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Teacher Pension Crisis: बुढ़ापे में सम्मान पर आघात! छत्तीसगढ़ में रिटायर्ड शिक्षकों की पेंशन रुकी, भड़के पेंशनर्स ने दी ‘Pensioners Protest’ की चेतावनी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग (Education Department) से एक बेहद असंवेदनशील मामला सामने आया है। राष्ट्र का निर्माण करने वाले और समाज को नई दिशा देने वाले शिक्षक आज सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद अपने ही हक के पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ (Bharatiya State Pensioners Federation) ने इस पूरे मामले पर गहरी चिंता और भारी आक्रोश व्यक्त किया है।

महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जीवन भर देश और समाज के लिए राष्ट्र निर्माता (Nation Builders) तैयार करने वाले शिक्षक आज अपनी वैधानिक पेंशन (Statutory Pension) और सेवानिवृत्ति लाभों के लिए भटक रहे हैं। यह स्थिति किसी भी संवेदनशील शासन व्यवस्था के लिए बेहद शर्मनाक है।

पदोन्नति तो मिली, पर 6 महीने से अटकी है पेंशन

महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने शिक्षा विभाग की प्रशासनिक उदासीनता (Administrative Apathy) को उजागर करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में अनेक ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें व्याख्याता (Lecturer) से प्राचार्य (Principal) के पद पर पदोन्नति (Promotion) मिलने के बाद सेवानिवृत्त किया गया था। लेकिन, विडंबना देखिए कि आज छह-छह महीने बीत जाने के बाद भी उनके अंतिम सेवानिवृत्ति आदेश और सबसे महत्वपूर्ण “न मांग-न जांच प्रमाण पत्र” (No Dues Certificate) जारी नहीं किए गए हैं।

बड़ा संकट: इन जरूरी दस्तावेजों के अटकने के कारण इन बुजुर्गों का पेंशन भुगतान आदेश यानी PPO (Pension Payment Order) जारी नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि इन रिटायर्ड शिक्षकों को नियमित पेंशन (Regular Pension) का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

90% अनुमानित पेंशन देने में भी विभाग दिखा रहा है ढुलमुल रवैया

नियमों का हवाला देते हुए महासंघ ने अधिकारियों को घेरा है। सरकारी नियमों के अनुसार, जब तक स्थायी पीपीओ (PPO) जारी नहीं हो जाता, तब तक पात्र कर्मचारियों को 90 प्रतिशत अनुमानित पेंशन (Provisional Pension) का भुगतान किया जा सकता है।

लेकिन, आरोप है कि छत्तीसगढ़ का शिक्षा विभाग इस मानवीय और कानूनी व्यवस्था को लागू करने में भी कोई रुचि (Interest) नहीं दिखा रहा है। पेंशनर्स का आरोप है कि विभाग जानबूझकर इस प्रक्रिया को टाल रहा है।

इन भत्तों और भुगतानों पर भी लगा है अघोषितबैन

शिक्षकों को केवल मासिक पेंशन ही नहीं, बल्कि उनके जीवनभर की कमाई के अन्य हिस्से भी नहीं मिल रहे हैं। महासंघ के अनुसार, निम्नलिखित देयकों को अनावश्यक रूप से रोका गया है:

  • अवकाश नगदीकरण (Leave Encashment)
  • समूह बीमा (Group Insurance – GIS)
  • फैमिली बेनिफिट (Family Benefit Scheme)
  • ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ (Retirement Benefits)

इन भुगतानों के रुकने की वजह से वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स (Senior Citizen Pensioners) और उनके परिवार इस समय गंभीर आर्थिक तंगी (Financial Crisis) और मानसिक तनाव (Mental Stress) के दौर से गुजर रहे हैं।

शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह को सौंपा गया ज्ञापन

इस गंभीर और संवेदनशील विषय को लेकर भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने अपनी आवाज बुलंद की है। महासंघ द्वारा शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह (Dr. Kamalpreet Singh) को एक विस्तृत मांग पत्र यानी ज्ञापन (Memorandum) सौंपकर इन सभी लंबित प्रकरणों का तुरंत निराकरण (Quick Redressal) करने का आग्रह किया गया है।

नेताओं का कहना है कि यह विषय अब शासन, संबंधित मंत्रियों और उच्च अधिकारियों के संज्ञान (Knowledge) में भी है। इसके बावजूद अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई (Concrete Action) न होना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

पेंशन कोई भीख या दया नहीं, हमारा संवैधानिक अधिकार है”

महासंघ के प्रदेश महामंत्री अनिल गोल्हानी एवं प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने संयुक्त बयान जारी करते हुए विभाग को चेतावनी दी है।

“पेंशन कोई दया, दान या अनुग्रह (Gratuity/Charity) नहीं है। यह एक सेवानिवृत्त कर्मचारी का संवैधानिक और वैधानिक अधिकार (Constitutional Right) है। बुढ़ापे के इस पड़ाव पर शिक्षकों को उनके इस मौलिक अधिकार से वंचित रखना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और अमानवीय है।”

पूरे छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स में भारी आक्रोश (District Wise Protest Trigger)

इस मुद्दे को लेकर केवल रायपुर ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आवाज उठने लगी है। शिक्षा विभाग से जुड़े महासंघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एक सुर में इस व्यवस्था के खिलाफ रोष (Anger) व्यक्त किया है।

लंबित प्रकरणों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले प्रदेशभर के मुख्य पदाधिकारियों की सूची इस प्रकार है:

संभाग/जिलावरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम (पेंशनर्स महासंघ)
बस्तर संभागरामनारायण ताटी (बस्तर), आर.डी. झाड़ी (बीजापुर), शेख कसिमुद्दीन (सुकमा), रूपकुमार झाड़ी (दंतेवाड़ा), एस.एन. देहारी (नारायणपुर)
रायपुर संभागक्रांति कुमार सोनी (रायपुर), खोड़सराम कश्यप (बलौदाबाजार), रिखीराम साहू (महासमुंद), लखनलाल साहू (गरियाबंद), ओ.डी. शर्मा
दुर्ग व अन्यपी.आर. साहू (दुर्ग), परमेश्वर स्वर्णकार (जांजगीर-चांपा), सुहास लाम्बट (रायगढ़), सुरेन्द्र सिंह (जीपीएम)

इन सभी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते शिक्षकों को उनके बकाये का भुगतान नहीं किया गया, तो इसे पूरे शिक्षक समाज (Teacher Community) के आत्मसम्मान पर आघात माना जाएगा।

भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ की प्रमुख मांगें (Key Demands)

महासंघ ने सरकार और विभाग के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:

  • तत्काल आदेश: लंबित सेवानिवृत्ति आदेश (Retirement Orders) बिना किसी देरी के तुरंत जारी किए जाएं।
  • प्रमाण पत्र प्रक्रिया: “न मांग-न जांच प्रमाण पत्र” (No Dues Certificate) की विभागीय प्रक्रिया को समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए।
  • अंतरिम राहत: सभी पात्र रिटायर्ड शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से 90% अनुमानित पेंशन देना शुरू किया जाए।
  • पूर्ण भुगतान: अवकाश नगदीकरण, समूह बीमा, और फैमिली बेनिफिट का भुगतान प्राथमिकता (Priority) के आधार पर सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर हो।

आर-पार की लड़ाई का ऐलान: जल्द शुरू होगा ‘Pensioners Protest’

शिक्षकों के दशकों के योगदान को याद दिलाते हुए पदाधिकारियों ने कहा कि जिन्होंने राज्य के विकास में अपनी जिंदगी लगा दी, उन्हें बुढ़ापे में दफ्तरों के चक्कर लगवाना अशोभनीय है। शासन को इसे केवल एक कागजी या विभागीय प्रक्रिया (Departmental Process) नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे मानवीय संवेदनाओं (Human Emotions) से जुड़ा मुद्दा मानकर हल करना चाहिए।

महासंघ की अंतिम चेतावनी:

यदि शिक्षा विभाग ने इस मामले में शीघ्र ही कोई सकारात्मक और ठोस समाधान (Solution) नहीं निकाला, तो महासंघ रिटायर्ड शिक्षकों और बुजुर्ग पेंशनर्स के हक में एक बड़ा राज्यव्यापी आंदोलन (State-wide Agitation) शुरू करने पर मजबूर होगा। महासंघ ने साफ कर दिया है कि इस आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी विपरीत स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और संबंधित प्रशासन की होगी।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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