
नई दिल्ली, न्यूज डेस्क। भारतीय का ऊर्जा सेक्टर Energy Sector India इस समय अपने स्वर्णिम दौर से गुजर रहा है। देश के बिजली बुनियादी ढांचे (Power Infrastructure) को मजबूत करने से लेकर रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) और न्यूक्लियर पावर (Nuclear Power) तक, हर मोर्चे पर बड़े और अभूतपूर्व फैसले लिए जा रहे हैं। सरकारी कंपनियों से लेकर निजी दिग्गजों और राज्य सरकारों ने देश की बिजली व्यवस्था की सूरत बदलने के लिए कमर कस ली है।
इस विस्तृत बुलेटिन में हम आपको देश के ऊर्जा क्षेत्र (Energy Sector) से जुड़ी ऐसी 10 बड़ी और धमाकेदार खबरों से रूबरू कराएंगे, जो न केवल भारत की पावर कैपेसिटी (Power Capacity) को बढ़ाएंगी बल्कि ग्रिड को भी अत्यधिक आधुनिक बनाएंगी।
1. POWERGRID ने जीता देश का बड़ा इंटर-रीजनल ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट
पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (POWERGRID) ने टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (Tariff-Based Competitive Bidding – TBCB) के जरिए एक बेहद महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। कंपनी को “WR-ER इंटर-रीजनल नेटवर्क एक्सपेंशन स्कीम पार्ट-A” (WR-ER Inter-Regional Network Expansion Scheme Part-A) प्रोजेक्ट मिला है।
यह प्रोजेक्ट BOOT (Build, Own, Operate, and Transfer) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसके तहत छत्तीसगढ़ और झारखंड में नए सब-स्टेशन बनाए जाएंगे, जिससे देश के पश्चिमी क्षेत्र (Western Region) और पूर्वी क्षेत्र (Eastern Region) के बीच बिजली की कनेक्टिविटी काफी मजबूत हो जाएगी। इस प्रोजेक्ट को अगले 36 महीनों के भीतर चालू (Scheduled COD) करने का लक्ष्य रखा गया है और 35 साल बाद इसे बिना किसी लागत के केंद्रीय ट्रांसमिशन उपयोगिता (CTU) को सौंप दिया जाएगा।
2. अरुणाचल प्रदेश में NHPC लगाएगी 3,097 मेगावाट का एटालीन हाइड्रो प्रोजेक्ट
जलविद्युत क्षेत्र (Hydroelectric Sector) की दिग्गज कंपनी NHPC Limited ने अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Agreement – MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत दिबांग बेसिन की द्री और तांगोन नदियों पर 3,097 मेगावाट (MW) क्षमता के एटालीन हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (Etalin Hydro Electric Project) का निर्माण किया जाएगा।
इस समझौते के बाद अब NHPC के पास इस विशाल परियोजना के सर्वेक्षण, डीपीआर (DPR) तैयार करने, फाइनेंसिंग, संचालन और रखरखाव का पूरा अधिकार आ गया है। यह प्रोजेक्ट भी BOOT आधार पर 40 वर्षों के लीज पीरियड के साथ संचालित होगा। नवंबर 2023 में ही केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने इसकी डीपीआर को मंजूरी दे दी थी, जिसे अब पूरी तरह NHPC को सौंप दिया गया है।
3. गुजरात की नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी: परमाणु उपकरण निर्माताओं को मिलेगी बड़ी छूट
गुजरात सरकार ने अपनी नई ‘विकसित गुजरात इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026′ (Viksit Gujarat Industrial Policy 2026) के तहत एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 1 जून 2026 से लागू हुई इस नीति में “परमाणु ऊर्जा उपकरण (Small Modular Reactors – SMR सहित)” को प्रमुख सेक्टर्स (Thrust Sectors) की सूची में शामिल किया गया है।
महत्वपूर्ण बदलाव: इस फैसले के बाद अब न्यूक्लियर पावर इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियां भी राज्य सरकार की विशेष प्रोत्साहन योजनाओं (Incentives) का लाभ उठा सकेंगी। इससे भारत में परमाणु ऊर्जा की सप्लाई चेन मजबूत होगी और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
4. तमिलनाडु में ₹15,032 करोड़ की लागत से बनेंगे 231 नए सब-स्टेशन
दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तमिलनाडु में बिजली संकट को हमेशा के लिए खत्म करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बिजली वितरण ढांचे (Power Distribution Infrastructure) को मजबूत करने के लिए ₹15,032 करोड़ की भारी-भरकम राशि से 231 नए सब-स्टेशनों के निर्माण को मंजूरी दी है।
इतना ही नहीं, बिजली आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने और फॉल्ट रिस्पॉन्स (Fault Response) को तेज करने के लिए 15,058 नए कर्मचारियों की भर्ती को भी हरी झंडी दी गई है। वर्तमान में तमिलनाडु कुल 1,910 सब-स्टेशनों के माध्यम से लगभग 3.52 करोड़ उपभोक्ताओं को बिजली सेवा प्रदान कर रहा है।
5. बेंगलुरु में KPTCL ने लॉन्च की आधुनिक ‘डायनेमिक लाइन रेटिंग’ तकनीक
कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPTCL) ने बेंगलुरु की 220 kV पुत्तनहल्ली-सहकारनगर ट्रांसमिशन लाइन पर दक्षिण भारत का पहला डायनेमिक लाइन रेटिंग (Dynamic Line Rating – DLR) पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है।
इस आधुनिक तकनीक के जरिए मौसम की स्थिति और कंडक्टर के प्रदर्शन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग (Real-time Monitoring) की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से बिना नया इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए ट्रांसमिशन क्षमता को 25% तक बढ़ाया जा सकता है। भारतीय ग्रिड परिस्थितियों में इसके सफल परीक्षण के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
6. AIDAA का दावा: बेहतर प्लानिंग से बच सकते हैं ₹2.27 लाख करोड़
ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन (AIDAA) ने भारत के रिसोर्स एडेक्वेंसी प्लानिंग फ्रेमवर्क (Resource Adequacy Planning Framework) में सुधार के लिए कुछ बड़े सुझाव दिए हैं। एसोसिएशन का दावा है कि यदि मांग का सटीक अनुमान (Demand Forecasting) लगाया जाए और रिन्यूएबल एनर्जी का सही इस्तेमाल हो, तो देश के पावर सेक्टर में ₹2.27 लाख करोड़ की भारी बचत की जा सकती है। यह सुझाव ‘ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026’ (Draft National Electricity Policy 2026) को आकार देने में बेहद मददगार साबित हो सकते हैं।
7. IEA ने की भारतीय रिन्यूएबल एनर्जी ऑक्शन मॉडल की तारीफ
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपनी ‘साउथईस्ट एशिया एनर्जी आउटलुक 2026’ रिपोर्ट में भारत के रिन्यूएबल एनर्जी ऑक्शन फ्रेमवर्क (Renewable Energy Auction Framework) को दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के लिए एक बेहतरीन रोल मॉडल बताया है। रिपोर्ट में तारीफ की गई है कि भारत ने समय से पहले ही अपनी 50% गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता (Non-fossil Power Generation Capacity) का लक्ष्य हासिल कर लिया है। भारत का FDRE (Firm and Dispatchable Renewable Energy) मॉडल आज दुनिया भर के उभरते बाजारों के लिए एक मिसाल बन चुका है।
8. MNRE ने लॉन्च किया WT-MARUT पोर्टल, विंड सेक्टर को मिलेगी रफ्तार
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने पवन ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और घरेलू सोर्सिंग को बढ़ावा देने के लिए WT-MARUT (Wind Turbine Materials and Resources Utility Tracker) पोर्टल लॉन्च किया है। गोवा में आयोजित ग्लोबल विंड डे कॉन्फ्रेंस 2026 के दौरान इसे पेश किया गया।
9. नाविटास सोलर (Navitas Solar) लगाएगा ₹1,500 करोड़ का सोलर सेल प्लांट
सौर ऊर्जा क्षेत्र की जानी-मानी कंपनी नाविटास सोलर ने गुजरात के अंकलेश्वर में स्थित अपने कैंपस में 3.6 GW क्षमता का सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए ₹1,500 करोड़ के भारी निवेश (Investment) की घोषणा की है। इसमें से ₹1,400 करोड़ सोलर सेल बनाने और ₹100 करोड़ वेफर और इंगॉट (Wafer and Ingot) उत्पादन की पायलट लाइन के लिए उपयोग किए जाएंगे। इस प्लांट का पहला चरण साल 2027 तक चालू हो जाएगा, जिससे करीब 1,000 लोगों को सीधा रोजगार (Direct Jobs) मिलेगा।
10. राजेश पावर (Rajesh Power) को मिला ₹211 करोड़ का ऑर्डर, ओडिशा में एंट्री
राजेश पावर सर्विसेज लिमिटेड (RPSL) ने ओडिशा पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (OPTCL) से टैक्स सहित ₹211.68 करोड़ का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी मेंढसाल और चंडका-बी सब-स्टेशनों के बीच 220kV की अंडरग्राउंड ट्रांसमिशन लाइन (Underground Transmission Line) बिछाने का काम करेगी। 24 महीने में पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट पूर्वी भारत में राजेश पावर की स्थिति को और मजबूत करेगा।
निष्कर्ष (The Editorial Verdict)
इन सभी बड़े बदलावों और निवेशों से स्पष्ट है कि Energy Sector India न केवल आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी धाक जमा रहा है। चाहे वह परमाणु नीति में बदलाव हो या फिर ग्रिड को आधुनिक बनाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल, भारत आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा क्रांति का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है।







