
रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली वितरण कंपनी, यानी CSPDCL (Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited) को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है।
पावर कंपनी के गलियारों में आजकल एक ही चर्चा आम है, “क्या अफसरों ने CSPDCL को वाकई में ‘डस्टबिन’ (Dustbin) समझ लिया है?” यह गंभीर आरोप किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि बिजली कंपनियों के भीतर काम करने वाले और सेवानिवृत्त हो चुके वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी संगठनों ने लगाए हैं। इस पूरे मामले में अब CSPCL Dispute (बिजली कंपनी विवाद) इतना बढ़ गया है कि बात मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पहुंच चुकी है।
क्यों लग रहे हैं CSPDCL को ‘डस्टबिन’ बनाने के आरोप?
कर्मचारी नेताओं और यूनियनों का तर्क बेहद सीधा और तीखा है। उनका कहना है कि पावर सेक्टर की अन्य होल्डिंग कंपनियां अपना सारा ‘कचरा’ (विवादास्पद या अतिरिक्त बोझ वाले फैसले) डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी यानी CSPDCL के पाले में धकेल देती हैं ।
इसके पीछे कर्मचारी नेताओं ने कई बड़े उदाहरण (Case Studies) सामने रखे हैं:
- 500 भू-विस्थापितों का बोझ: जनरेशन कंपनी (CSPGCL) की जिम्मेदारी जिन 500 से अधिक भू-विस्थापितों (Land Oustees) को संभालने की थी, उन्हें चतुराई से डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में संविदा नियुक्ति (Contract Appointment) पर भेज दिया गया।
- नियमों की अनदेखी: मजेदार बात यह है कि पावर कंपनियों के मौजूदा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव आईएएस सुबोध कुमार सिंह (IAS Subodh Kumar Singh) जब पूर्व में वितरण कंपनी के एमडी (MD) थे, तब उन्होंने इन भू-विस्थापितों को डिस्ट्रीब्यूशन में संविदा पर लेने से साफ मना कर दिया था। लेकिन जैसे ही वे वहां से हटे, अफसरों ने 500 भू-विस्थापितों का पूरा वित्तीय बोझ कंपनी पर डाल दिया।
- अनुकंपा नियुक्ति में खेल: इसी तरह, जनरेशन कंपनी अपने मृत कर्मचारियों के आश्रितों को खुद अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) देने के बजाय, उन्हें डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में ट्रांसफर (Transfer) कर देती है।
इसी प्रशासनिक लापरवाही (Administrative Laxity) के कारण अब यह कहा जा रहा है कि डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी का इस्तेमाल अधिकारी केवल अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए एक डस्टबिन की तरह कर रहे हैं।
नया विवाद: HR के अफसरों को भेज दिया वित्त विभाग में!
इस जलते हुए विवाद (Current Controversy) में घी डालने का काम छत्तीसगढ़ विद्युत सेवानिवृत्त कर्मचारी-अधिकारी संघ (महासंघ) के एक तीखे विरोध पत्र ने किया है । महासंघ के प्रदेश महामंत्री पुनारद राम साहू (Punarad Ram Sahu) ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज (CSPCL) के अध्यक्ष को एक बेहद कड़ा पत्र भेजा है ।
इस पत्र में मुख्य अभियंता (मानव संसाधन), CSPTCL द्वारा जारी पदोन्नति आदेश क्रमांक 413658 (दिनांक 08-05-2026) का कड़ा विरोध किया गया है । आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी / सहायक प्रबंधक (HR) से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी / प्रबंधक (HR) के पद पर हुई पदोन्नति सह पदस्थापना में नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं ।
कॉमन कैडर के नाम पर प्रशासनिक अराजकता (Administrative Anarchy)
बिजली कंपनियों में फाइनेंस (Finance) और एचआर (HR) दोनों पूरी तरह से अलग-अलग संवर्ग (Cadre) हैं । जहां वित्त विभाग के लिए CA / ICWA जैसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification) चाहिए, वहीं एचआर विभाग के लिए MBA-HR अनिवार्य है ।
यद्यपि इन दोनों कैडरों को ‘कॉमन कैडर’ (Common Cadre) में रखकर इनकी वरिष्ठता (Gradation List) एक साथ बनाई जाती है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इनके मूल पदों की तकनीकी पहचान (Technical Identity) ही खत्म कर दी जाए ।
“यदि इस तरह से किसी भी संवर्ग के अधिकारी को किसी भी विभाग में मनमाने ढंग से बैठाया जाने लगा, तो भविष्य में यह एक गलत नजीर (Precedent) बन जाएगा और प्रबंधन अपनी मर्जी से प्रशासनिक अराजकता को बढ़ावा देगा।” — पुनारद राम साहू, प्रदेश महामंत्री, कर्मचारी महासंघ
निजीकरण और आउटसोर्सिंग (Privatization & Outsourcing) की बू!
इस पूरे मामले में अब एक बड़ा कॉर्पोरेट षड्यंत्र (Corporate Conspiracy) भी सामने आ रहा है। महासंघ ने सीधे तौर पर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) के प्रबंधन की मंशा पर यक्ष प्रश्न (Burning Question) खड़ा किया है:
- बिना वित्तीय बैकग्राउंड के एंट्री: डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंधन ने आखिर किस दबाव में आकर गैर-वित्तीय पृष्ठभूमि (Non-Financial Background) के अधिकारियों को अपने वित्त विभाग में एंट्री दी?
- वित्त विभाग है रीढ़ की हड्डी: बिजली बिलिंग (Electricity Billing), राजस्व (Revenue Generation) और वाणिज्यिक संपादन के लिए वित्त विभाग किसी भी बिजली कंपनी की रीढ़ की हड्डी होता है । उसे इस तरह कमजोर क्यों किया जा रहा है?
- चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) आउटसोर्स: वर्तमान में CSPDCL के वित्त विभाग में लगभग एक दर्जन चार्टर्ड अकाउंटेंट आउटसोर्स (Outsource) के माध्यम से काम कर रहे हैं । कर्मचारी नेताओं को आशंका है कि नियमित संवर्ग (Regular Cadre) को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है ताकि भविष्य में पूरे विभाग का निजीकरण (Privatization) या पूर्ण आउटसोर्सिंग की जा सके ।
जनरेशन कंपनी की दोहरी नीति (Double Standard Policy)
विवाद यहीं खत्म नहीं होता। एक तरफ जनरेशन कंपनी (CSPGCL) ने अपने यहाँ स्वीकृत पद होने के बावजूद एचआर कैडर के योग्य अधिकारियों को रखने से मना कर दिया है । वहीं दूसरी तरफ, जनरेशन कंपनी के एचआर विभाग में दर्जनों तकनीकी अभियंता (Technical Engineers) बैठकर गैर-तकनीकी मानव संसाधन (HR) का कार्य देख रहे हैं ।
यह अपने आप में एक बड़ा विरोधाभास (Contradiction) है कि मूल और योग्य एचआर अधिकारियों को तो वित्त विभाग में धकेला जा रहा है, और इंजीनियरों से बाबूगिरी कराई जा रही है ।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश
महासंघ ने याद दिलाया कि ये पद तत्कालीन MPEB (Madhya Pradesh Electricity Board) के समय से निचले वर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति (Promotion) के लिए बेहद प्रतिष्ठित पद थे । कालांतर में प्रबंधन ने इन पदों की महत्ता को देखते हुए योग्य व्यावसायिकों (MBA-HR और CA) की सीधी भर्ती (Direct Recruitment) शुरू की थी । लेकिन आज वर्तमान प्रबंधन की उपेक्षा (Negligence) के कारण बिजली कंपनियों के कैडर स्ट्रक्चर में भारी असंतोष (Dissatisfaction) व्याप्त हो गया है ।
महासंघ की अंतिम चेतावनी और मांगें
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए छत्तीसगढ़ विद्युत सेवानिवृत्त कर्मचारी अधिकारी संघ/महासंघ ने माननीय अध्यक्ष महोदय से न्यायपूर्ण और त्वरित निर्णय (Quick Decision) की मांग की है:
- दोषपूर्ण पदस्थापना निरस्त हो: दिनांक 08-05-2026 के पदोन्नति आदेश के सरल क्रमांक 11 एवं 14 के अधिकारियों की CSPDCL के वित्त विभाग में की गई गलत पदस्थापना को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) किया जाए ।
- मूल संवर्ग में हो वापसी: इन अधिकारियों को उनके मूल संवर्ग (HR/मानव संसाधन) के अनुरूप ही जनरेशन कंपनी या अन्य कंपनी के एचआर विभाग में पदस्थ करने हेतु संशोधित आदेश (Amended Order) जारी किया जाए ।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इस विरोध पत्र की प्रतिलिपि माननीय मुख्यमंत्री महोदय, माननीय मुख्य सचिव महोदय और माननीय ऊर्जा सचिव महोदय (छत्तीसगढ़ शासन) को भी आवश्यक विधिक हस्तक्षेप (Legal Intervention) हेतु सादर प्रेषित कर दी गई है ।
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव और पावर कंपनी के अध्यक्ष इस CSPCL Dispute पर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं, या फिर CSPDCL को ‘डस्टबिन’ बनाने का यह खेल यूं ही परदे के पीछे चलता रहेगा!
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