
नवा रायपुर/रायपुर (chaturpost.com)। अखिल भारतीय राज्य सरकार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी फेडरेशन के राष्ट्रीय आह्वान पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारी अपने अधिकारों और अस्तित्व को लेकर एक बड़े देशव्यापी आंदोलन (Nationwide Movement) में सीधे कूद पड़े हैं।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक हलकों और मंत्रालय (Mahanadi Bhawan) से लेकर विभिन्न संचालनालयों (Indravati Bhawan) तक में खलबली मच गई है। फेडरेशन के राष्ट्रीय उपमहामंत्री (National Deputy General Secretary) योगेश चौरे और इंद्रावती भवन रायपुर के अध्यक्ष सुरेश कुमार ढीढी ने संयुक्त रूप से इस आंदोलन का शंखनाद किया है। छत्तीसगढ़ के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और दैनिक वेतन भोगियों की जायज मांगों को लेकर दो चरणों में यह प्रदेशव्यापी और देशव्यापी आंदोलन संचालित किया जाएगा, जिसकी शुरुआत सीधे छत्तीसगढ़ की धरती से होने जा रही है।
इंद्रावती भवन सहित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में लंच ब्रेक प्रदर्शन
कर्मचारी संगठन ने इस आंदोलन की रणनीति इस तरह से तैयार की है जिससे आम जनता के काम भी प्रभावित न हों और सरकार तक छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों की एकजुटता का कड़ा संदेश भी पहुंच जाए।
रायपुर मुख्यालय के कर्मचारी नेता सुरेश कुमार ढीढी के मुताबिक, 23 मई को नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन (Indravati Bhawan) सहित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों, तहसीलों और ब्लॉक स्तर के कार्यालयों में भोजन अवकाश (Lunch Break) के दौरान कर्मचारी एकजुट होंगे। लंच ब्रेक में सभी कर्मचारी सामूहिक रूप से एकत्र होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। प्रांतीय नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में बैठे चतुर्थ श्रेणी भाई-बहनों से अपील की है कि वे 23 मई को शत-प्रतिशत काली पट्टी लगाकर छत्तीसगढ़ की इस आवाज को दिल्ली तक पहुंचाएं।
7 जून 2026: छत्तीसगढ़ से हजारों कर्मचारी करेंगे दिल्ली कूच, जंतर-मंतर पर महापड़ाव
इस आंदोलन का मुख्य और सबसे निर्णायक चरण आगामी 7 जून 2026 को देश की राजधानी नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर दिखेगा।
राष्ट्रीय नेतृत्व के तत्वावधान में आयोजित होने वाली इस विशाल रैली (Massive Rally) में छत्तीसगढ़ से हजारों की संख्या में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, संविदा कर्मी, स्कूलों में कार्यरत मध्याह्न भोजन कर्मी (Mid-Day Meal Workers) और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विशेष ट्रेनों और बसों के माध्यम से दिल्ली कूच करेंगे। छत्तीसगढ़ का यह मजबूत प्रतिनिधित्व दिल्ली के जंतर-मंतर पर राज्य की स्थानीय और राष्ट्रीय विसंगतियों को पुरजोर तरीके से उठाएगा।
- 💰 1. 8वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन ₹69,000:** राज्य सरकारों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन सीधे 69 हजार रुपये तय किया जाए। इसके साथ ही 3.83 का फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) लागू हो और प्रतिवर्ष 6% वार्षिक इंक्रीमेंट (Annual Increment) की गारंटी दी जाए।
- 📜 2. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूर्ण बहाली:** 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त सभी राज्य कर्मचारियों के लिए शेयर बाजार आधारित एनपीएस को बंद कर पुरानी पेंशन बहाल हो। सेवानिवृत्ति के समय पेंशन अंतिम वेतन का 67% और फैमिली पेंशन (Family Pension) अनिवार्य रूप से 50% तय की जाए।
- 🛠️ 3. दैनिक वेतन भोगियों का नियमितीकरण:** विभिन्न विभागों में वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतन भोगी, मध्याह्न भोजन कर्मी (Mid-Day Meal Workers) और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का तत्काल प्रभाव से नियमितीकरण (Regularization) किया जाए।
- ❌ 4. आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा पर पूर्ण रोक:** शासकीय कार्यालयों में आउटसोर्सिंग (Outsourcing) की व्यवस्था को पूरी तरह से बंद किया जाए और भविष्य में किसी भी विभाग में ठेका प्रथा के जरिए मानव संसाधन की भर्ती पर पूर्ण रोक लगे।
- ⚖️ 5. दमनकारी काले कानून रद्द हों:** अलग-अलग राज्यों में कर्मचारियों के आंदोलन को कुचलने के लिए बनाए गए कर्मचारी विरोधी सभी दमनकारी और काले कानूनों (Draconian Laws) को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
- 📝 6. संविदा कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति:** वर्षों से महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे रहे संविदा कर्मचारियों (Contractual Employees) को नियमित किया जाए और भविष्य में संविदा नियुक्तियों पर पूरी तरह रोक लगाकर स्थायी नियमित भर्ती की जाए।
- 📢 7. रिक्त पदों पर तत्काल नियमित भर्ती:** देश के सभी राज्यों में चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पड़े लाखों पदों पर तत्काल पारदर्शी एवं नियमित भर्ती प्रक्रिया (Regular Recruitment Process) शुरू की जाए ताकि मौजूदा स्टाफ पर काम का बोझ कम हो सके।
- 🏠 8. भत्तों में व्यापक सुधार:** महंगाई के इस दौर को देखते हुए कर्मचारियों के गृह भाड़ा भत्ता यानी एचआरए (HRA) की अधिकतम दर को संशोधित कर बढ़ाकर 30% किया जाए।
- 📈 9. पदोन्नति (Promotion) की समयबद्ध गारंटी:** हर राज्य कर्मचारी को उसकी पूरी सेवा अवधि में करियर ग्रोथ (Career Growth) देने के लिए 30 साल की सेवा के भीतर कम से कम 5 पदोन्नति के निश्चित अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
छत्तीसगढ़ी अस्मिता और सम्मान की लड़ाई: योगेश चौरे और सुरेश ढीढी की हुंकार
इस बड़े छत्तीसगढ़ कर्मचारी प्रोटेस्ट (Chhattisgarh Employee Protest) को लेकर राष्ट्रीय उपमहामंत्री योगेश चौरे एवं इंद्रावती भवन के अध्यक्ष सुरेश कुमार ढीढी ने छत्तीसगढ़ के कोने-कोने के कर्मचारियों के नाम एक बेहद कड़ा और भावुक संयुक्त संदेश (Joint Message) जारी किया है।
कर्मचारी नेताओं ने अपने आधिकारिक बयान में कहा:
“यह लड़ाई केवल दिल्ली की नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के उन लाखों चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और संविदा कर्मियों के अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई है, जो दिन-रात शासकीय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में अपना पसीना बहाते हैं। बरसों से आउटसोर्सिंग, ठेका प्रथा और संविदा के नाम पर जो मानसिक और आर्थिक शोषण (Exploitation) किया जा रहा है, उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ के कर्मचारी अब चुप नहीं बैठेंगे। राष्ट्रीय आह्वान के सम्मान में बस्तर से लेकर सरगुजा तक और राजनांदगांव से लेकर रायगढ़ तक का एक-एक कर्मचारी 23 मई को काली पट्टी बांधकर दफ्तर पहुंचेगा और 7 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छत्तीसगढ़ की सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन करेगा।”
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स्थानीय पाठकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?
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चूंकि राज्य का एक बहुत बड़ा वर्ग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी नौकरियों और मानदेय आधारित सेवाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए 8वें वेतन आयोग के गठन से ठीक पहले न्यूनतम वेतन ₹69,000 करने की मांग और ओपीएस (OPS) की व्यावहारिक बहाली का यह आंदोलन सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों के परिवारों की अर्थव्यवस्था (Local Economy) को प्रभावित करता है। यही कारण है कि यह खबर छत्तीसगढ़ के हर शासकीय दफ्तर और घर-परिवार में इस समय सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रही है।
चतुरपोस्ट संपादकीय टिप्पणी (E-E-A-T आश्वस्ति)
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