30 मेगावाट (MW) की स्थापित क्षमता रखता है।

  • कुल क्षमता में हिस्सेदारी: भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में एनटीपीसी की 17 फीसदी हिस्सेदारी है।
  • कुल बिजली उत्पादन: देश में पैदा होने वाली कुल बिजली में अकेले एनटीपीसी का योगदान 24 प्रतिशत है।

Dismantling SHANTI ACT 2025: क्या बदलेगा कानून से?

इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य ‘SHANTI Act, 2025: Enabling India’s 100 GW Nuclear Power Roadmap through Public-Private Partnership’ को लागू करने की रूपरेखा तैयार करना था। इसे परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और एनटीपीसी के सहयोग से आयोजित किया गया था।

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च (PRS Legislative Research) के अनुसार, यह नया कानून पुराने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 (Atomic Energy Act, 1962) और परमाणु नुकसान के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 (Civil Liability for Nuclear Damage Act, 2010) को रिप्लेस यानी प्रतिस्थापित करता है।

निजी दिग्गजों की एंट्री: टाटा, रिलायंस और अडाणी रेस में शामिल

संक्षेप में (In short), सरकार के इस नीतिगत बदलाव (Policy Shift) ने देश के बड़े कॉर्पोरेट घरानों का ध्यान खींचा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा पावर (Tata Power), वेदांता (Vedanta), रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और अडाणी पावर (Adani Power) जैसी दिग्गज कंपनियों ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश करने की इच्छा जताई है।

इसके अतिरिक्त (In addition), एनटीपीसी के संभावित वैश्विक पार्टनर्स में फ्रांस की EDF, GE और Holtec International जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हो सकती हैं।

विशेषज्ञों की राय: सुरक्षा और वित्त पोषण सबसे बड़ी चुनौती

वर्कशॉप के दौरान अन्य शीर्ष अधिकारियों ने भी सुरक्षा और सप्लाई चेन पर अपने विचार रखे:

  • घनश्याम प्रसाद (चेयरपर्सन, CEA): उन्होंने कहा कि स्रोतों के विविधीकरण (Source Diversification) और दीर्घकालिक खरीद समझौतों के माध्यम से सुरक्षित और निर्बाध परमाणु ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करना सबसे आवश्यक है।
  • सीमा जैन (DAE प्रतिनिधि): उन्होंने वित्तीय तैयारियों (Financial Preparedness), जोखिम-साझाकरण तंत्र (Risk-Sharing Mechanisms), और वैश्विक तकनीकी साझेदारियों पर जोर दिया।

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chatur विचार (Conclusion)

अंततः (Ultimately), भारत का 100 GW परमाणु ऊर्जा का सपना तभी हकीकत बन सकता है जब नीतियां केवल कागजों पर न रहकर जमीन पर तेजी से उतरें। एनटीपीसी चीफ गुरदीप सिंह का यह सुझाव बेहद सटीक है कि हमें विधायी इरादे से आगे बढ़कर जल्द से जल्द स्पष्ट नियम और दिशानिर्देश (Rules and Guidelines) बनाने होंगे ताकि विदेशी और घरेलू निवेशकों को एक सुरक्षित और पारदर्शी माहौल मिल सके।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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