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बड़ी खुशखबरी: सरकारी कर्मचारियों से गलत रिकवरी पर रोक का नया प्लान, वित्त मंत्रालय में हुआ यह बड़ा फैसला

Central Government Employees न्‍यूज डेस्‍क (chaturpost.com)। देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों (Pensioners) के लिए वित्त मंत्रालय से एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को होने वाली प्रशासनिक गलतियों की वजह से भारी वित्तीय नुकसान और मानसिक परेशानी से बचाने के लिए नीतिगत स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो चुकी है।

नेशनल काउंसिल – जेसीएम (National Council – JCM) के स्टाफ साइड की ओर से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के सचिव (Secretary, Department of Expenditure) की अध्यक्षता में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा सरकारी कर्मचारियों से होने वाली गलत या अधिक भुगतान की वसूली (Recovery of Wrongful / Excess Payment) की नीति को युक्तिसंगत और सरल बनाना था।

आपको बता दें कि यह बैठक नेशनल काउंसिल जेसीएम की 49वीं बैठक में कैबिनेट सचिव द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद 2 जुलाई 2026 को बुलाई गई थी। इस बैठक में स्टाफ साइड का प्रतिनिधित्व जेसीएम के राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड शिव गोपाल मिश्रा (Shiva Gopal Mishra), कॉमरेड गुमान सिंह और कॉमरेड सी. श्रीकुमार ने किया।

प्रशासनिक गलतियों की सजा कर्मचारी क्यों भुगतें? (Administrative Lapses)

बैठक के दौरान जेसीएम के प्रतिनिधिमंडल ने बेहद कड़े शब्दों में वित्त मंत्रालय के सचिव के सामने यह मुद्दा उठाया कि कर्मचारियों के वेतन या प्रमोशन फिक्सेशन में होने वाली अधिकांश गलतियां पूरी तरह से प्रशासनिक कमियों (Administrative Lapses / Mistakes) के कारण होती हैं। इनमें बेचारे सीधे-साधे कर्मचारियों का कोई दोष नहीं होता।

स्टाफ साइड ने तर्क दिया कि जब कोई कर्मचारी रिटायर होने वाला होता है, तो अचानक सालों पुराना रिकॉर्ड खंगालकर ऑडिट आपत्तियां (Audit Objections) लगा दी जाती हैं। इसके बाद बिना किसी पूर्व सूचना या माफी प्रक्रिया (Waiver Action) के कर्मचारी की सैलरी या रिटायरमेंट बेनिफिट्स से लाखों रुपये काट लिए जाते हैं। यह पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है।

जेसीएम ने सौंपे 5 सूत्रीय मांग पत्र, वसूली माफी का नया वित्तीय ढांचा (Proposed Financial Framework)

कर्मचारियों की इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए स्टाफ साइड ने सचिव (व्यय) को एक लिखित नोट सौंपा है। इसमें वसूली माफी की शक्तियों को विकेंद्रीकृत (Decentralization of Waiver Powers) करने के लिए निम्नलिखित वित्तीय सीमाएं तय करने की मांग की गई है, ताकि फाइलों को दिल्ली के चक्कर न काटने पड़ें:

  • 1. 5 लाख रुपये तक की माफी (Up to ₹5 Lakhs): यदि किसी व्यक्तिगत कर्मचारी से गलत या अधिक भुगतान की वसूली की कुल राशि 5 लाख रुपये तक है, तो इस मामले में वसूली माफ करने का पूरा अधिकार सीधे संबंधित विभागाध्यक्ष (Head of the Department – HoD) को डेलीगेट कर दिया जाना चाहिए, जिससे अनावश्यक देरी से बचा जा सके।
  • 2. 5 से 10 लाख रुपये तक की माफी (From ₹5 Lakhs to ₹10 Lakhs): यदि वसूली जाने वाली राशि 5 लाख रुपये से अधिक लेकिन 10 लाख रुपये तक है, तो इस श्रेणी के मामलों में रिकवरी माफ करने की प्रशासनिक शक्ति संबंधित मंत्रालय या विभाग (Respective Ministry / Department) को सौंप दी जानी चाहिए।
  • 3. 10 लाख रुपये से अधिक के मामले (Above ₹10 Lakhs): यदि अधिक भुगतान की राशि 10 लाख रुपये की सीमा को पार कर जाती है, तो केवल ऐसे ही बड़े और असाधारण मामलों को अंतिम निर्णय और मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) के पास भेजा जाना चाहिए।
  • 4. पहचान होते ही तुरंत माफी की प्रक्रिया (Immediate Action on Identification): जैसे ही किसी व्यक्तिगत कर्मचारी के मामले में गलत या अधिक भुगतान की पहचान होती है और यदि वह मामला DoPT के 02.03.2016 के कार्यालय ज्ञापन (OM) में दी गई 5 श्रेणियों/स्थितियों के अंतर्गत आता है, तो संबंधित विभागाध्यक्ष को बिना किसी देरी के नियमों के तहत तुरंत उसकी रिकवरी माफ करने (Waiver) के कदम उठाने चाहिए।
  • 5. जिम्मेदारी तय करने के नाम पर देरी पर रोक (No Delay in the Name of Fixing Responsibility): अक्सर विभाग “गलती किसकी थी और जिम्मेदारी किस पर तय हो” इसके चक्कर में रिकवरी माफी की फाइल को सालों तक अटकाए रखते हैं। जेसीएम ने मांग की है कि जिम्मेदारी तय करने की इस लंबी प्रक्रिया के नाम पर ‘वेवर ऑफ रिकवरी’ के मामलों को बिल्कुल भी लेट न किया जाए, क्योंकि कई बार संबंधित अधिकारी ट्रांसफर या रिटायर हो चुके होते हैं और दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं होते। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मूल भावना के तहत इस पूरी प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि प्रभावित कर्मचारी को वित्तीय और मानसिक कष्ट न झेलना पड़े।

 ऑडिट के नाम पर उत्पीड़न बंद करने की मांग (Stop Auditing Harassment)

शिव गोपाल मिश्रा द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में कुछ बेहद गंभीर और व्यावहारिक प्रशासनिक सुधारों (Administrative Reforms) पर जोर दिया गया है:

  • दोबारा ऑडिट पर रोक (No Re-Auditing): कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड का समय-समय पर ऑडिट होता है। जेसीएम ने मांग की है कि एक बार ऑडिट टीम द्वारा जांचे और सही पाए गए रिकॉर्ड को दोबारा उसी अवधि के लिए ऑडिट के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए।
  • सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का पालन (Rafiq Masik Case Judgment): कार्मिक मंत्रालय (DoPT) के 02.03.2016 के पुराने कार्यालय ज्ञापन (OM) और माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पंजाब राज्य बनाम रफीक मसीह (व्हाइट वॉशर) मामले में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय का देश के सभी मंत्रालयों और अधीनस्थ कार्यालयों में कड़ाई से पालन होना चाहिए।
  • अनावश्यक अदालती मुकदमों से मुक्ति (Avoiding Court Litigation): सरकारी व्यवस्था की सुस्ती के कारण कर्मचारियों और विशेष रूप से पेंशनभोगियों को अपने हक के लिए अदालतों के चक्कर लगाने पर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, जेसीएम ने रेलवे से सेवानिवृत्त हो रहे या हो चुके आरपीएफ (RPF Staff) कर्मियों के वेतन से की जा रही अवैध वसूलियों का मामला भी विशेष रूप से सचिव के संज्ञान में लाया।

वित्त मंत्रालय का रुख: क्या मिला आश्वासन? (Government Assurance)

इस मैराथन बैठक के बाद सचिव (व्यय) ने जेसीएम के प्रतिनिधियों को सकारात्मक आश्वासन (Positive Assurance) दिया है। उन्होंने कहा है कि स्टाफ साइड द्वारा दिए गए इन सभी व्यावहारिक प्रस्तावों पर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के साथ गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।

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सरकार जल्द ही इस संबंध में सभी मंत्रालयों के लिए नए और सरल दिशा-निर्देश (Necessary Guidelines) जारी करेगी, ताकि किसी भी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के समय किसी भी प्रकार का वित्तीय और मानसिक कष्ट (Financial and Mental Hardship) न उठाना पड़े।

Central Government Employees

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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