
कोरबा, न्यूज डेस्क। छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ महासंघ (Chhattisgarh State Power Employee Federation) ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों (Pending Demands) को लेकर आंदोलन को और अधिक उग्र (Aggressive Protest) करने का फैसला किया है। महासंघ ने अब सीधे तौर पर अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल (Indefinite Strike) की घोषणा कर दी है, जिससे सरकार और बिजली कंपनी प्रबंधन के होश उड़ गए हैं।
महासंघ के इस कड़े कदम के बाद पूरे राज्य में बिजली व्यवस्था चरमराने की आशंका पैदा हो गई है। कर्मचारियों की साफ चेतावनी है कि जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। नतीजतन (Consequently), अब यह लड़ाई आर-पार के मोड़ पर पहुंच चुकी है।
क्या हैं बिजली कर्मचारियों की मुख्य मांगें? (Key Demands)
बिजली कंपनियों के संविदा और नियमित कर्मचारी पिछले लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे थे। इसके विपरीत (In contrast), प्रबंधन की उदासीनता को देखते हुए अब उन्होंने सड़क पर उतरने का मन बना लिया है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली: कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को पूरी तरह से बहाल करना है, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
- संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण: बिजली कंपनी में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे संविदा कर्मचारियों (Contract Employees) को नियमित (Regularization) करने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई जा रही है।
- वेतन विसंगति और अन्य भत्ते: कर्मचारियों की अन्य लंबित मांगों में वेतन विसंगति को दूर करना और महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) में सुधार शामिल है।
हस्ताक्षर और जनसंपर्क अभियान से फूंक रहे हैं फूंक
आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए महासंघ ने पूरे प्रदेश में एक व्यापक रणनीति तैयार की है। विशेष रूप से (Particularly), इसके तहत पूरे छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर हस्ताक्षर अभियान (Signature Campaign) और जनसंपर्क अभियान (Public Relations Campaign) चलाया जा रहा है।
महासंघ के पदाधिकारी और सक्रिय कार्यकर्ता प्रदेश के विभिन्न संभागों, जिलों और ब्लॉक स्तर के बिजली कार्यालयों (Electricity Offices) में लगातार दौरा कर रहे हैं। वे आम कर्मचारियों से सीधे संपर्क (Direct Contact) साध रहे हैं और उन्हें आंदोलन के उद्देश्यों से अवगत करा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप (As a result), इस अभियान को कर्मचारियों का जबरदस्त और अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। विभिन्न कार्यालयों से आ रही तस्वीरें और रिपोर्ट बताती हैं कि कर्मचारी स्वेच्छा से आगे आकर आंदोलन के समर्थन पत्र पर अपने हस्ताक्षर कर रहे हैं।
महासचिव नवरतन बरेठ का बड़ा बयान: “कर्मचारियों का मिल रहा है अपार समर्थन”
महासंघ के महामंत्री (General Secretary) नवरतन बरेठ ने आंदोलन की वर्तमान स्थिति पर अपनी बात रखी। उन्होंने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि पूरे प्रदेशभर में बिजली कर्मचारियों का इस आंदोलन को अक्षुण्ण और अटूट समर्थन मिल रहा है। नवरतन बरेठ ने जोर देकर कहा कि कर्मचारियों का यह आक्रोश (Anger) अचानक नहीं फूटा है, बल्कि यह सालों से हो रही अनदेखी का नतीजा है।
“बिजली कर्मचारी दिन-रात मेहनत करके छत्तीसगढ़ को ऊर्जावान बनाए रखते हैं, लेकिन जब उनके अधिकारों की बात आती है, तो प्रबंधन और प्रशासन आंखें मूंद लेता है। अब यह तानाशाही नहीं चलेगी। हमारा हस्ताक्षर अभियान इस बात का प्रमाण है कि हर एक कर्मचारी इस लड़ाई में हमारे साथ खड़ा है।” — नवरतन बरेठ, महामंत्री
आगामी रणनीति: 10 जुलाई और 17 अगस्त को महा-प्रदर्शन का शंखनाद
महासंघ ने केवल हड़ताल की घोषणा ही नहीं की है, बल्कि सरकार को घेरने के लिए एक पूरा टाइमलाइन (Timeline) और शेड्यूल तैयार कर लिया है। यदि समय रहते बातचीत के जरिए हल नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन का स्वरूप और भी आक्रामक होने जा रहा है। महासंघ द्वारा घोषित आगामी कार्यक्रम इस प्रकार हैं:
- 🔴 10 जुलाई को विशाल आमसभा: प्रदेश के सभी कोनों से हजारों की संख्या में बिजली कर्मचारी राजधानी में जुटेंगे और एक विशाल आमसभा (Mass Rally) के जरिए अपनी एकजुटता दिखाएंगे।
- 🔴 10 जुलाई को आक्रोश प्रदर्शन: आमसभा के साथ ही बिजली प्रबंधन के खिलाफ एक बड़ा आक्रोश प्रदर्शन (Protest Demonstration) किया जाएगा।
- 🔴 17 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल: यदि 10 जुलाई के प्रदर्शन के बाद भी सरकार नहीं चेतती है, तो 17 अगस्त से पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
प्रबंधन की ‘वेतन कटौती’ की धमकी भी रही बेअसर
दूसरी ओर (On the other hand), बिजली कंपनी प्रबंधन ने इस आंदोलन को कुचलने और दबाने के लिए दमनकारी नीतियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। आंदोलन की शुरुआत में ही प्रबंधन की ओर से एक सख्त चेतावनी (Strict Warning) जारी की गई थी। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि आंदोलन या हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ वेतन कटौती (Salary Deduction) की जाएगी और उनकी सेवा अवधि में ‘ब्रेक इन सर्विस’ (Break in Service) की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
हालांकि (However), प्रबंधन की इस प्रशासनिक घुड़की या डराने की कोशिश का कर्मचारियों के मनोबल पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ा है। महासंघ के नेताओं का कहना है कि वे इस तरह की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। पूर्व में दी गई चेतावनी के बावजूद कर्मचारियों ने पूरी निडरता के साथ अपने आंदोलन को जारी रखा है, जो यह दर्शाता है कि इस बार कर्मचारी आर-पार के मूड में हैं।
आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने की अपील
इस महा-आंदोलन के बीच महासंघ ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और रणनीतिक बात कही है। महासंघ के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि किसी भी आंदोलन की सफलता उसकी अटूट एकता (Unity) पर निर्भर करती है। महासंघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी भी कर्मचारी संगठन (Employee Union) का वास्तविक उद्देश्य कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और पुरानी पेंशन बहाल कराना है, तो उन सभी संगठनों को अपने व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर एक साथ चलना चाहिए।
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संगठन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों (Personal Interests) और व्यक्तिगत लाभ के कारण इस ऐतिहासिक महा-आंदोलन को कमजोर (Weaken) करने की साजिश रच रहे हैं। किसी भी बड़े और सक्रिय संगठन को निर्णय प्रक्रिया (Decision Making Process) से अलग रखने की कोशिश की जा रही है, जिससे आंदोलन बिखर सकता है। इसलिए (Therefore), महासंघ ने प्रदेश के सभी छोटे-बड़े कर्मचारी संगठनों से अपील की है कि वे तमाम राजनीतिक और व्यक्तिगत मतभेद (Personal Differences) को पूरी तरह भुलाकर एक मंच पर आएं और पूर्व घोषित आंदोलनकारी कार्यक्रमों को सफल बनाने में अपना योगदान दें।







