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बड़ा बदलाव: छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘कार्य आवंटन नियम’ में किया बड़ा संशोधन, राज्यपाल की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी

नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे और कार्यप्रणाली में एक बड़ा फेरबदल किया है। राज्यपाल (Governor of Chhattisgarh) के आदेशानुसार ‘छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम’ [Chhattisgarh Government Business (Allocation) Rules] में महत्वपूर्ण संशोधन (Amendment) किया गया है।

यह अधिसूचना सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत के हस्ताक्षर से जारी किया गया है। सरकार के इस बड़े निर्णय का सीधा असर वाणिज्य और उद्योग विभाग (Commerce and Industry Department) की नीतियों, नियमों और उसके अधीन आने वाले बोर्ड-निगमों के कामकाज पर पड़ेगा।

वाणिज्य और उद्योग विभाग के नियमों में क्या बदला?

इस नई अधिसूचना (Notification) के तहत मुख्य रूप से “ग्यारह – वाणिज्य और उद्योग विभाग” की अनुसूची में बड़े तकनीकी बदलाव किए गए हैं। नीतिगत विषयों (Policy Matters) को और अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाने के लिए पुराने कुछ नियमों का लोप (Omission) किया गया है, जबकि कुछ नए प्रावधानों को प्रतिस्थापित (Substituted) किया गया है।

विभाग में प्रतिपादित नीति संबंधी विषयों के सरल क्रमांक 4 के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से आयात और निर्यात” (Import and Export) शब्द को प्रतिस्थापित किया गया है, जिससे राज्य में विदेशी व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने की नीतियों को नई दिशा मिलेगी। इसके साथ ही नीतिगत विषयों के सरल क्रमांक 22-ख एवं 22-ग को पूरी तरह से विलोपित कर दिया गया है।

इन 12 प्रमुख अधिनियमों और नियमों को किया गया शामिल

नए संशोधन के बाद अब विभाग द्वारा प्रशासित अधिनियम तथा नियमों (Acts and Rules) की सूची को री-स्ट्रक्चर किया गया है। इसके तहत अब कुल 12 महत्वपूर्ण नियमों और अधिनियमों को नए सिरे से प्रतिस्थापित किया गया है, जो इस प्रकार हैं:

  • 1. छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 (क्र. 44 सन् 1973) एवं इसके नियम
  • 2. छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम, 2002 (क्र. 7 सन् 2002) एवं इसके नियम
  • 3. भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (क्र. 9 सन् 1932) एवं इसके नियम
  • 4. बॉयलर्स अधिनियम, 2025 (क्र. 12 सन् 2025) एवं इसके नियम
  • 5. छत्तीसगढ़ उद्योगों को राज्य सहायता अधिनियम, 1958 (क्र. 20 सन् 1958)
  • 6. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 (क्र. 27 सन् 2006) एवं इसके नियम
  • 7. छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2025 (क्र. 20 सन् 2025)
  • 8. छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) अधिनियम, 2025 (क्र. 1 सन् 2026)
  • 9. छत्तीसगढ़ शासन भंडार क्रय नियम, 2002
  • 10. छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015
  • 11. राज्य की उद्योग नीति या औद्योगिक विकास नीति के क्रियान्वयन के लिए निर्मित विभागीय नियम
  • 12. विभाग के अधीन सेवाओं के लिए निर्मित सेवा भर्ती नियम

बोर्ड, निगम और संचालनालयों की स्थिति हुई साफ

इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक सुगमता के दृष्टिकोण से विभाग के अधीन आने वाले संचालनालय (Directorate) और कार्यालयों की सूची में भी स्पष्टता लाई गई है। अब इसके सरल क्रमांक 1 के स्थान पर उद्योग संचालनालय छत्तीसगढ़” (Directorate of Industries Chhattisgarh) को स्थापित किया गया है।

वहीं दूसरी ओर, अधिनियमों के अधीन गठित मण्डल तथा निगम (Boards and Corporations) की सूची में पहले जहां “कुछ नहीं” लिखा था, उसके स्थान पर अब राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड” (State Investment Promotion Board – SIPB) को आधिकारिक तौर पर जगह दी गई है। यह बोर्ड राज्य में नए उद्योगों की स्थापना और सिंगल विंडो क्लीयरेंस के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है।

इसके साथ ही, गैर-संवैधानिक और अन्य संस्थाओं व निकायों (Institutions and Bodies) की सूची में से सरल क्रमांक 4, 6, 7, 8, 10 एवं 11 को विलोपित करते हुए सरल क्रमांक 9 के स्थान पर छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम” (CSIDC) को प्रतिस्थापित किया गया है।

🔍 आसान भाषा में समझें: क्यों हुआ यह बदलाव और क्या होगा इसका असर?

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ‘कार्य आवंटन नियम’ (Business Allocation Rules) में किया गया यह संशोधन केवल एक कागजी प्रक्रिया नहीं है[cite: 1]। इसके पीछे शासन की एक बड़ी प्रशासनिक और आर्थिक रणनीति छिपी है। आइए इसे दो बिंदुओं में आसान भाषा में समझते हैं:

1. यह बदलाव आखिर क्यों किया गया? (The Rationale)

  • प्रशासनिक स्पष्टता (Administrative Clarity): वाणिज्य और उद्योग विभाग के पुराने पड़ चुके या अप्रासंगिक हो चुके नियमों का लोप (Omission) कर फाइलों के मूवमेंट को तेज करना इसका मुख्य उद्देश्य है[cite: 1]।
  • कानूनी अपडेट (Legal Upgradation): साल 2025 और 2026 में बने नए कानूनों (जैसे- बॉयलर्स अधिनियम 2025 और जन विश्वास अधिनियम) को आधिकारिक रूप से विभागीय नियमों की मुख्य सूची में शामिल करना अनिवार्य था[cite: 1]।
  • ग्लोबल ट्रेड पर फोकस (Global Trade Focus): नीतिगत विषयों में सीधे “आयात और निर्यात” (Import and Export) को जोड़कर राज्य सरकार ने यह साफ कर दिया है कि उसका ध्यान अब छत्तीसगढ़ के उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहुंचाने पर है[cite: 1]।

2. उद्योग और आम जनता पर इसका क्या असर होगा? (The Impact)

  • सिंगल विंडो सिस्टम होगा मजबूत: ‘राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड’ (SIPB) को इस सूची में आधिकारिक तौर पर शामिल करने से अब नए उद्योगों को मंजूरी (Clearance) मिलने की रफ्तार और तेज होगी[cite: 1]।
  • निवेशकों का बढ़ेगा भरोसा (Ease of Doing Business): ‘जन विश्वास अधिनियम’ और ‘औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम’ के नए नियमों के तहत काम होने से राज्य में निवेश प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सुरक्षित हो जाएगी[cite: 1]।
  • रोजगार के नए अवसर: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) और CSIDC से जुड़े नियमों में स्पष्टता आने से स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों का जाल बिछेगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार (Employment) के नए रास्ते खुलेंगे[cite: 1]।

निष्कर्ष के तौर पर, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा किया गया यह ‘बिजनेस एलोकेशन रूल्स’ संशोधन छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास, निवेश और प्रशासनिक कसावट को मजबूत करने की दिशा में सरकार का एक सोचा-समझा कदम माना जा रही है। इस अधिसूचना का अंग्रेजी अनुवाद भी भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड (3) के तहत राज्यपाल के प्राधिकार से सर्वसाधारण के लिए प्रकाशित किया गया है।

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Business Allocation
सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्यपाल के आदेश से नई अधिसूचना जारी की है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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