
रायपुर, न्यूज डेस्क । भारत के Power Sector India (ऊर्जा क्षेत्र) से इस वक्त कई बड़ी और चौंकाने वाली खबरें सामने आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक ऐतिहासिक फैसले से लेकर सरकारी और निजी कंपनियों के बड़े निवेश तक, बिजली और रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट में बड़ा हलचल मची है। अगर आप शेयर बाजार के निवेशक हैं या देश के विकास में रुचि रखते हैं, तो यह विस्तृत रिपोर्ट सिर्फ आपके लिए है।
आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि देश के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर (Power Infrastructure) में क्या-क्या बड़े बदलाव हुए हैं और कौन सी 7 खबरें आज सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: घोषित क्षमता दिखाना जिम्मेदारी है, कोई लक्ष्य नहीं!
भारत की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court of India) ने बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों (Power Generation Companies) को लेकर एक बेहद कड़ा और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि ग्रिड को अपनी बिजली उत्पादन की जो क्षमता घोषित की जाती है, उसे पूरा करना एक ‘सख्त दायित्व’ (Strict Liability) है, न कि कोई साधारण टारगेट।
तलवंडी साबो पावर पर लगा 162 करोड़ का जुर्माना
जस्टिस के. विनोद चंद्रन की अगुवाई वाली बेंच ने तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) पर पंजाब राज्य बिजली नियामक आयोग (SERC) द्वारा लगाए गए ₹162 करोड़ से अधिक के जुर्माने (Penalty) को बहाल कर दिया है।
- क्या था मामला? कंपनी जनवरी 2017 में चार अलग-अलग मौकों पर अपनी घोषित बिजली उत्पादन क्षमता को साबित करने में विफल रही थी।
- अदालत का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) के उस पुराने आदेश को खारिज कर दिया, जिसने कंपनी को राहत दी थी।
- नया नियम: अदालत ने कहा कि पंजाब स्टेट ग्रिड कोड के तहत क्षमता का प्रदर्शन न कर पाना सीधे तौर पर जुर्माना आकर्षित करता है। इसके लिए कंपनी की कोई गलत मंशा (Malicious Intent) या अवैध लाभ को साबित करने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही पंजाब राज्य पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को पेंडिंग राशि का एडजस्टमेंट जारी रखने की अनुमति मिल गई है।
NTPC तालचेर प्लांट का होगा महा-विस्तार, ₹11,678 करोड़ का मेगा प्लान
सरकारी पावर दिग्गज NTPC Limited के ओडिशा स्थित तालचेर थर्मल पावर प्रोजेक्ट (TTPP) के लिए एक शानदार खबर है। थर्मल प्रोजेक्ट्स के लिए बनी एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (EAC) ने इसके स्टेज-IV विस्तार (Stage-IV Expansion) के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है।
बिजली उत्पादन में बंपर बढ़ोतरी- क्या है योजना? अंगुल जिले में स्थित इस प्लांट में 1×800 MW का एक नया अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर यूनिट (Ultra-Supercritical Unit) लगाया जाएगा।
- कैपेसिटी बूस्ट: इस विस्तार के बाद तालचेर प्लांट की कुल स्थापित क्षमता (Installed Capacity) 1,320 मेगावाट से बढ़कर सीधे 2,120 मेगावाट (MW) हो जाएगी।
- बजट और पर्यावरण: इस पूरे प्रोजेक्ट पर ₹11,678.04 करोड़ की अनुमानित लागत आएगी। हालांकि, अभी कोयले का लिंकेज अलॉट होना बाकी है। ईएसी (EAC) ने पर्यावरण सुरक्षा को देखते हुए बाढ़ क्षेत्र प्रमाणन, जैव विविधता मूल्यांकन और कार्बन उत्सर्जन योजना जैसी कड़ी शर्तें रखी हैं। इसके तहत एनटीपीसी 142.72 हेक्टेयर में ग्रीनबेल्ट विकसित करेगी और लगभग 3,56,800 पौधे लगाएगी।
विक्रान इंजीनियरिंग ने किया धमाका: ओनिक्स लोन बंद कर NOPL सोलर को खरीदा
बिजली के बुनियादी ढांचे से जुड़ी प्रमुख कंपनी विक्रान इंजीनियरिंग लिमिटेड (Vikran Engineering) ने कॉर्पोरेट जगत में एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने ओनिक्स रिन्यूएबल लिमिटेड (Onix Renewable Limited) को दिए गए ₹49.15 करोड़ के लोन अरेंजमेंट को सफलतापूर्वक क्लोज कर दिया है।
इसके तहत, outstanding (बकाया) राशि में से ₹10 करोड़ को NOPL सोलर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के अधिग्रहण (Acquisition Consideration) में एडजस्ट किया गया है। बाकी बचे ₹39.15 करोड़ को अनसिक्योर्ड लोन के रूप में वर्किंग कैपिटल (Working Capital) यानी कार्यशील पूंजी में बदल दिया गया है।
इसके अलावा, विक्रान इंजीनियरिंग ने ₹5.10 करोड़ में NOPL सोलर प्रोजेक्ट्स में 51% की अतिरिक्त इक्विटी हिस्सेदारी खरीद ली है। अब इस कंपनी में विक्रान की हिस्सेदारी 49% से बढ़कर 100% (पूर्ण स्वामित्व) हो गई है।
क्यों खास है यह डील? NOPL सोलर इस समय महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM Scheme) के कंपोनेंट सी के तहत 969 मेगावाट (AC) का एक विशाल ग्रिड-कनेक्टेड सोलर पावर प्रोजेक्ट विकसित कर रही है।
मार्संस लिमिटेड को मिला अमेरिका से ₹29.85 करोड़ का बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर
भारतीय ट्रांसफार्मर निर्माता कंपनी मार्संस लिमिटेड (Marsons Limited) ने वैश्विक स्तर पर देश का नाम चमकाया है। कंपनी को अमेरिका (United States) के एक बड़े सोलर एनर्जी डेवलपर से ₹29.85 करोड़ (लगभग 3.1 मिलियन डॉलर) का एक बड़ा परचेज ऑर्डर मिला है।
इंटरनेशनल मार्केट में भारतीय दबदबा- क्या सप्लाई करना है? कंपनी अमेरिका के अलबामा राज्य के चेरोकी काउंटी में एक सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए 200 MVA, 115 kV का पावर ट्रांसफार्मर सप्लाई करेगी।
- समय सीमा: इस एक्सपोर्ट ऑर्डर (Export Order) को पूरा करने में 12 महीने से अधिक का समय लगने की उम्मीद है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह कोई रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन नहीं है। मार्संस वर्तमान में हाई वोल्टेज और एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (EHV) ट्रांसफार्मर बनाती है और अब 315 MVA, 400 kV क्लास के ट्रांसफार्मर के लिए एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी भी तैयार कर रही है।
CERC का बड़ा फैसला: पावर एक्सचेंजों के लिए नए टाइम स्लॉट को मंजूरी
केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने देश के बिजली व्यापार (Power Trading) को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए टर्म अहेड मार्केट (TAM), ग्रीन टर्म अहेड मार्केट (G-TAM), और हाई प्राइस टर्म अहेड मार्केट (HP-TAM) में कारोबार के लिए समय के स्लॉट को मानकीकृत (Standardised Time Slots) कर दिया है।
अब देश में क्षेत्र-विशिष्ट (Region-Specific) पीक और ऑफ-पीक स्लॉट के बजाय सौर और गैर-सौर घंटों (Solar and Non-Solar Hours) पर आधारित एक राष्ट्रीय ढांचा लागू होगा।
अनुमोदित अनुबंध श्रेणियां (Approved Contract Categories):
- राउंड-द-क्लॉक (RTC) अनुबंध
- सोलर अनुबंध (Solar Contracts)
- मॉर्निंग, डे, और इवनिंग अनुबंध
- नॉन-सोलर और नाइट अनुबंध (Fixed Delivery Windows के साथ)
नियामक निकाय CERC ने ग्रिड इंडिया (Grid India) की उस सिफारिश को स्वीकार कर लिया है जिसमें कहा गया था कि क्षेत्रवार स्लॉट होने से बाजार की तरलता (Liquidity) बिखर जाती है और सही कीमत का पता लगाने (Price Discovery) में दिक्कत होती है। सभी पावर एक्सचेंजों को एक सप्ताह के भीतर इसे लागू करने का निर्देश दिया गया है।
SPML इन्फ्रा को राजस्थान में मिला ₹165.4 करोड़ का बड़ा ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट
बुनियादी ढांचा विकास कंपनी SPML इन्फ्रा लिमिटेड (SPML Infra) ने राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (RRVPNL) से ₹165.41 करोड़ का एक बड़ा ठेका हासिल किया है।
यह प्रोजेक्ट राजस्थान के कोटा में डहरा (Dahra in Kota) नामक स्थान पर 400 kV का ग्रिड सबस्टेशन और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए है। इस प्रोजेक्ट को अगले 24 महीनों के भीतर पूरा किया जाना है।
इसके तहत 400 kV ग्रिड सबस्टेशन की सप्लाई, निर्माण, टेस्टिंग और कमिशनिंग का काम शामिल है। यह ऑर्डर मिलने से एसपीएमएल इन्फ्रा की हाई-विद्युत ट्रांसमिशन सेगमेंट में स्थिति और मजबूत होगी, जो इसके तेजी से बढ़ते बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS – Battery Energy Storage System) के बिजनेस को भी सपोर्ट करेगा।
TARIL को गुजरात (GETCO) से मिला ₹228.3 करोड़ का बड़ा ऑर्डर
ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स (इंडिया) लिमिटेड (TARIL) के ऑर्डर बुक में एक और बड़ा इजाफा हुआ है। कंपनी को गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GETCO) से ₹228.26 करोड़ का एक बड़ा वर्क ऑर्डर प्राप्त हुआ है।
इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनी को छह ट्रांसफार्मर और दो रिएक्टरों का निर्माण और सप्लाई करनी है, साथ ही उससे जुड़े अन्य सिविल वर्क्स भी पूरे करने हैं। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की अंतिम समय सीमा अगस्त 2028 तय की गई है।
विकसित भारत 2047 का विजन: कंपनी का कहना है कि यह ऑर्डर भारत सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के तहत देश के यूटिलिटी-स्केल प्रोजेक्ट्स और ट्रांसमिशन नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे कंपनी की स्थिति मार्केट में और मजबूत होगी।
Chatur विचार (Editor’s Take)
भारत का Power Sector India इस समय एक बड़े बदलाव के दौर (Transition Phase) से गुजर रहा है। एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट के कड़े फैसलों से नियमों का पालन सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ एनटीपीसी जैसी सरकारी कंपनियां और मार्संस या विक्रान जैसी निजी कंपनियां रिन्यूएबल और थर्मल एनर्जी के मिश्रण से भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रही हैं। शेयर बाजार के निवेशकों को इन सभी कंपनियों के स्टॉक्स पर अपनी नजर बनाकर रखनी चाहिए।
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