
नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ में 16 जून से शुरू हो रहे नए शिक्षा सत्र और ‘शाला प्रवेश उत्सव’ से पहले सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर (Quality of Education) सुधारने के लिए बेहद संवेदनशील और बड़ा कदम उठाया है। सरकार का मानना है कि जब तक देश का निर्माता यानी हमारा शिक्षक खुद मानसिक तनाव (Mental Stress) से मुक्त नहीं होगा, तब तक बच्चों को बेहतर भविष्य नहीं दिया जा सकता।
इसी सोच के साथ स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह द्वारा जारी आधिकारिक आदेश (Official Order) में जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को कड़े निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने साफ कहा है कि स्कूलों में पढ़ाई शुरू होने से पहले ही शिक्षकों की सभी विभागीय और प्रशासनिक समस्याओं को तत्काल सुलझाया जाए।
लगेंगे विशेष शिविर: अब दफ्तरों के चक्कर नहीं काटेंगे शिक्षक
अक्सर देखा जाता है कि शिक्षक अपने सर्विस रिकॉर्ड, एरियर्स, अवकाश या अन्य लंबित मामलों (Pending Cases) को लेकर ब्लॉक और जिला कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर होते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इस बार ऐसा बिल्कुल नहीं होगा।
शासन के आदेश के अनुसार, स्कूल खुलने से पहले ही जिला और विकासखंड स्तर पर विशेष शिविर (Camps) लगाए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से शिक्षकों के जितने भी पुराने और लंबित मामले हैं, उनका मौके पर ही तुरंत निराकरण (Spot Resolution) किया जाएगा। सरकार की इस अनूठी पहल से प्रदेश के लाखों शिक्षक बिना किसी मानसिक तनाव के, पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ नए सत्र में बच्चों को पढ़ा सकेंगे।
अधिकारियों को मिला सीधे ऑन-ग्राउंड निरीक्षण का जिम्मा: बदल जाएगी व्यवस्था
सिर्फ शिक्षकों की समस्याओं का हल ही नहीं, बल्कि स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इस बार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय कर दी गई है। अब अधिकारी सिर्फ दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट नहीं देखेंगे, बल्कि उन्हें जमीन पर उतरना होगा।
आदेश के तहत ऑन-ग्राउंड मॉनिटरिंग (On-Ground Monitoring) की नई व्यवस्था कुछ इस प्रकार होगी:
- अधिकारियों का सतत् निरीक्षण (Surprise Inspection): शिक्षा संभाग के संयुक्त संचालक (Joint Director), डीईओ (DEO), बीईओ (BEO), एबीईओ (ABEO) और ब्लॉक सोर्स कोऑर्डिनेटर (BRCC) लगातार स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगे।
- नोडल अधिकारियों की होगी तैनाती: प्रवेश उत्सव व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो, इसके लिए जिला, ब्लॉक और संकुल (Cluster) स्तर पर विशेष नोडल अधिकारी (Nodal Officers) नियुक्त किए जा रहे हैं।
- डांट-फटकार नहीं, अब मिलेगा ‘अकादमिक मार्गदर्शन’: निरीक्षण के दौरान अधिकारी केवल कमियां नहीं ढूंढेंगे, बल्कि शिक्षकों की दिक्कतों को समझते हुए उन्हें आवश्यकतानुसार बेहतरीन शैक्षणिक मार्गदर्शन (Academic Guidance) भी प्रदान करेंगे।
- शिक्षकों और बच्चों की 100% उपस्थिति: नए सत्र के पहले ही दिन से स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों की भी शत्-प्रतिशत उपस्थिति (100% Attendance) अनिवार्य कर दी गई है।
- तैयार होगा 3 महीने का एडवांस रोडमैप: कक्षा शिक्षक और विषय शिक्षक स्कूल खुलने के साथ ही आगामी तीन महीने का एडवांस टीचिंग प्लान (Roadmap) तैयार करेंगे, ताकि सिलेबस समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा हो सके।
आम आदमी और पालकों पर इसका क्या सकारात्मक असर होगा?
जब स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त होती है, तो इसका सीधा फायदा आम जनता और गरीब पालकों को मिलता है।
पब्लिक कनेक्ट: जानिए पालकों को क्या होगा फायदा?
- क्लासरूम में रहेंगे शिक्षक: प्रशासनिक कामों से मुक्ति मिलने के बाद शिक्षक अपना पूरा समय क्लासरूम में बच्चों को पढ़ाने में दे पाएंगे, जिससे सरकारी स्कूलों का रिजल्ट सुधरेगा।
- समय पर मिलेंगी सरकारी सुविधाएं: अधिकारियों की सीधी निगरानी के कारण पहले ही दिन बच्चों को मुफ्त किताबें, गणवेश (Uniform) और साइकिल का वितरण बिना किसी देरी के पारदर्शी तरीके से हो जाएगा।
- सुंदर और पेंट-रिच माहौल: 15 जून तक सभी स्कूलों की मरम्मत और रंग-रोगन का काम पूरा करने का जिम्मा भी इन्हीं अधिकारियों का होगा, जिससे बच्चों को एक शानदार माहौल मिलेगा।
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सरकार का यह आदेश छत्तीसगढ़ की बुनियादी शिक्षा (School Education) व्यवस्था में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। शिक्षकों को तनावमुक्त करना और अधिकारियों को ऑन-फील्ड भेजना यह दर्शाता है कि राज्य सरकार इस बार कागजी दावों से इतर जमीनी बदलाव लाने के लिए पूरी तरह गंभीर है।







