
रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए ज़मीन अधिग्रहण मुआवज़ा धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। रायपुर जोनल ऑफिस की टीम ने अभनपुर के रहने वाले जय प्रकाश गांधी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act – PMLA) के तहत हिरासत में लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक और भू-माफिया गलियारों में हड़कंप मच गया है।
ACB और EOW की FIR से खुला था राज
इस मामले की शुरुआत छत्तीसगढ़ की एंटी करप्शन ब्यूरो (Anti-Corruption Bureau) और इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग (Economic Offences Wing – EOW) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) से हुई थी। भारतमाला परियोजना (Bharatmala Project) के तहत बन रहे रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (Raipur-Visakhapatnam Economic Corridor) के लिए अधिग्रहित ज़मीन के मुआवज़े में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की शिकायत मिली थी। इसी प्राथमिक जांच (Initial Investigation) को आधार बनाकर केंद्रीय एजेंसी ED ने अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की थी।
मास्टरमाइंड का गेम प्लान: छोटे टुकड़ों में बांटी ज़मीन
इन्वेस्टिगेशन (Investigation) के दौरान जो सच सामने आया, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। मुख्य आरोपी जय प्रकाश गांधी ने अपने परिवार के सदस्यों और कुछ दागी सरकारी कर्मचारियों (Government Officials) के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची।
- हाईवे अलाइनमेंट का फायदा: आरोपी को पहले से पता था कि हाईवे की सीध (Highway Alignment) किस तरफ से गुजरने वाली है। उसने उसी दायरे की ज़मीन को पहले टारगेट किया।
- 500 वर्ग मीटर का खेल: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (National Highway Authority of India – NHAI) के नियमों का फायदा उठाने के लिए उसने ज़मीन को 500 वर्ग मीटर से कम के छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित (Land Fragmentation) कर दिया।
- अधिक मुआवज़े का लालच: ज़मीन का यह बंटवारा सिर्फ और सिर्फ इसलिए किया गया था ताकि सरकार और एनएचएआई से कई गुना ज्यादा मुआवज़ा वसूला जा सके।
56 लाख की जगह हड़पे 9.83 करोड़ रुपये
सरकारी खजाने को चून लगाने का यह गणित बेहद चौंकाने वाला है। ED की चार्जशीट और छानबीन के मुताबिक:
- वास्तविक मुआवज़ा: नियमानुसार आरोपी और उसके परिवार को केवल 56.76 लाख रुपये ही मिलने थे।
- वसूली गई रकम: फर्जीवाड़ा और जालसाजी का सहारा लेकर उन्होंने कुल 9.83 करोड़ रुपये का मुआवज़ा हासिल कर लिया।
- क्राइम का पैसा: इस तरह आरोपियों ने सरकार को सीधे तौर पर 9.27 करोड़ रुपये का चूना लगाया, जिसे कानूनन ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ (Proceeds of Crime) माना गया है।
शेयर और म्यूचुअल फंड में खपाया पैसा: जांच में यह भी प्रमाणित हुआ है कि इस काले धन (Black Money) को वैध बनाने के लिए आरोपी ने इसे शेयर मार्केट (Share Market), म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) और दूसरे वित्तीय साधनों (Financial Instruments) में निवेश कर मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में मिलाने का प्रयास किया।
सर्च ऑपरेशन में मिले थे पुख्ता सबूत
इस गिरफ्तारी से पहले ईडी की टीम ने बीती 28 अप्रैल 2026 को रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिलों में एक साथ कई ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान (Search Operation) चलाया था। इस रेड के दौरान डिजिटल एविडेंस (Digital Evidence), बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज़ और मुआवज़ा घोटाले से जुड़े कई आपत्तिजनक कागज़ात जब्त किए गए थे, जो इस गिरफ्तारी का मुख्य आधार बने।
3 दिन की रिमांड पर आरोपी, कई और रडार पर
गिरफ्तार करने के बाद ईडी ने आरोपी जय प्रकाश गांधी को रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत (Special PMLA Court Raipur) के समक्ष पेश किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और सबूतों को देखते हुए आरोपी को 3 दिनों के लिए ईडी की कस्टडी (ED Custody) में भेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान इस सिंडिकेट में शामिल कुछ अन्य बड़े लाभार्थियों, बिचौलियों और राजस्व विभाग के अधिकारियों के नामों का खुलासा हो सकता है।
यह भी पढ़ें- BJP विधायक रामकुमार टोप्पो की विधायकी को चुनौती देने वाली याचिका पर हाई कोर्ट का फैसला राजपत्र में हुआ प्रकाशित







