
रायपुर (चतुरपोस्ट डेस्क)। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की नई दरें जारी कर दी है। नए टैरिफ ऑर्डर (New Tariff Order) ने प्रदेश के कोर सेक्टर यानी स्टील उद्योगों की चिंता बढ़ा दी है। आयोग ने इस बार औद्योगिक उपभोक्ताओं (Industrial Consumers) के लिए लागू होने वाली उच्च दाब (HV) श्रेणी की दरों में बड़ा संशोधन किया है।
नए टैरिफ के अनुसार, नए CG Industrial Electricity Rate के प्रभावशील होने से स्टील उत्पादकों पर दोहरी मार पड़ी है। उद्योगों के लिए न केवल प्रति यूनिट ऊर्जा प्रभार (Energy Charges) बढ़ाया गया है, बल्कि प्रति माह लगने वाले मांग प्रभार (Demand Charges) में भी ₹25 प्रति केवीए (kVA) तक की एकमुश्त वृद्धि की गई है। नई दरें आगामी 1 जुलाई, 2026 से पूरे प्रदेश में लागू हो जाएंगी।
स्टील इंडस्ट्रीज (HV-4) का नया टैरिफ: प्रति यूनिट 30 पैसे तक की बढ़ोतरी
छत्तीसगढ़ के री-रोलिंग मिल, स्पंज आयरन और हेवी स्टील प्लांट संचालकों के लिए बिजली उत्पादन लागत (Cost of Production) अब सीधे तौर पर बढ़ जाएगी। दस्तावेज़ WhatsApp Image 2026-06-15 at 6.32.30 PM_3.jpg के मुताबिक स्टील उद्योगों (HV-4 श्रेणी) का नया गणित इस प्रकार है:
- 220 KV वोल्टेज स्तर पर: वर्तमान मांग प्रभार ₹375 प्रति केवीए से बढ़कर अब ₹400 प्रति केवीए हो गया है। इसके साथ ही ऊर्जा प्रभार को ₹6.10 प्रति यूनिट (kVAh) से बढ़ाकर अब ₹6.40 प्रति यूनिट कर दिया गया है।
- 132 KV वोल्टेज स्तर पर: मांग प्रभार को बढ़ाकर ₹375 से ₹400 किया गया है। वहीं ऊर्जा प्रभार में 30 पैसे की बढ़ोतरी करते हुए इसे ₹6.25 से बढ़ाकर ₹6.55 प्रति यूनिट तय किया गया है।
- 33 KV स्तर (Load Factor > 15%): मांग प्रभार ₹375 से बढ़ाकर ₹400 हुआ है और प्रति यूनिट ऊर्जा प्रभार ₹6.65 से बढ़कर अब ₹7.05 तक पहुंच गया है।
- 11 KV स्तर (Load Factor > 15%): मांग प्रभार को बढ़ाकर ₹375 से ₹400 कर दिया गया है और प्रति यूनिट ऊर्जा प्रभार ₹6.75 से बढ़ाकर ₹7.05 कर दिया गया है।
अन्य भारी उद्योगों (Mines & General Industries) पर भी पड़ा असर
स्टील सेक्टर के अलावा अन्य औद्योगिक और गैर-औद्योगिक श्रेणियों के उच्च दाब उपभोक्ताओं (HV Consumers) के खर्च में भी वृद्धि दर्ज की गई है:
- माइंस (HV-2 श्रेणी): खदानों के लिए निश्चित मांग प्रभार ₹500 पर स्थिर रखा गया है। लेकिन 220 KV पर ऊर्जा प्रभार ₹6.95 से बढ़कर ₹7.25 और 11 KV पर ₹7.80 से बढ़कर ₹8.10 प्रति यूनिट कर दिया गया है।
- अन्य उद्योग (HV-3 श्रेणी): जनरल इंडस्ट्रीज और नॉन-इंडस्ट्रियल भारी कनेक्शनों के लिए मांग प्रभार ₹375 से बढ़ाकर ₹400 कर दिया गया है। 132 KV स्तर पर इनका ऊर्जा प्रभार ₹6.80 से बढ़कर ₹7.10 प्रति यूनिट हो गया है।
- रेलवे ट्रैक्शन (HV-1): रेलवे के लिए भी मांग प्रभार ₹375 से बढ़ाकर ₹400 किया गया है और प्रति यूनिट बिजली दर ₹5.55 से महंगी होकर ₹5.90 हो गई है।
स्टील एसोसिएशन की बढ़ी चिंता, उत्पादन लागत पर दिखेगा प्रभाव
औद्योगिक विशेषज्ञों (Industrial Experts) का मानना है कि स्टील निर्माण में बिजली एक प्रमुख कच्चा माल (Raw Material) है। मांग प्रभार में ₹25 की बढ़ोतरी और ऊर्जा प्रभार में औसतन 30 से 40 पैसे प्रति यूनिट की यह वृद्धि स्टील मिलों के मासिक बिल को लाखों रुपये बढ़ा देगी।
नियामक आयोग (CSERC) द्वारा जारी इस कड़े टैरिफ ऑर्डर के बाद अब रायपुर, रायगढ़ और भिलाई के उद्योगपतियों के बीच हलचल तेज हो गई है। उद्योगों का कहना है कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में यदि छत्तीसगढ़ में CG Industrial Electricity Rate इसी तरह बढ़ते रहे, तो बाजार में प्रतिस्पर्धा (Market Competition) करना बेहद कठिन हो जाएगा।
त्वरित संदर्भ तालिका: स्टील इंडस्ट्रीज (HV-4) का नया रेट कार्ड
नीचे दी गई तालिका से स्टील उद्योगपति अपनी श्रेणी के अनुसार बढ़े हुए प्रभारों को आसानी से समझ सकते हैं:
| वोल्टेज स्तर (Voltage Level) | पुराना मांग प्रभार (₹) PDF | नया मांग प्रभार (₹) PDF | पुराना ऊर्जा प्रभार (₹) PDF | नया ऊर्जा प्रभार (₹) PDF |
| HV-4 Steel (220 KV) | ₹ 375 | ₹ 400 | ₹ 6.10 | ₹ 6.40 |
| HV-4 Steel (132 KV) | ₹ 375 | ₹ 400 | ₹ 6.25 | ₹ 6.55 |
| *HV-4 Steel (33 KV) ** | ₹ 375 | ₹ 400 | ₹ 6.65 | ₹ 7.05 |
| *HV-4 Steel (11 KV) ** | ₹ 375 | ₹ 400 | ₹ 6.75 | ₹ 7.05 |
*नोट: यह दरें 15% से अधिक लोड फैक्टर (Load Factor >15%) वाले सामान्य संचालन पर आधारित हैं। 15% या उससे कम लोड फैक्टर वाले उद्योगों के मांग प्रभार में भी ₹10 की वृद्धि (₹190 से ₹200) की गई है। समूह के संपूर्ण विवरण के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
चतुरपोस्ट एडिटर टेक
छत्तीसगढ़ को देश का पावर हब और स्टील हब माना जाता है। बिजली वितरण कंपनी के भारी राजस्व घाटे को संतुलित करने के लिए आयोग ने यह कदम उठाया है। हालांकि घरेलू मोर्चे पर राहत देने की कोशिश की गई है, लेकिन वाणिज्यिक और औद्योगिक मोर्चे पर बढ़ाई गई दरें अंततः बाजार में तैयार स्टील उत्पादों (सरिया, एंगल और चैनल) की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे आने वाले समय में निर्माण लागत (Construction Cost) में तेजी देखने को मिल सकती है।







