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Fuel Prices Hike: आम जनता को तगड़ा झटका! 10 दिन में तीसरी बार बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत

न्‍यूज डेस्‍क।  महंगाई की मार झेल रही आम जनता को शनिवार की सुबह-सुबह एक और बड़ा झटका (Sudden Shock) लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे भूचाल के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में आज से नई दरें लागू हो गई हैं।

डीलर्स से मिली जानकारी के मुताबिक, इस महीने में यह तीसरी बार है जब ईंधन की कीमतों में इजाफा किया गया है। ईरान संकट (Iran Conflict) और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है, जिसका सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।

दिल्ली में क्या हैं आज के नए रेट्स? (Current Fuel Rates)

अगर आप आज अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने की सोच रहे हैं, तो आपको पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में करीब 1 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • पेट्रोल की नई कीमत (New Petrol Price): दिल्ली में पेट्रोल के दाम 0.87 रुपये प्रति लीटर बढ़ गए हैं। इसके बाद अब यहां पेट्रोल की कीमत 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
  • डीजल की नई कीमत (New Diesel Price): डीजल की कीमतों में 0.91 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।

न केवल दिल्ली, बल्कि देश के अन्य राज्यों और महानगरों में भी लोकल टैक्स (VAT) के आधार पर कीमतों में बदलाव देखा जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति रही, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल का आंकड़ा 100 के पार जा सकता है।

महीने में तीसरी बार बढ़े दाम: क्यों आ रही है तेजी?

यह बढ़ोतरी कोई अचानक नहीं हुई है। दरअसल, यह इस महीने का तीसरा प्राइस हाइक (Price Hike) है। इससे पहले भी इसी हफ्ते के शुरुआती दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

उससे ठीक कुछ दिन पहले, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास सप्लाई चेन बाधित होने की चिंताओं के कारण ईंधन की कीमतों में एकमुश्त 3 रुपये प्रति लीटर की भारी वृद्धि की गई थी। देखा जाए तो एक हफ्ते के भीतर ही जनता पर यह दूसरी बड़ी मार है।

2022 के बाद खत्म हुआ स्थिरता का दौर

भारतीय ईंधन बाजार में पिछले दो सालों से एक अजीब सी शांति बनी हुई थी। अप्रैल 2022 के बाद से घरेलू रिटेल ईंधन की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई थीं। बीच में सिर्फ मार्च 2024 में सरकार की तरफ से आम जनता को राहत देते हुए 2 रुपये प्रति लीटर की एकमुश्त कटौती की गई थी।

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध (Russia-Ukraine War) शुरू होने के बाद वैश्विक तेल बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव आया था। उस वक्त उपभोक्ताओं को महंगाई के झटके से बचाने के लिए देश की प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने दैनिक मूल्य संशोधन (Daily Price Revision) पर रोक लगा दी थी। लेकिन अब स्थिति हाथ से बाहर होती दिख रही है।

क्रूड ऑयल का गणित: $69 से सीधे $114 पर पहुंचा कच्चा तेल

घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आ रही इस आग के पीछे मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार (International Energy Market) में कच्चे तेल की कीमतों का आसमान छूना है। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है:

  • फरवरी का औसत: फरवरी महीने में भारत का क्रूड ऑयल बास्केट (Crude Basket) औसतन $69 प्रति बैरल के आसपास था।
  • मौजूदा स्थिति: पश्चिम एशिया के ताजा संघर्षों और तनाव के कारण हाल के महीनों में यह कीमत उछलकर $113 से $114 प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है।

चूंकि कच्चा तेल बहुत महंगा हो चुका है, इसलिए तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान (Under-Recoveries) को कम करने के लिए सरकार के पास घरेलू कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

भारत की सबसे बड़ी कमजोरी: 90% आयात पर निर्भरता

भारत के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात (Crude Oil Imports) करते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली छोटी सी हलचल भी देश के बजट को बिगाड़ देती है।

जब भी वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) बढ़ता है, डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है या तेल उत्पादक देश (OPEC) उत्पादन में कटौती करते हैं, तो भारत के लिए कच्चा तेल खरीदना महंगा हो जाता है। इसका सीधा नतीजा देश के आम नागरिकों को महंगाई (Inflation) के रूप में भुगतना पड़ता है।

आगे क्या? क्या और महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल?

बाजार विश्लेषकों (Market Analysts) का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट (Middle East) यानी पश्चिम एशिया में शांति बहाल नहीं होती और ईरान संकट का कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के आसार बेहद कम हैं।

आने वाले दिनों में यदि क्रूड ऑयल $115 के स्तर को पार करता है, तो भारतीय तेल कंपनियां आने वाले हफ्तों में टुकड़ों-टुकड़ों में 50 पैसे से लेकर 1 रुपये तक की और बढ़ोतरी कर सकती हैं। ऐसे में आम आदमी को अपने मासिक बजट को री-शेड्यूल करने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई (Freight Charges) महंगी होती है, जिससे फल, सब्जियां और राशन का सामान भी महंगा हो जाता है।

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Disclaimer: chaturpost.com पर दी गई जानकारी डीलर्स से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित है। अपने शहर के सटीक और लाइव रेट्स के लिए कृपया नजदीकी फ्यूल स्टेशन या तेल कंपनियों के आधिकारिक ऐप्स चेक करें।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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