
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने राज्य में चल रही संविदा बिजली कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल (Indefinite Strike) को देखते हुए एक बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ द्वारा अपनी मांगों को लेकर 22 जून 2026 से शुरू किए गए इस आंदोलन (Protest) के खिलाफ प्रबंधन ने दंडात्मक और वैकल्पिक दोनों तरह की कार्रवाई शुरू कर दी है।
CSPDCL के मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) राजेंद्र प्रसाद की ओर से जारी एक आधिकारिक परिपत्र (Official Circular) में साफ कर दिया गया है कि अगर संविदा कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटे, तो उनकी सेवा समाप्त (Termination of Service) कर दी जाएगी। इसके साथ ही, राज्य में ब्लैकआउट (Power Outage) की स्थिति को रोकने के लिए वैकल्पिक तौर पर नई भर्तियों को भी हरी झंडी दे दी गई है।
जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों भड़का आंदोलन?
छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक मांग पत्र (Demand Letter) क्रमांक 13 दिनांक 25.05.2026 को प्रबंधन के सामने पेश किया था। इस मांग पत्र के माध्यम से कर्मचारियों ने चरणबद्ध आंदोलन (Phased Agitation) की चेतावनी दी थी। मांगें पूरी न होने पर संविदा कर्मियों ने 22 जून 2026 से मैदानी कार्यालयों में पूरी तरह से काम बंद कर दिया।
कर्मचारियों के अचानक हड़ताल पर चले जाने से राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में बिजली वितरण व्यवस्था (Power Distribution System) और उपभोक्ता सेवा (Consumer Service) के चरमराने का खतरा पैदा हो गया। इसी स्थिति (Emergency Situation) को नियंत्रित करने के लिए बिजली कंपनी के शीर्ष प्रबंधन को यह बड़ा फैसला लेना पड़ा है।
बैकअप प्लान: 10 से 20% अतिरिक्त स्टाफ की होगी अस्थायी नियुक्ति
जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति (Uninterrupted Power Supply) सुनिश्चित करने के लिए बिजली कंपनी ने एक बड़ा बैकअप प्लान तैयार किया है। विभाग ने मैदानी क्षेत्रों में व्यवस्था संभालने के लिए अनुभवी लोगों की अस्थायी नियुक्ति (Temporary Recruitment) के आदेश दिए हैं।
प्रबंधन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुख्य बिंदु:
- अस्थायी नियोजन की अनुमति: हड़ताल अवधि के दौरान लाइन परिचारक (संविदा) के पदों पर काम सुचारू रखने के लिए आवश्यक संख्या में अनुभवी व्यक्तियों की भर्ती की जाएगी।
- अतिरिक्त मैनपावर: जरूरत के अनुसार, सामान्य दिनों की तुलना में 10% से 20% अधिक संख्या में अनुभवी कर्मचारियों को अस्थायी तौर पर तैनात किया जा सकता है।
- बाह्य स्रोत और दैनिक वेतन: इस संकट काल में बाह्य स्रोत (Outsourcing) और दैनिक वेतन (Daily Wages) पर श्रमिकों को काम पर रखा जाएगा।
- न्यूनतम वेतन का पालन: इन अस्थायी श्रमिकों को ‘न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948’ (Minimum Wages Act 1948) के तहत कुशल या अकुशल श्रेणी के अनुसार श्रमायुक्त द्वारा निर्धारित वर्तमान मानदेय या पारिश्रमिक (Remuneration) का भुगतान किया जाएगा।
अधिकारियों को वित्तीय अधिकार: तत्काल फंड निकासी की मंजूरी
इस आपातकालीन व्यवस्था को लागू करने में कोई प्रशासनिक या वित्तीय अड़चन न आए, इसके लिए कंपनी ने अपनी शक्ति प्रत्यायोजन पुस्तिका (Delegation of Power Book) की कण्डिका 8.3.2 का उपयोग किया है।
इसके तहत कार्यपालक निदेशक (Executive Director), मुख्य अभियंता (Chief Engineer), और अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) को सक्षम अनुमोदन के बाद अस्थायी अग्रिम राशि (Temporary Advance Amount) आहरित करने का अधिकार दे दिया गया है। यह वित्तीय व्यवस्था केवल तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक हड़ताल समाप्त नहीं हो जाती या नियमित कार्य व्यवस्था पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती।
कड़ा एक्शन: 1 महीने में नौकरी से निकालने का नोटिस
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा झटका उन संविदा कर्मियों को लगा है जो आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं या उसमें शामिल हैं। CSPDCL प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि कामबंद आंदोलन को तुरंत स्थगित न करने की स्थिति में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) की जाएगी।
इसके अलावा, ‘नो वर्क नो पे’ (No Work No Pay) के सिद्धांत के तहत, जितने दिन भी संविदा कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे, नियमानुसार उनके उतने दिनों के पारिश्रमिक की कटौती (Salary Deduction) की जाएगी। यह पत्र अधीक्षण अभियंता या उनके समकक्ष उच्च स्तर के अधिकारियों द्वारा जारी किया जा रहा है।
चतुरपोस्ट का विश्लेषण (Expert Opinion)
बिजली कंपनी प्रबंधन के इस कदम से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ सरकार किसी भी कीमत पर आवश्यक सेवाओं (Essential Services) को ठप नहीं होने देना चाहती। मानसून के मौसम में बिजली कटौती से आम जनता में आक्रोश पनप सकता है, जिसे देखते हुए प्रबंधन ने कानूनी और प्रशासनिक दोनों तरीकों से हड़ताल को कुचलने या नियंत्रित करने की तैयारी कर ली है। संविदा कर्मचारियों के लिए यह आर-पार की लड़ाई बन चुकी है, क्योंकि एक तरफ उनकी मांगें हैं और दूसरी तरफ नौकरी जाने का सीधा खतरा।
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