
रायपुर: छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) ने निजी स्कूलों (Private Schools) को एक बहुत बड़ी राहत दी है । सरकार ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल (CGBSE) द्वारा मान्यता प्राप्त अशासकीय शिक्षण संस्थाओं के लिए ‘मान्यता विनियम 1994’ में एक क्रांतिकारी संशोधन (Amendment) किया है ।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से संयुक्त सचिव फरिहा आलम द्वारा इस संबंध में मुख्य अधिसूचना (Official Notification) जारी कर दी गई है । वहीं माध्यमिक शिक्षा मण्डल की सचिव पुष्पा साहू द्वारा संशोधित नियमों का विस्तृत राजपत्र (Chhattisgarh Gazette) भी प्रकाशित कर दिया गया है । सरकार के इस बड़े फैसले के बाद अब राज्य में K-12 अशासकीय शिक्षण संस्था की स्थापना और उनके संचालन का रास्ता बेहद आसान हो गया है । आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि इस नए नियम के तहत निजी स्कूल संचालकों को क्या-क्या रियायतें मिली हैं और आम जनता पर इसका क्या असर होगा।
कैबिनेट के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा मण्डल का बड़ा एक्शन
छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय (Mahanadi Bhawan) द्वारा जारी आदेश क्रमांक RULE/477/2026/20-3 के तहत माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1965 (क्र. 23 सन् 1965) की धारा 9 की उपधारा 3 और धारा 28 की उपधारा 1 एवं 3 का प्रयोग करते हुए यह ऐतिहासिक बदलाव किया गया है ।
इस नए सरकारी आदेश के तहत पुराने नियमों को पूरी तरह से प्रतिस्थापित (Substituted) कर दिया गया है । इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के स्तर को सुधारना और स्कूलों को इंफ्रास्ट्रक्चर के गैर-जरूरी कानूनी दांव-पेंचों से मुक्ति दिलाना है, ताकि वे केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education) पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकें।
बदले गए नियमों की 4 सबसे बड़ी बातें: अब इन शर्तों पर मिलेगी मान्यता
छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मुख्य रूप से चार नियमों (विनियम 12, 13, 17 और 21) में बड़े बदलाव किए गए हैं । इन्हें आप नीचे दिए गए बिंदुओं के जरिए आसानी से समझ सकते हैं:
1. न्यूनतम भूमि क्षेत्रफल (Minimum Land Area) की अनिवार्यता खत्म (विनियम 12 में संशोधन)
- नया नियम: अब छत्तीसगढ़ में K-12 अशासकीय शिक्षण संस्था की स्थापना, संचालन अथवा अस्थायी या स्थायी मान्यता के लिए किसी भी न्यूनतम भूमि क्षेत्रफल की अनिवार्यता नहीं होगी।
- क्लासरूम का साइज: जमीन की बाध्यता खत्म होने के बाद भी बच्चों की सुविधा का ध्यान रखा गया है। मान्यता प्राप्त स्कूलों में अध्यापन कक्षों (Classrooms) का निर्माण इस प्रकार करना होगा कि प्रत्येक छात्र को न्यूनतम 06 वर्गफीट स्थान (6 Sq. Ft. Space Per Student) मिल सके।
- अधोसंरचना: प्रत्येक मान्यता प्राप्त निजी संस्था को स्वीकृत पाठ्यक्रम संचालित करने और सुरक्षा एवं वैधानिक मानकों का पालन करने हेतु पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखना होगा।
2. खेल मैदान (Playground) और लैब अब कर सकेंगे साझा (विनियम 13 में संशोधन)
- संसाधनों का साझा उपयोग (Shared Resources): स्कूल संचालकों को अब अपने ही परिसर में सब कुछ बनाने की जरूरत नहीं है। खेल मैदान, पुस्तकालय (Digital Libraries सहित), प्रयोगशाला और पाठ्यसहगामी गतिविधियों की सुविधाओं के साझा उपयोग की अनुमति होगी。
- बाहरी व्यवस्था/समझौता: खेल मैदान, लैब, लाइब्रेरी या कंप्यूटर सुविधाएं विद्यालय परिसर के भीतर होना अनिवार्य नहीं है। इन्हें भुगतान के आधार पर निकटवर्ती सरकारी संस्थानों, नगरपालिका सुविधाओं, उच्च शिक्षण संस्थानों अथवा अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों के साथ औपचारिक समझौतों (MOU/Collaboration) के माध्यम से उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए बस विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
3. फिक्स डिपॉजिट (FD) और अक्षयनिधि का झंझट समाप्त (विनियम 17 में संशोधन)
- कोई फंड जरूरी नहीं: अशासकीय शिक्षण संस्था की स्थापना, संचालन या मान्यता के लिए अब किसी भी न्यूनतम अक्षयनिधि (Endowment Fund) की आवश्यकता नहीं होगी।
- FD रखने की बाध्यता खत्म: मान्यता के लिए बैंक में जो अनिवार्य फिक्स डिपॉजिट (Fixed Deposit) रखने की आवश्यकता होती थी, उसे तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।
- पुरानी जमा राशि का उपयोग: यदि किसी स्कूल की पुरानी अक्षय निधि पहले से जमा है, तो विद्यालय प्रबंधन उसका उपयोग अपने पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) या रोजमर्रा के परिचालन खर्चों (Operational Expenses) के लिए कर सकेगा। हालांकि, इसके लिए कर्मचारियों के वेतन संबंधी दायित्वों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
4. नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की जगह अब ‘स्व-प्रमाणन’ (विनियम 21 में संशोधन)
- Essentiality Certificate समाप्त: नए स्कूल खोलने या मान्यता के लिए पहले शासन से जो आवश्यकता मूलक प्रमाणपत्र (Essentiality Certificate) लेना पड़ता था, उसकी अनिवार्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
- स्व-प्रमाणन (Self-certification) से मान्यता: अब स्कूलों को मान्यता पूरी तरह से ‘Self-certification’ के आधार पर दी जाएगी। इसके तहत स्कूल प्रबंधन को केवल यह दस्तावेजी अनुपालन सुनिश्चित करना होगा कि वे लागू सुरक्षा मानकों, अधोसंरचना की पर्याप्तता और वैधानिक नियमों का पालन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय: शिक्षा क्षेत्र में आएगा बूम या घटेगी गुणवत्ता?
इस बड़े फैसले को लेकर शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि इससे राज्य में शिक्षा का लोकतांत्रीकरण होगा। जो छोटे और कुशल शिक्षक फंड या जमीन की कमी के कारण अपना स्कूल नहीं खोल पा रहे थे, वे अब आसानी से शिक्षण संस्थान शुरू कर सकेंगे। साझा खेल मैदान और डिजिटल लाइब्रेरी (Digital Library) की अवधारणा से शहरी क्षेत्रों में कम लागत में बेहतरीन स्कूल खुल सकेंगे। हालांकि, प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि ‘Self-certification’ के नाम पर कोई सुरक्षा मानकों से समझौता न करे, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता सर्वोपरि है।







