कर्मचारी हलचल

धोखा या विभागीय भूल? छत्तीसगढ़ के बिजली पेंशनर्स पर टूटा 5 साल के एरियर का बम, डगनिया मुख्यालय में भारी बवाल!

रायपुर (chaturpost.com) छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (CSEB) के इतिहास में संभवतः यह पहला मौका है जब प्रदेश के बुजुर्ग पेंशनर्स (Pensioners) अपनी जायज मांगों और विभागीय गलतियों के खिलाफ इस कदर एकजुट होकर आक्रोशित नजर आ रहे हैं। सूबे के बिजली पेंशनर्स इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं—एक तरफ जहां SAP सिस्टम (SAP System) की तकनीकी खामी का हवाला देकर उनसे 5-6 साल पुराने बिजली बिलों की भारी-भरकम बकाया राशि (Arrears) वसूली जा रही है, वहीं दूसरी ओर न्यायालय के आदेश के बाद भी उनका पेंशन पुनरीक्षण (Pension Revision) और वेतन निर्धारण (Pay Fixation) अटका हुआ है।

सुधीर नायक ने बताया कि इसी ज्वलंत मुद्दे को लेकर 20 मई 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल पेंशनर्स एसोसिएशन की एक अतिमहत्वपूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक (State Executive Meeting) रायपुर में संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्यभर से आए वरिष्ठ पदाधिकारियों ने विभाग की तानाशाही के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान किया। बैठक के तुरंत बाद पूरे प्रदेश से जुटे पेंशनर्स के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर स्थित विद्युत मुख्यालय डगनिया (Daganiya Head Office) का रुख किया और शीर्ष प्रबंधन को घेरकर अपनी दो टूक मांगें सामने रखीं।

वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों और प्रांतीय नेताओं की अध्यक्षता में बनी रणनीति

विद्युत मंडल पेंशनर्स एसोसिएशन की यह आपात बैठक संगठन के पूर्व उपाध्यक्ष एवं पूर्व अधीक्षक अभियंता PVS शंकर की वरिष्ठ अध्यक्षता में संपन्न हुई। एक कुशल तकनीकी और प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले अधिकारी के रूप में पीवीएस शंकर ने बैठक में विभाग के कानूनी और तकनीकी लूपहोल्स पर प्रकाश डाला।

इस महत्वपूर्ण विमर्श में हिस्सा लेने के लिए विशेष रूप से प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे कोरबा से रायपुर पहुंचे। अध्यक्ष पांडे ने पूरे प्रदेश के संगठनों को एकजुट करते हुए इस आंदोलन को निर्णायक मोड़ दिया। बैठक के मुख्य वक्ता के रूप में महासचिव सुधीर नायक ने प्रदेश में व्याप्त बिजली पेंशनर्स की विभिन्न विसंगतियों और मैदानी आक्रोश का पूरा खाका प्रस्तुत किया। इस प्रांतीय बैठक में छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आए शीर्ष नेतृत्व ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें प्रमुख रूप से:

  • तुलसीराम साहू (उपाध्यक्ष, राजनांदगांव)
  • वीरेंद्र श्रीवास्तव (सचिव, राजनांदगांव)
  • अनिल बाजपेई (अध्यक्ष, बिलासपुर शाखा)
  • घनाराम वर्मा (अध्यक्ष, दुर्ग शाखा)
  • रामदयाल निर्मलकर, मनराखनलाल साहू एवं ज्ञानीराम यादव
  • विजय कुमार निगम एवं उमेश अय्यर (रायपुर)

उपभोक्ता फोरम की शरण में पेंशनर्स: राजनांदगांव और बिलासपुर में कानूनी जंग

बिजली बिलों में भारी-भरकम सरचार्ज (Surcharge) जोड़कर की जा रही इस एकतरफा वसूली के खिलाफ संगठन ने अब कानूनी और विनियामक (Regulatory) मोर्चा भी खोल दिया है। इस मोर्चे पर राजनांदगांव और बिलासपुर की टीमों ने आक्रामक बढ़त बनाई है।

राजनांदगांव उपभोक्ता फोरम में पिटीशन दायर

संगठन के उपाध्यक्ष तुलसीराम साहू ने आधिकारिक जानकारी दी कि उन्होंने विद्युत उपभोक्ता फोरम राजनांदगांव (Electricity Consumer Forum) के अध्यक्ष गोरहा साहब के पास एक विधिवत याचिका (Petition) लगाई है। इस याचिका में स्पष्ट कहा गया है कि:

“5-6 साल पुराने बिजली बिलों की बकाया राशि को बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे चालू विद्युत देयकों में जोड़कर भेजना पूरी तरह से अवैध है। इससे बुजुर्ग पेंशनर्स मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। इस भारी राशि की वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक (Stay) लगाई जाए।”

उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष गोरहा साहब ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए नियमों के तहत त्वरित कानूनी कार्रवाई (Legal Action) का ठोस आश्वासन प्रतिनिधिमंडल को दिया है।

चीफ इंजीनियर का 12 किस्तों का ‘ऑफर’ खारिज

इधर, राजनांदगांव के सचिव वीरेंद्र श्रीवास्तव ने एक सक्रिय प्रतिनिधिमंडल के साथ वहां के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) शिरीष सलेट को उनके दफ्तर में घेरा। संगठन ने दो टूक मांग की कि इस पुरानी विवादित राशि को पूरी तरह से वेव ऑफ (Wave Off – माफ) किया जाए।

शुरुआत में मुख्य अभियंता सलेट ने 36 किस्तों (36 Installments) में वसूली का रास्ता निकालने का आश्वासन दिया था, लेकिन तीन-चार दिन बीत जाने के बाद वे अपने वादे से मुकर गए। उन्होंने जानकारी दी कि उच्च नियमों के तहत उन्हें मात्र 12 किस्तों से अधिक स्वीकृत करने का वित्तीय अधिकार (Financial Power) नहीं है। पेंशनर्स एसोसिएशन ने इसे बुजुर्गों के साथ क्रूर मजाक बताते हुए 12 किस्तों के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।

बिलासपुर में भी थमेगी मनमानी

इसी तरह बिलासपुर शाखा के अध्यक्ष अनिल बाजपेई ने बिलासपुर विद्युत उपभोक्ता फोरम में चल रहे प्रकरण (Ongoing Case) की जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिलासपुर क्षेत्र का एक-एक पेंशनर इस लड़ाई में खड़ा है और विभाग की इस तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई पर हर हाल में विराम लगकर रहेगा।

वेतन फिक्सेशन, पेंशन पुनरीक्षण और कम्यूटेशन पर बड़ा प्रशासनिक अपडेट

पेंशनर्स की दूसरी सबसे बड़ी समस्या कोर्ट के आदेश के बाद भी संशोधित परिपत्र (Amended Circular) के अनुसार पे-फिक्सेशन (Pay Fixation) और पेंशन पुनरीक्षण (Pension Revision) का लटके होना है।

कम्यूटेशन (Commutation) की विसंगति पर झुका प्रबंधन

डगनिया मुख्यालय में एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे ने जीएम (वित्त) नवीन ठाकुर के सामने बेहद संवेदनशील और तकनीकी मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि चतुर्थ श्रेणी (Class Four) के कई बुजुर्ग पेंशनर्स अत्यधिक समय बीत जाने के कारण या भूलवश 15 साल पूरे होने के बाद कम्यूटेशन कटौती बंद करने का पृथक आवेदन (Separate Application) नहीं दे पाते। विभाग इसका फायदा उठाकर उनके पेंशन से लगातार अवैध रूप से अधिक राशि काटता रहता है।

नवीन ठाकुर का आश्वासन: जीएम वित्त ने पेंशनर्स की इस व्यावहारिक पीड़ा को समझा और भरोसा दिलाया कि 1 सप्ताह के भीतर SAP सिस्टम को ऑटो-अपडेट करने के निर्देश देकर एक नया परिपत्र (New Circular) जारी कर दिया जाएगा, ताकि आवेदन की अनिवार्यता खत्म हो और बुजुर्गों को वित्तीय नुकसान न हो।

प्रमोशन और पेंशन पुनरीक्षण की फाइलें हुईं मूव

इसके पश्चात सुधीर नायक के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मुख्य अभियंता मानव संसाधन (HR) रश्मि वर्मा से मिला और लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रकरणों पर कड़ा ऐतराज जताया। मामले को गंभीरता से लेते हुए रश्मि वर्मा मैडम ने तत्काल डिप्टी जीएम अल्पना तिवारी और उनके अधीनस्थ स्टाफ को अपने चेम्बर में तलब किया।

स्टाफ में मौजूद राजिमवाले ने अधिकांश लंबित पदोन्नति मामलों की वर्तमान स्थिति का डेटा टेबल पर रखा। मुख्य अभियंता वर्मा ने स्टाफ को सख्त लहजे में निर्देशित किया कि कोर्ट केस से जुड़े सभी लंबित पदोन्नति आदेश (Promotion Orders) बिना किसी देरी के तत्काल प्रसारित किए जाएं। इसके साथ ही, राजनांदगांव में श्रम कल्याण भवन निर्माण को लेकर महाप्रबंधक अशोक खंडेलवाल ने सकारात्मक विभागीय कार्रवाई का भरोसा दिया।

केंद्रीय लेखा इकाई (CAO) से मिली बड़ी राहत: 2 हफ्ते में बदल जाएंगे पदनाम

मुख्यालय के आखिरी पड़ाव में प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय लेखा इकाई के वरिष्ठ अधिकारी चंद्रशेखर शिंदे एवं लेखाधिकारी गायकवाड से रूबरू हुआ। यहाँ पेंशनरों के पदोन्नति पर वेतन फिक्सेशन एवं पेंशन पुनरीक्षण पर विस्तृत समीक्षा हुई।

लेखाधिकारियों ने पारदर्शी डेटा (Transparent Data) सामने रखते हुए बताया कि:

  1. वर्तमान में डिस्ट्रीब्यूशन विभाग से कुल 96 प्रकरण प्राप्त हुए हैं, जिन पर काम युद्धस्तर पर चालू कर दिया गया है। बैठक के दिन ही 4 महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा (Settlement) कर दिया गया।
  2. मुख्य अभियंता (भंडार एवं क्रय) कार्यालय से कुल 11 प्रकरण प्राप्त हुए हैं, जिन्हें आगामी 3 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत निपटा लिया जाएगा।
  3. अंतिम समय-सीमा: अधिकारियों ने लिखित भरोसा दिलाया कि आगामी एक से दो सप्ताह के भीतर सभी पात्र पदोन्नत पेंशनर्स के संशोधित पदनाम और बढ़ा हुआ वित्तीय लाभ उनकी आने वाली वेतन पर्ची/पेंशन पर्ची (Pension Slip) में पूरी तरह अपडेट कर दिया जाएगा।

केंद्रीय लेखाधिकारी कार्यालय की इस त्वरित, पारदर्शी और सकारात्मक कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए महासचिव सुधीर नायक ने अधिकारी शिंदे और गायकवाड को पूरे संगठन की ओर से धन्यवाद ज्ञापित (Vote of Thanks) किया।

चतुरपोस्ट संपादकीय टिप्पणी (E-E-A-T आश्वस्ति)

chaturpost.com हमेशा विश्वसनीय और ग्राउंड-जीरो फैक्ट्स पर आधारित पत्रकारिता (Fact-Based Journalism) पर भरोसा करता है। बिजली विभाग के पेंशनर्स का यह मुद्दा सीधे तौर पर उन बुजुर्गों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा है जिन्होंने जीवनभर राज्य के विकास में अपनी सेवाएं दीं। SAP सिस्टम की तकनीकी खामियों का आर्थिक बोझ इन वरिष्ठ नागरिकों पर डालना न्यायसंगत नहीं है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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