
रायपुर, chaturpost.com। भारत की लोक संस्कृति और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली विश्वविख्यात पंडवानी गायिका (Pandwani Singer) पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Raipur) में शनिवार देर रात (तड़के 3.15 बजे) अंतिम सांस ली। वह 70 वर्ष की थीं और पिछले काफी समय से उम्र संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं।
डॉ. तीजन बाई (Teejan Bai) के निधन की खबर मिलते ही देश और दुनिया के कला प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एम्स पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। आज उनके पैतृक गांव गनियारी (भिलाई) में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
रायपुर एम्स में चल रहा था इलाज, आईसीयू में थीं भर्ती
डॉ. तीजन बाई पिछले करीब 2 वर्षों से अस्वस्थ चल रही थीं। हाल ही में उनकी तबीयत अधिक बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर एम्स के सघन चिकित्सा कक्ष (ICU) में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ (Breathing Issue) और बढ़ती उम्र की वजह से मल्टीपल ऑर्गन कॉम्प्लिकेशंस थे। विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
पीएम नरेंद्र मोदी ने जताया दुख, बहू को फोन कर जाना था हालचाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X Platform) पर लिखा:
“डॉ. तीजन बाई जी का जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति (Irreparable Loss) है। उन्होंने पंडवानी के माध्यम से भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर एक नई ऊंचाई दी। उनका जीवन और कला साधना आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर बेहद संवेदनशील थे। 1 नवंबर 2025 को पीएम मोदी ने तीजन बाई की बहू वेणू देशमुख को खुद फोन लगाकर उनका हालचाल जाना था। बातचीत के दौरान पीएम ने कहा था कि तीजन बाई जी छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा की अमूल्य धरोहर (Cultural Heritage) हैं। उन्होंने इलाज के लिए हरसंभव मदद का भरोसा भी दिया था।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (CM Vishnu Deo Sai) ने एम्स रायपुर पहुंचकर दिवंगत तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा, “डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है। उनका निधन हमारी सांस्कृतिक विरासत के लिए एक ऐसा शून्य है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता।” इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और विधायक पुरंदर मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी श्रद्धांजलि दी।
संघर्षों से भरा रहा जीवन: समाज ने किया था बेदखल, पर नहीं मानी हार
24 अप्रैल 1956 को भिलाई के गनियारी गांव में जन्मीं तीजन बाई का जीवन संघर्षों की एक अनकही दास्तान (Success Story) है। पारधी जनजाति में जन्मीं तीजन बाई को बचपन में उनकी लोक गायिकी के कारण समाज के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था।
- समाज से निष्कासन: उस दौर में महिलाओं का मंच पर गाना पाप माना जाता था, जिसके कारण उन्हें समाज से बेदखल कर दिया गया था।
- नाना से मिली प्रेरणा: उन्होंने अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते सुना था, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने गुपचुप तरीके से इसे सीखा।
- उमेद सिंह देशमुख का साथ: उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचान कर प्रसिद्ध गायक उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें पंडवानी का औपचारिक प्रशिक्षण (Training) दिया।
कापालिक शैली की पहली महिला कलाकार, जिसने तोड़ी रूढ़ियां
तीजन बाई ने केवल 13 वर्ष की उम्र में अपना पहला मंच प्रदर्शन (Stage Performance) किया था। उस जमाने में महिलाएं केवल बैठकर पंडवानी गाती थीं, जिसे ‘वेदमती शैली’ कहा जाता है। पुरुषों के वर्चस्व वाली खड़े होकर गाई जाने वाली ‘कापालिक शैली’ में कदम रखने वाली तीजन बाई देश की पहली महिला कलाकार बनीं। हाथ में तंबूरा लेकर, अभिनय और गरजती हुई आवाज में जब वे मंच पर महाभारत का प्रसंग जीवंत करती थीं, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे।
डॉ. तीजन बाई को मिले प्रमुख सम्मान और उपलब्धियां (Awards and Honours)
बचपन में कभी स्कूल का मुंह न देख पाने वाली तीजन बाई साक्षरता अभियान के तहत बमुश्किल पांचवीं कक्षा तक ही पढ़ पाई थीं, लेकिन अपनी कला के दम पर उन्होंने वह मुकाम हासिल किया जो बड़े-बड़े विद्वानों के लिए एक सपना होता है। भारत रत्न को छोड़कर देश के लगभग सभी शीर्ष नागरिक सम्मान उनकी झोली में आए।
वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ का नाम किया रोशन
तीजन बाई ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि पेरिस, लंदन, स्विट्जरलैंड, जर्मनी और जर्मनी जैसे कई देशों में पंडवानी की प्रस्तुतियां देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि (International Fame) पाई। उनकी सशक्त आवाज और तंबूरे की थाप हमेशा गूंजती रहेगी। chaturpost.com की ओर से महान लोक कलाकार डॉ. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि।







