
रायपुर (chaturpost.com): छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पेंशनभोगी समाज ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर बिगुल फूंक दिया है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ (Indian State Pensioners Federation Chhattisgarh) की पहली प्रांतीय कार्यसमिति (provincial executive committee) की एक बेहद महत्वपूर्ण और भव्य बैठक राजधानी के मधुपिल्ले चौक, शांतिनगर स्थित विमतारा भवन में संपन्न हुई।
इस बैठक में पूरे प्रदेश से आए पेंशनरों ने एक सुर में सरकार की नीतियों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। उन्होंने नारा दिया— “दोहरी नीति बंद करो, पेंशनरों को उनका अधिकार दो”। कार्यसमिति की इस बैठक में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से जिला अध्यक्ष, संभागीय अध्यक्ष, प्रांतीय व राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा (main agenda) पेंशनरों के हक के लिए भविष्य की रणनीति तैयार करना था, जिसमें सर्वसम्मति से 17 बड़े प्रस्ताव पारित किए गए।
पूर्व IAS अनुराग पाण्डेय ने किया शुभारंभ, संगठन की निष्ठा को सराहा
इस ऐतिहासिक प्रांतीय बैठक का विधिवत शुभारंभ महासंघ के संरक्षक, आजीवन सदस्य एवं बीजापुर के पूर्व कलेक्टर (retired IAS officer) श्री अनुराग पाण्डेय द्वारा भारतमाता के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
राष्ट्रवादी विचारधारा की ताकत
अपने संबोधन (address) के दौरान पूर्व आईएएस अनुराग पाण्डेय ने संगठन की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ में पूरी तरह से राष्ट्रवादी विचारधारा (nationalist ideology) के साथ काम करने वाला एक अनुशासित संगठन बन चुका है। आज प्रदेश के लाखों पेंशनर इस महासंघ पर भरोसा कर रहे हैं क्योंकि इसमें ईमानदारी और निष्ठा है। उन्होंने सभी वरिष्ठ नागरिकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मितव्ययता संदेश (message of austerity) का पालन करने की भी अपील की।
प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव का बड़ा दावा: छत्तीसगढ़ में सबसे मजबूत संगठन
बैठक को संबोधित करते हुए महासंघ के प्रांताध्यक्ष (state president) श्री वीरेन्द्र नामदेव ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में महासंघ की सदस्य संख्या (membership count) सबसे अधिक है, जो संगठन की जमीनी पकड़ को दर्शाता है।
उन्होंने आगामी कार्ययोजना (future action plan) पर चर्चा करते हुए सभी पदाधिकारियों से आह्वान किया कि आगामी 3 अगस्त को संगठन का स्थापना दिवस (foundation day) और 17 दिसंबर को राष्ट्रीय पेंशनर दिवस (National Pensioners Day) पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया जाए। उन्होंने साफ कहा कि पेंशनरों के अधिकारों की यह लड़ाई अब थमने वाली नहीं है।
सितंबर 2026 में न्यायधानी बिलासपुर में जुटेगा पेंशनर समाज
इस बैठक में एक और बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया गया। बिलासपुर के जिला अध्यक्ष राकेश जैन ने महासंघ की अगली प्रांतीय कार्यसमिति की बैठक सितंबर 2026 में बिलासपुर (Bilaspur) में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।
इस प्रस्ताव का वहां मौजूद सभी संभागीय और जिला पदाधिकारियों ने करतल ध्वनि और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत (welcomed enthusiastically) किया। इसके साथ ही तय हो गया कि आंदोलन की अगली रूपरेखा न्यायधानी बिलासपुर से तय होगी।
पेंशनरों के हक में पारित 17 मुख्य प्रस्ताव (Key Resolutions)
बैठक के दौरान पेंशनर्स एसोसिएशन (pensioners association) के नेताओं ने राज्य सरकार की “दोहरी नीति” पर कड़ा ऐतराज जताया। गहन विचार-विमर्श (detailed discussion) के बाद निम्नलिखित 17 सूत्रीय मांगों के प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए:
- दोहरी नीति पर तुरंत रोक (Stop Dual Policy): जिस प्रकार राज्य में IAS अधिकारियों और बिजली विभाग के पेंशनरों को केंद्र के समान 1 जनवरी 2026 से 2% महंगाई राहत (DR) दी जा रही है, ठीक उसी तरह राज्य सेवा के सामान्य पेंशनरों और परिवार पेंशनरों को भी यह लाभ तुरंत दिया जाए। भेदभाव बंद हो।
- 10 हजार करोड़ के पेंशन घोटाले की जांच (Scam Investigation): महासंघ की पहल पर वित्त विभाग की जांच में जो मध्य प्रदेश के हिस्से की 10 हजार करोड़ से अधिक की राशि की वसूली का मामला सामने आया है, उसकी लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच हो।
- 88 माह का बकाया एरियर (88 Months Arrears): मध्य प्रदेश से वसूली गई 2000 करोड़ रुपये की पहली किस्त की राशि से राज्य के पेंशनरों को उनके 88 महीने के बकाया डीआर एरियर (DR Arrears) का अंतरिम राहत के रूप में तत्काल भुगतान किया जाए।
- धारा 49(6) की बाध्यता खत्म हो (Abolish Section 49): मध्य प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) को समाप्त करने के लिए जरूरी विधायी कार्रवाई की जाए, ताकि देयताओं के भुगतान के लिए बार-बार एमपी सरकार से सहमति लेने का झंझट खत्म हो।
- “न मांग न जांच” प्रमाणपत्र में सख्ती (No Dues Certificate): कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति (retirement) के ठीक पहले “न मांग न जांच” प्रमाणपत्र जारी करने के कड़े निर्देश दिए जाएं। इसमें देरी करने वाले बाबुओं और अफसरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई (disciplinary action) हो।
- कैशलेस चिकित्सा सुविधा (Cashless Medical Scheme): बुजुर्गों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य के सभी पेंशनरों के लिए जल्द से जल्द कैशलेस इलाज की सुविधा लागू की जाए।
- 65 वर्ष की आयु से अतिरिक्त पेंशन (Additional Pension from 65 Years): वर्तमान में 80 वर्ष की आयु पूरी होने पर मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन वृद्धि का लाभ अब 65 वर्ष की आयु से ही देना शुरू किया जाए।
- पेंशनर कल्याण मंडल का पुनर्गठन (Reconstitution of Pensioner Board): छत्तीसगढ़ पेंशन कल्याण निधि नियम 1997 को निरस्त कर आज की स्थिति के अनुसार नई दरें तय की जाएं और कल्याण मंडल का पुनर्गठन कर उसमें महासंघ को प्रतिनिधित्व (representation) मिले।
- वरिष्ठ नागरिक कल्याण मंडल का गठन (Senior Citizen Welfare Board): बुजुर्गों के सामाजिक संरक्षण और सुरक्षा के लिए राज्य स्तर पर एक समर्पित मंडल का गठन हो।
- हाईकोर्ट के आदेश का पालन (High Court Order Compliance): बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश के तहत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों (daily wage workers) के पूरे सेवाकाल को पेंशन गणना में जोड़ा जाए। इसके साथ ही छठवें वेतनमान का 32 महीने और सातवें वेतनमान का 27 महीने का बकाया एरियर तुरंत दिया जाए।
- बस यात्रा में वास्तविक छूट (Concession in Bus Fare): 80 वर्ष वाले आदेश का प्रचार हो और 65 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को बसों में एक निश्चित प्रतिशत की छूट (fare concession) दी जाए।
- कम्यूटेशन रिकवरी की अवधि घटे (Commutation Recovery Period): पेंशनरों द्वारा ली गई कम्यूटेशन राशि की वसूली की समयसीमा को 15 साल से घटाकर 10 साल 8 महीने की जाए।
- रिटायरमेंट के दिन ही पूरा भुगतान (On-Day Retirement Benefit): सभी नवागंतुक पेंशनरों को उनके रिटायर होने की तारीख पर ही PPO के साथ ग्रैच्युटी, लीव एनकैशमेंट और GPF का पूरा भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- आधिक्य वसूली पर रोक (Stop Excess Recovery): सेवानिवृत्ति के बाद पेंशनरों से की जाने वाली किसी भी प्रकार की आधिक्य (excess) वसूली पर पूरी तरह से रोक लगे।
- सार्वजनिक स्थानों पर अलग व्यवस्था (Separate Windows for Seniors): राशन दुकानों, बैंकों और अन्य सरकारी कार्यालयों में बुजुर्गों के काम प्राथमिकता (priority) के आधार पर निपटाने के लिए अलग काउंटर बनें।
- ट्रेजरी से मुक्ति, अलग कार्यालय (Separate Pension Offices): पेंशन एवं भविष्य निधि संचालनालय के अधीन जिला और संभाग स्तर पर अलग से पेंशन कार्यालय स्थापित किए जाएं, ताकि बुजुर्गों को कोषालय (Treasury) के चक्कर न काटने पड़ें।
- एग्रेसिया सहायता राशि (Ex-Gratia Financial Assistance): किसी भी पेंशनर के दुखद निधन पर उनके परिजनों को दाह संस्कार और तात्कालिक खर्चों के लिए कम से कम 25 हजार रुपये की सहायता राशि शासन की तरफ से दी जाए।
उठाई आवाज: मांगें पूरी नहीं हुईं, तो होगा उग्र प्रदेशव्यापी आंदोलन
महासंघ के मंच से प्रांतीय पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में राज्य सरकार को चेतावनी दी है। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पेंशनर अपनी पूरी जिंदगी शासन की सेवा में खपा देते हैं, ऐसे में बुढ़ापे में अपने ही हक के पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटना और आंदोलन करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि इन 17 न्यायोचित मांगों पर शासन ने जल्द सकारात्मक निर्णय (positive decision) नहीं लिया, तो आने वाले समय में एक बड़ा प्रदेशव्यापी आंदोलन (state-wide agitation) छेड़ा जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन की होगी।
इन दिग्गज नेताओं ने साझा किए विचार, राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन
इस गरिमामयी बैठक में महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष द्रौपदी यादव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बी.के. वर्मा, कार्यकारी प्रांताध्यक्ष जे.पी. मिश्रा, उच्च शिक्षा प्रकोष्ठ के डॉ. महेश चंद्र शर्मा, विश्वविद्यालय प्रकोष्ठ के एन.के. चौबे और विधि सलाहकार एडवोकेट पूरनसिंह ने अपने कानूनी व संगठनात्मक विचार (organizational insights) रखे। इसके अलावा राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य एस.सी. श्रीवास्तव, पी.आर. साहू, कार्यालय मंत्री अनिल पाठक, संभागीय अध्यक्ष (बिलासपुर) राजेंद्र कश्यप और संभागीय अध्यक्ष (सरगुजा) गुरुचरण सिंह ने भी संगठन विस्तार पर जोर दिया।
कार्यक्रम का सफल और शानदार संचालन प्रांतीय महामंत्री प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने किया, जिन्होंने महासंघ के प्रतीक चिन्ह (Logo) की महत्ता समझाई। संगठन मंत्री टी.पी. सिंह ने सुमधुर संगठन गीत का सामूहिक गायन कराया। कार्यक्रम के अंत में सभी के प्रति आभार प्रदर्शन महामंत्री अनिल गोल्हानी ने किया।
बैठक के आखिरी सत्र में महासंघ के 13 दिवंगत पदाधिकारियों एवं सदस्यों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिसके लिए दो मिनट का मौन (two minutes of silence) रखा गया। इसके बाद सामूहिक राष्ट्रगान “जन-गण-मन” के साथ सभा का विसर्जन हुआ। कार्यक्रम के पश्चात सभी उपस्थित बुजुर्गों और पदाधिकारियों ने आत्मीय एवं अनौपचारिक माहौल में गरमा-गरम चाय और छत्तीसगढ़ी स्वाद वाली ‘झालमुड़ी’ का सानंद आनंद लिया।







