कर्मचारी हलचल

छत्तीसगढ़ के पंचायत सचिवों के शासकीयकरण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! समिति को मिला 45 दिन का अल्टीमेटम, मंत्रालय में अभ्यावेदन जमा

रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास और प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश के हजारों ग्राम पंचायत सचिवों के शासकीयकरण (Regularization Process) की वर्षों पुरानी मांग को लेकर उच्च न्यायालय बिलासपुर (High Court of Bilaspur) ने एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस न्यायिक आदेश के बाद अब राज्य शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय कमेटी को मात्र 45 दिनों के भीतर अपना अंतिम निर्णय (Final Decision) सार्वजनिक करना होगा।

इस महत्वपूर्ण अदालती आदेश के परिपालन में कल यानी 22 मई 2026 को बड़ी संख्या में पंचायत सचिवों के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय (Mahanadi Bhawan) पहुंचकर अपनी मांगों का आधिकारिक अभ्यावेदन (Official Representation) कमेटी के अध्यक्ष को सौंप दिया है। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब प्रदेश के पंचायत सचिवों में नियमितीकरण (Government Job Confirmation) को लेकर एक नई उम्मीद जाग उठी है।

क्या है पूरा मामला और क्यों फंसा था पेंच? (Background of the Dispute)

छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायत सचिव ग्रामीण विकास की रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। लंबे समय से ये कर्मी शासकीयकरण यानी शासकीय सेवा में पूर्ण संविलियन (Merger into Government Service) की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार ने पूर्व में इस संवेदनशील विषय पर विचार करने और रास्ता निकालने के लिए एक विशेष कमेटी (Government Committee) का गठन किया था।

महत्वपूर्ण बिंदु: इस समिति का मुख्य कार्य पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की वित्तीय और प्रशासनिक संभावनाओं का आकलन कर अंतिम निर्णय लेना था। हालांकि, समय बीतने के बाद भी इस समिति द्वारा निर्णय लेने में लगातार देरी (Delay in Decision) की जा रही थी, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था।

हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की मजबूरी (High Court Intervention)

जब सरकारी स्तर पर समिति की बैठकों और निर्णयों में विलंब होने लगा, तब पंचायत सचिवों के पास न्यायिक शरण में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम दास घिदौड़े और उनके साथी अधिकारियों ने अपने अधिवक्ता (Legal Advisor) के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के समक्ष एक रिट-याचिका (Service Writ Petition) प्रस्तुत की।

इस याचिका में मुख्य रूप से यह गुहार लगाई गई थी कि सरकार द्वारा गठित समिति को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपना फैसला सुनाने के लिए निर्देशित किया जाए, ताकि वर्षों से लंबित इस सेवा मामले (Pending Service Matter) का पटाक्षेप हो सके।

सिंगल बेंच का ऐतिहासिक आदेश: 45 दिनों की समय सीमा (The 45-Days Deadline)

उच्च न्यायालय बिलासपुर की एकल पीठ (Single Bench) ने इस मामले की गंभीरता को समझा। न्यायालय ने 20 नवंबर 2025 को इस रिट-याचिका (सर्विस) क्रमांक 8608/23 एवं अन्य संबद्ध मामलों का अंतिम निराकरण (Final Disposal) करते हुए एक बेहद स्पष्ट आदेश पारित किया।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि पंचायत सचिवों के शासकीयकरण और नियमितीकरण के संदर्भ में जो समिति गठित की गई है, वह याचिकाकर्ताओं की शिकायतों और मांगों के संदर्भ में विगत 45 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से अंतिम निर्णय (Definitive Judgment) ले। कोर्ट के इस आदेश ने सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती पर लगाम लगा दी है।

मंत्रालय (महानदी भवन) पहुंचे सचिव, सौंपा ज्ञापन (Representation Submission)

हाईकोर्ट के इसी आदेश के परिपालन (Compliance of Court Order) के तहत 22 मई 2026 को छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए पंचायत सचिवों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (Mahanadi Bhawan) का रुख किया। यहाँ उन्होंने समिति के अध्यक्ष के नाम एक विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत किया।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे पदाधिकारियों का कहना है कि उच्च न्यायालय के आदेश के तहत अब सरकार के पास समय सीमित है। इसलिए समिति को बिना किसी अतिरिक्त देरी के पंचायत सचिवों के शासकीयकरण / सविलियन का अंतिम निराकरण कर देना चाहिए।

इन प्रमुख जिलों और जनपदों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

मंत्रालय में अभ्यावेदन सौंपने के दौरान प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रमुख चेहरे शामिल थे, जो इस कानूनी लड़ाई (Legal Battle) को जमीन पर लड़ रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित नाम शामिल हैं:

शासकीयकरण से सचिवों को क्या होगा लाभ? (Benefits of Regularization)

यदि शासकीय समिति (Empowered Committee) इस 45 दिनों के भीतर पंचायत सचिवों के पक्ष में सकारात्मक निर्णय लेती है, तो इसके दूरगामी प्रशासनिक लाभ (Administrative Benefits) होंगे:

  • स्थायी सरकारी नौकरी का दर्जा: संविलियन होते ही वे सीधे राज्य शासन के अधीन पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी बन जाएंगे।
  • वेतनमान में सुधार (Pay Scale Upgradation): शासकीय नियमों के अनुसार नियमित वेतनमान, महंगाई भत्ता (DA) और अन्य भत्ते मिलने शुरू हो जाएंगे।
  • सामाजिक सुरक्षा (Social Security): पेंशन, ग्रेच्युटी और शासकीय सेवा के दौरान मिलने वाली अन्य चिकित्सा व सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा।
  • कार्यकुशलता में वृद्धि: नौकरी की असुरक्षा खत्म होने से ग्रामीण स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन (Scheme Implementation) में तेजी आएगी।

आगे क्या? विशेषज्ञों की राय

chaturpost.com के प्रशासनिक मामलों के जानकारों के अनुसार, हाईकोर्ट का यह निर्देश राज्य सरकार पर एक कानूनी बाध्यता (Legal Obligation) बनाता है। चूंकि यह मामला सीधे तौर पर लोक सेवकों और ग्रामीण विकास से जुड़ा है, इसलिए सरकार इस पर और अधिक टालमटोल नहीं कर सकती। अब सारा दारोमदार उस उच्च स्तरीय समिति पर है, जिसे अगले 45 दिनों के भीतर अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपनी है।

यदि समिति इस अवधि में निर्णय नहीं लेती है, तो यह सीधे तौर पर अवमानना (Contempt of Court) का मामला बन सकता है। ऐसे में पूरी उम्मीद है कि जून 2026 के अंत तक या जुलाई के प्रथम सप्ताह तक छत्तीसगढ़ के पंचायत सचिवों के भविष्य पर एक ऐतिहासिक और अंतिम मुहर लग जाएगी।

छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारे और कर्मचारी जगत की पल-पल की खबरों के लिए chaturpost.com के साथ बने रहें।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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