कर्मचारी हलचल

बि‍जली कंपनी के 3 कर्मचारी संगठनों ने खोला मोर्चा, पढ़ें क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें जिसके पीछे छिड़ा है ये महा-संग्राम!

रायपुर/कोरबा (chaturpost.com) छत्तीसगढ़ राज्य बिजली कंपनी (State Electricity Company) के भीतर लंबे समय से सुलग रहा असंतोष अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेने जा रहा है। विभिन्न लंबित मांगों को लेकर अलग-अलग बिजली कर्मचारी संगठनों ने प्रबंधन के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है।

परिणामस्वरूप (Consequently), बिजली कर्मचारियों से जुड़े तीन प्रमुख संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो काम पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।

संविदा कर्मचारी संघ का बड़ा ऐलान: 22 जून से हड़ताल

इस पूरे आंदोलन में सबसे आक्रामक रुख संविदा कर्मचारी संघ (Contract Employees Union) ने अपनाया है। 25 मई को बिजली कंपनी मुख्‍यालय के सामने प्रदर्शन्‍ के बाद संघ ने साफ कर दिया है कि 22 जून से वे बेमियादी हड़ताल (Indefinite Strike) पर जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ ने अपनी एकमात्र और सबसे बड़ी मांग—नियमितीकरण—को लेकर आंदोलन को तेज कर दिया है। संविदा कर्मियों का कहना है कि वे वर्षों से बिजली कंपनी में अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें स्थायी नहीं किया गया।

इसके अतिरिक्त (In addition), संविदा कर्मचारियों का दर्द यह है कि वे नियमित कर्मचारियों की तरह ही कठिन और जोखिम भरा काम करते हैं। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम वेतन और सीमित सुविधाएं दी जा रही हैं। हाल ही में इन कर्मचारियों ने बिजली कंपनी मुख्यालय के सामने उग्र प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की थी। अब वे किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं और आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। संविदा कर्मियों के हड़ताल पर जाने से मैदानी स्तर पर फॉल्ट सुधारने और बिजली आपूर्ति बहाल रखने का काम पूरी तरह ठप हो सकता है।

ये हैं बिजली कर्मचारियों की प्रमुख मांगें (Major Demands)

छत्तीसगढ़ राज्य बिजली कंपनियों में सक्रिय श्रमिक संगठनों ने प्रबंधन के सामने अपनी मांगों की एक लंबी सूची रखी है। इन मांगों पर लंबे समय से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ: कर्मचारी संगठन अप्रैल 2004 से नियुक्त बिजली कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए भी इसके पूर्व संयुक्त कर्मचारी की तरह ओल्ड पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) लागू करने की मांग कर रहे हैं। इस मांग पर पूर्व में प्रबंधन के साथ सैद्धांतिक सहमति भी बन चुकी है, लेकिन इसे धरातल पर नहीं उतारा गया।
  • संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण (Regularization): वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मियों को तत्काल नियमित सेवा में लिया जाए और उन्हें समान कार्य-समान वेतन का लाभ मिले।
  • तकनीकी भत्ता (Technical Allowance): बिजली कंपनी में कार्यरत सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए तीन प्रतिशत (3%) की तकनीकी भत्ते की मांग की गई है, जो वर्तमान में नहीं दिया जा रहा है।
  • समय पर पदोन्नति (Promotion): तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के पदों की रिस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) की जाए और समय पर प्रमोशन सुनिश्चित किया जाए।
  • वेज रिवीजन (Wage Revision): वेतन विसंगतियों को दूर करते हुए नया वेज रिवीजन तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।

जनता यूनियन चला रहा है जनप्रतिनिधि संपर्क अभियान

छत्तीसगढ़ राज्य बिजली जनता कर्मचारी यूनियन ने एक अनोखा जनप्रतिनिधि संपर्क अभियान (Public Representative Contact Campaign) शुरू किया है। इसके तहत यूनियन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता क्षेत्र के विधायकों, सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं। वे उन्हें बिजली कर्मचारियों की समस्याओं और प्रबंधन की उदासीनता से अवगत करा रहे हैं।

विशेष रूप से (Specifically), यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारी अनिल द्विवेदी का कहना है कि बिजली कर्मचारियों की मांगें पूरी तरह न्यायोचित हैं, लेकिन लंबे समय से बिजली कर्मचारियों की घोर उपेक्षा की जा रही है। संघ के अनुसार, वर्तमान में मैदानी और तकनीकी कर्मचारियों पर लगातार काम का दबाव (Work Pressure) बढ़ रहा है। समय पर पदोन्नति नहीं मिलने और नई भर्तियों में अत्यधिक देरी होने से युवाओं और अनुभवी कर्मियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

भारतीय मजदूर संघ-महासंघ का आरोप: प्रबंधन कर रहा है टालमटोल

भारतीय मजदूर संघ से जुड़े बिजली कर्मचारी संघ-महासंघ ने बिजली कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महासंघ का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर कई बार प्रबंधन के साथ उच्च स्तरीय चर्चाएं हुईं। बैठकों में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति भी बनी और लिखित-मौखिक आश्वासन भी दिए गए, लेकिन आज तक उन पर वास्तविक अमल नहीं हुआ।

निश्चित रूप से (Certainly), प्रबंधन की इस टालमटोल नीति की वजह से अब कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे गया है। संगठन के महामंत्री नवरतन बरेठ ने बताया कि बीते माह एचटीपीएस (HTPS) और डीएसपीएम (DSPM) प्लांट के समक्ष जोरदार प्रदर्शन कर बिजली कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने के लिए अध्यक्ष के नाम प्रबंधन को एक अल्टीमेटम पत्र दिया गया था। इसके बाद भी जब कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला, तब जाकर चरणबद्ध आंदोलन का कड़ा फैसला लिया गया है।

जानिए चरणबद्ध आंदोलन का पूरा शेड्यूल (Protest Schedule)

बिजली कर्मचारियों ने शासन और प्रबंधन को घेरने के लिए एक बेहद व्यवस्थित और कड़ा शेड्यूल तैयार किया है। यह आंदोलन तीन अलग-अलग चरणों में चलाया जाएगा ताकि सरकार पर अधिकतम दबाव बनाया जा सके:

·  प्रथम चरण (1 से 30 जून): पूरे प्रदेश के बिजली दफ्तरों में ‘वृहद संपर्क व हस्ताक्षर अभियान’ चलाया जा रहा है।

·  द्वितीय चरण (1 से 9 जुलाई): राज्य के सभी क्षेत्रीय मुख्यालयों (Regional Headquarters) में उग्र प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा जाएगा।

·  तृतीय चरण (10 जुलाई): राजधानी रायपुर में एक विशाल आक्रोश रैली (Protest Rally) निकाली जाएगी और एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

नोट –यह समाचार रिपोर्ट प्राथमिक स्रोतों, छत्तीसगढ़ राज्य बिजली कंपनी के आधिकारिक कर्मचारी संघों के ज्ञापनों, और कोरबा-रायपुर में संगठन सचिवों द्वारा जारी बयानों के गहन विश्लेषण के आधार पर तैयार की गई है। chaturpost.com निष्पक्ष और तथ्य-आधारित पत्रकारिता के प्रति जवाबदेह है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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