
रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने राज्य के विकास को एक नई और आधुनिक दिशा देने के लिए कमर कस ली है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ (Chintan Shivir 3.0) का भव्य आयोजन 4 और 5 जुलाई को भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM Raipur) में किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन व अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर के सहयोग से आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य शासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी (Result-oriented) बनाना है।
इस महत्वपूर्ण पहल का मुख्य लक्ष्य ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के विजन को नई गति देना है। आपको बता दें कि पिछले दो सालों से सरकार आईआईएम में इसी तरह के चिंतन शिविरों का सफल आयोजन करती आ रही है और इस बार यह इस श्रृंखला का तीसरा साल है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि बदलते समय की चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप शासन को भी निरंतर सीखना होगा और स्वयं का मूल्यांकन (Self-Assessment) करना होगा।
भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार हो रहा है छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि भविष्य की आवश्यकताओं (Future Needs) के अनुरूप स्वयं को तैयार करना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। इसी दूरदर्शी सोच के अनुरूप आयोजित यह चिंतन शिविर मंत्रिमंडल और विभिन्न क्षेत्रों के राष्ट्रीय विशेषज्ञों (National Experts) के बीच संवाद, अनुभव-साझाकरण तथा नीति-निर्माण (Policy Making) का एक बेहद मजबूत मंच बनेगा।
इस दो दिवसीय महामंथन में प्रदेश के समग्र, संतुलित और समावेशी विकास (Inclusive Development) से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि योजनाएं सिर्फ कागजों पर न रहें, बल्कि उनका सीधा लाभ जमीन पर आम जनता तक पहुंचे।
इन महत्वपूर्ण विषयों पर होगा विस्तृत सत्र (Brainstorming Sessions)
इस दो दिवसीय शिविर के दौरान कई महत्वपूर्ण सेक्टरों पर गहन चर्चा की जाएगी, जिनमें शामिल हैं:
- कृषि और ग्रामीण विकास (Agriculture & Rural Development): किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति।
- उद्योग और निवेश (Industry & Investment): राज्य में नए उद्योगों को आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना।
- पर्यटन और खेल (Tourism & Sports): छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन हब और खेल गढ़ के रूप में विकसित करना।
- नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियां (Innovation & Emerging Technologies): सरकारी कामकाज में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग।
- सुशासन और संस्थागत सुधार (Good Governance & Institutional Reforms): प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त और जनता के प्रति जवाबदेह बनाना।
जब आध्यात्मिक गुरु और ओलंपिक विजेता बने सरकार के ‘गुरु’
इस चिंतन शिविर की सबसे दिलचस्प बात यह है कि मंत्रियों को ट्रेनिंग देने के लिए देश के सबसे बड़े दिग्गजों और राष्ट्रीय विशेषज्ञों (National Experts) को बुलाया गया है। इस चिंतन शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें देश के जाने-माने विषय विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।
सुशासन की नई कार्य संस्कृति को मिलेगा बल (New Work Culture)
मुख्यमंत्री साय ने साफ तौर पर कहा है कि सुशासन (Good Governance) केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय की मांग के अनुरूप स्वयं को निरंतर बेहतर बनाते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी है। यह चिंतन शिविर इसी सतत सुधार (Continuous Improvement) की प्रक्रिया का एक हिस्सा है।
सरकार का अंतिम उद्देश्य एक ऐसी कार्य संस्कृति (Work Culture) विकसित करना है जो पूरी तरह से:
- पारदर्शी (Transparent) हो।
- उत्तरदायी (Accountable) हो।
- संवेदनशील (Sensitive) हो।
- परिणाम आधारित (Result-Oriented) हो।
मुख्यमंत्री का दृढ़ विश्वास है कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग से नहीं, बल्कि दूरदर्शी नीति (Visionary Policy), नवाचार, प्रभावी नेतृत्व और विभागों के बीच बेहतर समन्वय (Inter-departmental Coordination) से ही संभव होगा। आईआईएम रायपुर में होने वाला यह मंथन आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को एक नई और ऐतिहासिक दिशा देने वाला साबित होगा।







