कर्मचारी हलचल

CG Power Company Strike: छत्तीसगढ़ में बिजली संकट का बड़ा अलर्ट! 7 सूत्रीय मांगों को लेकर आर-पार की जंग, इस तारीख से ठप रहेगी बिजली!

कोरबा/रायपुर: छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज (Chhattisgarh State Power Companies) के भीतर एक बार फिर बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, वेतन पुनरीक्षण (Wage Revision) और खाली पड़े पदों पर नियमित भर्ती जैसी कई गंभीर समस्याओं को लेकर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने सीधे अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल (Indefinite Strike) पर जाने का अल्टीमेटम दे दिया है।

महासंघ का प्रबंधन पर बड़ा आरोप: वादाखिलाफी से बढ़ा आक्रोश

भारतीय मजदूर संघ (BMS) से संबद्ध छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ महासंघ ने बिजली कंपनी के शीर्ष प्रबंधन पर लगातार वादाखिलाफी (Breach of Trust) करने का गंभीर आरोप लगाया है। महासंघ के पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि पूर्व में हुई द्विपक्षीय बैठकों (Bipartite Meetings) में जिन महत्वपूर्ण मांगों पर आपसी सहमति बनी थी, उन्हें आज तक धरातल पर लागू नहीं किया गया है।

परिणामस्वरूप (Consequently), बिजली कर्मचारियों के भीतर असंतोष की भावना चरम पर पहुंच गई है। प्रांतीय कार्यसमिति की बैठक में सर्वसम्मति से यह कड़ा निर्णय लिया गया है कि पूर्व में स्थगित किए गए आंदोलन को अब पूर्ण शक्ति के साथ दोबारा प्रारंभ किया जाएगा। इस संबंध में 4 जून 2026 को पॉवर कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) को विधिवत आंदोलन का नोटिस भी सौंप दिया गया है।

बिजली व्यवस्था पर मंडराया संकट: उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील

महासंघ ने केवल सरकार और प्रबंधन के सामने अपनी आवाज नहीं उठाई है, बल्कि आम बिजली उपभोक्ताओं (Electricity Consumers) से भी विशेष सहयोग और समर्थन की अपील की है। संगठन का दृढ़ता से मानना है कि कर्मचारियों की कमी (Staff Shortage) और लगातार बढ़ती जा रही आउटसोर्सिंग व्यवस्था (Outsourcing System) के कारण प्रदेश की उपभोक्ता सेवाएं बहुत बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं।

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इसके अतिरिक्त (Furthermore), कर्मचारियों की यह लड़ाई केवल उनके व्यक्तिगत आर्थिक हितों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की संपूर्ण बिजली सेवाओं की गुणवत्ता और उसके भविष्य को बचाने का एक बड़ा अभियान है। इसलिए सरकार और प्रबंधन को समय रहते इन संवेदनशील समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना चाहिए, अन्यथा आने वाले दिनों में आम जनता को गंभीर बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।

महासंघ की 7 सूत्रीय प्रमुख मांगें क्या हैं? (Core Demands List)

बिजली कर्मचारियों के इस व्यापक आंदोलन के पीछे 7 सूत्रीय मांगें शामिल हैं, जिन पर कर्मचारी किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

  • 1. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की तत्काल बहाली: राज्य सरकार की तर्ज पर बिजली कंपनी में भी 1 अप्रैल 2004 के बाद नियुक्त किए गए अधिकारी-कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को तत्काल पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
  • 2. रिक्त पदों पर नियमित भर्ती: वर्ष 2017 से लंबित तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी पदों के रिस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया को तुरंत पूरा किया जाए और रिक्त पड़े लगभग 75 प्रतिशत स्वीकृत पदों पर नियमित भर्ती की जाए।
  • 3. संविदा लाइन कर्मचारियों का नियमितीकरण: संगठन ने सीधी भर्ती तथा भू-विस्थापित श्रेणी के अंतर्गत कार्यरत संविदा लाइन कर्मचारियों को पूर्व की भांति नियमित (नियमितीकरण) किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है।
  • 4. तकनीकी एवं कंप्यूटर प्रोत्साहन भत्ता: मैदानी तकनीकी कर्मचारियों को तीन प्रतिशत तकनीकी भत्ता प्रदान किया जाए। इसके साथ ही कार्यालयीन कर्मचारियों को भी तीन प्रतिशत कंप्यूटर प्रोत्साहन भत्ता दिया जाए।
  • 5. तत्काल वेज रिवीजन कमेटी का गठन: 1 जनवरी 2026 से देय वेतन पुनरीक्षण के लिए तत्काल वेज रिवीजन कमेटी का गठन करने और नया वेतनमान लागू होने तक कर्मचारियों को 20 प्रतिशत अंतरिम राहत देने की मांग की गई है।
  • 6. लंबित पदोन्नति (Promotion) आदेश जारी करना: तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची जारी कर वर्षों से लंबित पदोन्नति आदेश जारी किए जाएं। विशेष रूप से वर्ष 2013 से लंबित तकनीशियन वितरण एवं परीक्षण सहायक-1 और 2 के पदोन्नति मामलों का तत्काल निराकरण किया जाए।
  • 7. ठेका श्रमिकों की रोजगार सुरक्षा और सीधा भुगतान: बाह्यश्रोत (आउटसोर्सिंग) और ठेका श्रमिकों के भुगतान की व्यवस्था सीधे कंपनी के माध्यम से की जाए। उन्हें 62 वर्ष तक रोजगार सुरक्षा प्रदान की जाए तथा नई भर्तियों में इन अनुभवी श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाए।

 सैद्धांतिक सहमति के बाद भी क्यों अटका है मामला? (Government Deadlock)

यहां यह स्पष्ट करना अत्यंत आवश्यक है (Crucial to Mention) कि राज्य सरकार की तर्ज पर बिजली कंपनी में भी पुरानी पेंशन योजना लागू करने को लेकर शासन स्तर पर 6 अक्टूबर 2023 को ही सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी गई थी। इसके बाद (Subsequently), 17 अक्टूबर 2025 को हुई उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता में भी कंपनी प्रबंधन ने इसे बहुत शीघ्र लागू करने का लिखित आश्वासन दिया था।

हालांकि (However), इस लंबे समय के बीत जाने के बावजूद अभी तक इस योजना को आधिकारिक रूप से धरातल पर नहीं उतारा जा सका है। प्रबंधन और शासन के इसी टालमटोल वाले रवैये के कारण कर्मचारियों का धैर्य अब पूरी तरह टूट चुका है और वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं।

 चरणबद्ध आंदोलन का पूरा शेड्यूल: जानिए कब क्या होगा (Strike Timeline)

महासंघ के महामंत्री नवरतन बरेठ ने आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस बार का Bijli Karmchari Andolan पूरी तरह से योजनाबद्ध और आक्रामक होगा। प्रबंधन को संभलने का मौका देते हुए आंदोलन को निम्नलिखित चरणों में विभाजित किया गया है:

  • प्रथम चरण (30 जून 2026 तक): आंदोलन के पहले चरण के तहत 30 जून तक प्रदेश के सभी वितरण केंद्रों, जोनों, संभागीय एवं वृत्त कार्यालयों में व्यापक स्तर पर जनसंपर्क और हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।
  • द्वितीय चरण (1 से 9 जुलाई 2026 तक): इसके बाद 1 से 9 जुलाई तक प्रदेश के सभी क्षेत्रीय मुख्यालयों और बिजली उत्पादन केंद्रों में विशाल आमसभा, उग्र प्रदर्शन और प्रबंधन को ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
  • तृतीय चरण (10 जुलाई 2026): 10 जुलाई को राजधानी रायपुर के डंगनिया स्थित पॉवर कंपनी मुख्यालय के समक्ष पूरे प्रदेश से जुटे कर्मचारियों का एक विशाल आक्रोश प्रदर्शन होगा और वहां एक बड़ी द्वार सभा का आयोजन किया जाएगा।
  • अंतिम चरण / महा-हड़ताल (17 अगस्त 2026 से): यदि इन सभी चरणों के बाद भी प्रबंधन और शासन स्तर पर मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया जाता है, तो 17 अगस्त से पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।

क्या टल पाएगा छत्तीसगढ़ का बड़ा बिजली संकट?

निश्चित रूप से, यदि 17 अगस्त से छत्तीसगढ़ के सभी बिजली कर्मचारी सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाते हैं, तो पूरे राज्य की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। ग्रिड के रखरखाव से लेकर सब-स्टेशनों के संचालन तक का काम ठप होने का सीधा असर आम नागरिकों, उद्योगों और अस्पतालों पर पड़ेगा।

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अब पूरी गेंद राज्य सरकार और पॉवर कंपनी प्रबंधन के पाले में है। क्या समय रहते इन कर्मचारियों की जायज मांगों को मानकर इस बड़े संकट को टाला जाएगा, या फिर छत्तीसगढ़ को एक बड़े अंधेरे और बिजली संकट के दौर से गुजरना पड़ेगा? इस पर chaturpost.com की नजर लगातार बनी रहेगी।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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