Chhattisgarh

बड़ा झटका: भाई सरकारी नौकरी में है तो क्या दूसरे को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति? हाई कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला!

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Bilaspur High Court) ने अनुकंपा नियुक्ति के नियमों (Compassionate Appointment Rules) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि किसी मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई भी सदस्य पहले से शासकीय सेवा में है, तो परिवार के किसी अन्य सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं मिल सकता।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच (Division Bench) ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य शासन की नीति में ऐसा कोई प्रावधान (Provision) नहीं है कि नौकरीपेशा सदस्य यदि अलग रह रहा हो, तो दूसरे सदस्य को नियमों में कोई ढील या छूट दी जाए। इस फैसले के बाद अनुकंपा नियुक्ति के दावों को लेकर कानूनी स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है।

जानिए क्या है पूरा मामला (Case Background)

यह पूरा मामला धमतरी जिले के कुरुद से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता हेनरी रंगारी (21 वर्ष) के पिता दिवंगत अशोक कुमार रंगारी कुरुद तहसील कार्यालय में सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान 5 नवंबर 2024 को उनका आकस्मिक निधन हो गया था। पिता की मृत्यु के बाद आश्रित बेटे हेनरी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन (Application) किया था।

जांच के दौरान प्रशासन को पता चला कि मृतक का एक बड़ा बेटा (हेनरी का सौतेला भाई) वीरेंद्र बहादुर रंगारी पहले से ही सरकारी नौकरी में है और जगदलपुर में पदस्थ है। इसी ग्राउंड पर जिला स्तरीय अनुकंपा नियुक्ति समिति (District Level Committee) ने हेनरी का दावा निरस्त कर दिया था, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ता के वकीलों ने कोर्ट में क्या दलील दी?

सदन और कोर्ट रूम में इस केस को लेकर लंबी बहस हुई। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मनोज परांजपे और कबीर कलवानी ने कोर्ट के समक्ष पुरजोर पैरवी की। उनकी मुख्य दलीलें इस प्रकार थीं:

  • अलग रहने का तर्क: हेनरी का बड़ा सौतेला भाई वीरेंद्र वर्ष 2006 से ही अपने परिवार के साथ अलग जगदलपुर में रह रहा है और वह अपने पिता पर आश्रित नहीं था।
  • अनापत्ति प्रमाण पत्र: भाई वीरेंद्र ने हेनरी को अनुकंपा नियुक्ति देने पर अपनी लिखित अनापत्ति (No Objection Certificate) भी दे दी थी।
  • आर्थिक संकट: वकीलों ने तर्क दिया कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य संकट में घिरे आश्रित परिवार को तत्काल वित्तीय सहायता (Immediate Financial Assistance) देना है। वर्तमान में हेनरी, उसकी विधवा मां मोतिम बाई और बहन पूरी तरह बेसहारा हो चुके हैं, इसलिए भाई के अलग रहने के बावजूद हेनरी का हक मारना न्यायसंगत नहीं है।

इसके विपरीत, राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए उप महाधिवक्ता (Deputy Advocate General) प्रसून भादुड़ी ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की दलीलों का कड़ा विरोध किया और नीति का हवाला दिया।

हाई कोर्ट का सख्त रुख: नीति के क्लॉज 6(ए) का दिया हवाला

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने पुराने ऐतिहासिक फैसलों (Judgments) का हवाला देते हुए याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट की ओर से कही गई मुख्य बातें नीचे बॉक्स में समझी जा सकती हैं:

सिंगल बेंच का फैसला बरकरार, याचिका खारिज

बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता और स्थापित नियमों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद सिंगल बेंच (Single Bench) के पुराने फैसले को सही ठहराया और उसे बरकरार रखा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता हेनरी रंगारी की अपील को पूरी तरह खारिज (Dismissed) कर दिया।

चतुरपोस्ट के प्रिय पाठकों, इस फैसले से यह साफ हो गया है कि सरकारी विभागों में अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में नियमों का अक्षरशः पालन किया जाएगा और ‘कमाऊ सदस्य के अलग रहने’ की दलीलें कोर्ट में स्वीकार्य नहीं होंगी। छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था से जुड़ी हर विश्वसनीय अपडेट के लिए जुड़े रहिए chaturpost.com के साथ!

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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