Power Sector

मई में लगातार दूसरी बार बिजली Power Prices Zero होने से हड़कंप, क्या ठप हो जाएगा पावर ग्रिड?

चतुरपोस्‍ट न्‍यूज डेस्‍क।  देश में भीषण गर्मी के बीच जहां एक तरफ रिकॉर्ड बिजली की मांग (Record Electricity Demand) की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ देश के पावर मार्केट से एक ऐसी हैरान करने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरे एनर्जी सेक्टर (Energy Sector) को हिलाकर रख दिया है। भारतीय ऊर्जा बाजार के इतिहास में पहली बार एक्सचेंज पर बिजली की कीमत घटकर सीधे शून्य (Zero) पर पहुंच गई।

जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना! Power Prices Zero होने की इस अप्रत्याशित घटना ने बिजली कंपनियों, ग्रिड मैनेजरों और नीति निर्माताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इसके परिणामस्वरूप, अब भारत के पावर ग्रिड के मैनेजमेंट (Grid Management) को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

मई में ‘दूसरी बार’ लगा झटका: यह महज इत्तेफाक नहीं, खतरे की घंटी है!

“1 मई को जब पहली बार बिजली की कीमत शून्य हुई, तो कई जानकारों ने इसे एक ‘वन-ऑफ इवेंट’ (एकमात्र घटना) मानकर टाल दिया था। लेकिन 15 मई को दोपहर 2:30 से 4:30 बजे के बीच जब ठीक वैसी ही स्थिति दोबारा दोहराई गई, तो यह साफ हो गया कि मई महीने में दूसरी बार आया यह उछाल भारतीय पावर ग्रिड के लिए एक गंभीर ‘वेक-अप कॉल’ (खतरे की घंटी) है। एक ही महीने में दो बार शॉर्ट-टर्म मार्केट का इस तरह क्रैश होना यह दिखाता है कि देश में सोलर एनर्जी का तूफान तो आ गया है, लेकिन हमारे पास उसे संभालने के लिए पर्याप्त ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर’ (Infrastructure) तैयार नहीं है।”

आखिर कब और कैसे शून्य हुई बिजली की कीमत? (The Shocking Timeline)

इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) के रियल-टाइम मार्केट (RTM) में इतिहास में पहली बार 1 मई को बिजली की कीमत 0 रुपये प्रति यूनिट दर्ज की गई थी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। इसके बाद 15 मई को दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच एक बार फिर बिजली की कीमतें शून्य (0) के स्तर को छू गईं।

इसके अलावा (Furthermore), इसी साल 25 अप्रैल को भी कीमतें शून्य के बेहद करीब पहुंच गई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि (Although) यह घटनाएं अभी नई और कम हैं, लेकिन हाल के महीनों में बिजली की कीमतों के बेहद निचले स्तर पर जाने की आवृत्ति (Frequency) तेजी से बढ़ी है। कई मौकों पर तो पीक सोलर ऑवर्स (Peak Solar Hours) के दौरान बिजली की कीमत 1 रुपये प्रति यूनिट से भी नीचे गिर चुकी है।

क्यों आ रही है ऐसी नौबत? असली विलेन सोलर पावरया कुछ और?

इस अजीबोगरीब स्थिति के पीछे सबसे बड़ा कारण भारत में तेजी से बढ़ता सौर ऊर्जा उत्पादन (Solar Generation) है। दोपहर के समय जब सूरज की रोशनी सबसे तेज होती है, तब देश के सोलर प्लांट अपनी पूरी क्षमता से बिजली बनाना शुरू कर देते हैं।

इसके विपरीत (On the other hand), भारत के पास इस भारी-भरकम बिजली को स्टोर करने के लिए पर्याप्त स्टोरेज क्षमता (Storage Capacity) या बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम (BESS) मौजूद नहीं है।

इस संकट के मुख्य कारण बुलेट पॉइंट्स में समझें:

  • अत्यधिक उत्पादन (Surplus Generation): दोपहर 12 से 4 बजे के बीच सोलर प्लांट से उम्मीद से कहीं ज्यादा बिजली ग्रिड में आ जाती है।
  • स्टोरेज की भारी कमी (Lack of Storage): अतिरिक्त बिजली को स्टोर करने के लिए भारत में अभी ग्रिड-स्केल बैटरियां (Battery Energy Storage Systems) शुरुआती चरण में हैं।
  • थर्मल प्लांट की मजबूरी (Thermal Plant Limitations): कोयले से चलने वाले बिजली घरों (Coal Power Plants) को अचानक से बंद या धीमा नहीं किया जा सकता, क्योंकि उन्हें दोबारा शुरू करने में भारी खर्च और समय लगता है।
  • मांग और आपूर्ति में मिसमैच (Demand-Supply Mismatch): दोपहर में दफ्तरों और फैक्ट्रियों में एसी (AC) का लोड तो होता है, लेकिन घरेलू मांग शाम को सूरज ढलने के बाद (Peak Hours) बढ़ती है, जब सोलर पावर शून्य हो जाती है।

पावर सेक्टर पर इसका क्या होगा असर? (The Deep Impact)

बिजली की कीमत का शून्य (0) होना पहली नजर में आम उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर लग सकती है, लेकिन इसके पीछे का अर्थशास्त्र (Economics) बेहद डरावना है। इसका देश के रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपर्स (Renewable Energy Developers) और बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।

प्रभावित क्षेत्र (Sector)संभावित प्रभाव / नुकसान (Impact & Risks)
सोलर डेवलपर्स (Solar Developers)बिजली की कीमतें शून्य होने से उनका मुनाफा खत्म हो जाएगा, जिससे नए प्रोजेक्ट्स में निवेश रुक सकता है।
डिस्कॉम कंपनियां (Discoms)महंगी दरों पर लॉन्ग-टर्म पीपीए (PPA) साइन करने वाली कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा।
पावर ग्रिड (Power Grid)अचानक बिजली की ओवर-सप्लाई से ग्रिड ट्रिप होने या ब्लैकआउट (Blackout) का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों की राय और आधिकारिक इनपुट: आगे की राह क्या है?

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Power) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के आधिकारिक सूत्रों और ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया के डेटा के मुताबिक, भारत इस साल गर्मियों में 250-260 गीगावाट (GW) की रिकॉर्ड बिजली मांग को छू सकता है। ऐसे में दोपहर में बिजली का सरप्लस होना और रात में किल्लत होना एक गंभीर चुनौती है।

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एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस Power Prices Zero की समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार को तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:

  1. पंप्‍ड हाइड्रो स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (Pumped Hydro Storage): दोपहर की अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके पानी को ऊंचाई पर पहुंचाया जाए और रात में उसी पानी से पनबिजली बनाई जाए।
  2. टाइम ऑफ डे टैरिफ (Time-of-Day Tariff): उपभोक्ताओं को दोपहर के समय सस्ती बिजली का ऑफर देकर उस समय खपत बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
  3. ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen): अतिरिक्त सौर ऊर्जा को ग्रीन हाइड्रोजन बनाने में डायवर्ट किया जाए।

चतुर विचार (Editor’s Take)

संक्षेप में (In conclusion), भारत का पावर सेक्टर इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक्सचेंज पर Power Prices Zero का होना इस बात का अलार्म है कि अब हमें सिर्फ सोलर पैनल लगाने पर नहीं, बल्कि उस बिजली को सहेजने यानी एनर्जी स्टोरेज (Energy Storage) पर सबसे ज्यादा ध्यान देना होगा। अगर समय रहते ग्रिड को स्मार्ट और फ्लेक्सिबल नहीं बनाया गया, तो यह वरदान भारत के ऊर्जा आत्मनिर्भरता के सपने के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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