
कोरबा (चतुरपोस्ट ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में बिजली कंपनी प्रबंधन (Power Company Management) की कड़ी चेतावनी और अपीलों को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संघ (Chhattisgarh State Electricity Board Reserved Category Officers-Employees Association) ने आर-पार की लड़ाई शुरू कर दी है।
पदोन्नति (Promotion), आरक्षण (Reservation) और लंबे समय से लंबित (Pending Demands) अपनी मांगों को लेकर संघ ने सोमवार को एक दिवसीय सामूहिक अवकाश (Mass Casual Leave) लेकर प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। इस आंदोलन के कारण प्रदेश के कई प्रमुख विद्युत संयंत्रों और कार्यालयों में कामकाज पर आंशिक असर देखने को मिला है।
डीएसपीएम प्लांट के सामने डटे कर्मचारी, जमकर की नारेबाजी
इस बड़े प्रदेशव्यापी आंदोलन (Statewide Agitation) के तहत सबसे उग्र प्रदर्शन कोरबा के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थर्मल पावर प्लांट (DSPM Power Plant) में देखा गया। यहां के अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहे।
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने पावर प्लांट के मुख्य द्वार के सामने बैठकर जोरदार धरना-प्रदर्शन (Sit-in Protest) किया। कर्मचारियों ने बिजली कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी 21 सूत्रीय मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
प्रबंधन पर कोर्ट के आदेशों की गलत व्याख्या करने का गंभीर आरोप
संघ के प्रांतीय सचिव प्रवीण भगत ने मीडिया से बात करते हुए प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से कर्मचारियों के आरक्षण, पदोन्नति और अन्य विभागीय समस्याओं को लेकर प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है, लेकिन अधिकारी जानबूझकर इस ओर आंखें मूंदे बैठे हैं।
प्रांतीय सचिव ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) और हाई कोर्ट (High Court) के स्पष्ट आदेशों की गलत व्याख्या (Misinterpretation) करके बिजली कंपनियों में वर्तमान पदोन्नति की प्रक्रिया चलाई जा रही है। इस गलत नीति के कारण अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के हजारों योग्य अधिकारी और कर्मचारी अपने जायज प्रमोशन से वंचित हो रहे हैं। संघ ने पुरजोर मांग की है कि जब तक राज्य सरकार की नई पदोन्नति नीति लागू नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान में चल रही विसंगतिपूर्ण पदोन्नति प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
⚡ संघ की 21 सूत्रीय मांगें एक नजर में (Key Demands):
- ➜ आरक्षण रोस्टर लागू हो: सीधी भर्ती और विभागीय पदोन्नति में नियमों के तहत आरक्षण रोस्टर (Reservation Roster) का कड़ाई से पालन किया जाए।
- ➜ पुरानी पेंशन योजना (OPS): वर्ष 2004 के बाद नियुक्त किए गए सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।
- ➜ संविदा कर्मियों का नियमितीकरण: बिजली कंपनियों में वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों (Contractual Employees) को नियमित किया जाए।
- ➜ भत्तों में बढ़ोतरी: तकनीकी कर्मचारियों को तकनीकी भत्ता, ओवरटाइम और नाइट शिफ्ट भत्ते (Night Shift Allowance) में तत्काल सम्मानजनक वृद्धि दी जाए।
- ➜ सुरक्षा उपकरण और अनुकंपा: जोखिम वाले कार्यों में लगे सुरक्षा सैनिकों और ठेका श्रमिकों को उच्च गुणवत्ता वाले सुरक्षा उपकरण (Safety Equipment) मिले और अनुकंपा नियुक्तियों का त्वरित निराकरण हो।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो 6 जुलाई से ठप होगा छत्तीसगढ़!
कोरबा इकाई के सचिव देवीदयाल साय ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि बिजली कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों के संवैधानिक और सेवा संबंधी अधिकारों की लगातार अनदेखी (Negligence) की जा रही है। इससे पूर्व बीती 20 अप्रैल को बिजली कंपनी के चेयरमैन और शीर्ष प्रबंधन की मौजूदगी में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी।
उस बैठक में प्रबंधन ने सभी जायज मांगों के त्वरित समाधान का लिखित और मौखिक आश्वासन दिया था, जिसके बाद संगठन ने अपने आंदोलन को स्थगित (Postponed) कर दिया था। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई (Concrete Action) नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग संघ के जिला अध्यक्ष आनंद सिंह मरावी ने आर-पार के मूड में साफ कर दिया है कि यदि प्रबंधन ने इस बार भी उनके जायज हक पर सकारात्मक निर्णय (Positive Decision) नहीं लिया, तो आगामी 6 जुलाई से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश (Indefinite Mass Leave) के साथ एक बड़ा और ऐतिहासिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
इन मांगों पर भी अड़ा है कर्मचारी संगठन
21 सूत्रीय मांग पत्र में कई तकनीकी और संगठनात्मक बदलावों का भी उल्लेख किया गया है। संघ चाहता है कि किसी भी प्रकार की विभागीय जांच (Departmental Enquiry) को पूरा करने के लिए एक सख्त समय-सीमा तय की जाए, ताकि कर्मचारियों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न न हो।
इसके साथ ही, पदोन्नति समितियों (Promotion Committees) में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग का उचित और प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है। इसके अतिरिक्त, एमआईई (MIE) डिग्रीधारी योग्य अधिकारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ देने और प्रोग्रामर के पदों के लिए उच्च पद स्वीकृत करने जैसी महत्वपूर्ण मांगें भी इस आंदोलन का मुख्य हिस्सा हैं।
क्या छत्तीसगढ़ में मंडरा रहा है बिजली संकट (Power Crisis)?
बिजली कंपनियों के इस सामूहिक अवकाश और 6 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल के अल्टीमेटम से राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। छत्तीसगढ़ एक पावर सरप्लस राज्य है, लेकिन यदि उत्पादन संयंत्रों (Power Plants) के तकनीकी कर्मचारी और अधिकारी सामूहिक रूप से काम बंद कर देते हैं, तो ग्रिड की स्थिरता और बिजली उत्पादन पर इसका सीधा और बेहद बुरा असर पड़ सकता है।







