
नारायणपुर। छत्तीसगढ़ लघु वेतन शासकीय चतुर्थ वर्ग कर्मचारी संघ (पंजीयन क्रमांक 6472) के बैनर तले आयोजित आंदोलन का बड़ा प्रशासनिक परिणाम सामने आ गया है। 17 जुलाई 2026 को जिला मुख्यालय में हुए ऐतिहासिक एवं विशाल कलेक्ट्रेट महाघेराव आंदोलन के बाद नारायणपुर जिला प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है। कर्मचारियों के एकजुट संघर्ष और चट्टानी एकता के आगे झुकते हुए प्रशासन ने मांगों के त्वरित निराकरण की दिशा में पारदर्शी कदम उठाए हैं।
संगठन के राष्ट्रीय उप-महामंत्री योगेश चौरे और जिला अध्यक्ष मंगलू उसेंडी ने बताया कि कलेक्टर नम्रता जैन (IAS) एवं अपर कलेक्टर वीरेंद्र बहादुर पंचभावे (IAS) की मौजूदगी में हुई उच्च स्तरीय मैराथन वार्ता (High-Level Marathon Meeting) के दौरान कर्मचारियों की 5 प्राथमिक मांगों पर सहमति बनी थी। इसके पश्चात कर्मचारियों के निरंतर दबाव और रणनीतिक वार्ता के बाद देर शाम तक सबसे महत्वपूर्ण मांग क्रमांक 1 (रिक्त पदों के विरुद्ध नियमितीकरण) के लिए भी विभागीय छानबीन समिति (Scrutiny Committee) का गठन कर दिया गया। इस प्रकार संघ की कुल 6 मांगों का सफलता पूर्वक निराकरण हो चुका है।
प्रशासनिक ज्ञापनों के साथ बैठकों का दौर जारी
कलेक्टर कार्यालय (आदिवासी विकास शाखा) नारायणपुर द्वारा जारी आधिकारिक ज्ञापनों के अनुसार, स्वीकृत मांगों पर तत्काल अमल (Action Taken Report) सुनिश्चित करने के लिए 21 जुलाई 2026 को दोपहर 3:00 बजे जिला कार्यालय नारायणपुर के सभा कक्ष में अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में तीन अलग-अलग विभागीय समितियों की महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गई हैं।
इन बैठकों में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जिला रोजगार अधिकारी, सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास) एवं सहायक लेखाधिकारी सहित तमाम संबंधित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
बकाया भुगतान और छात्रावास व्यवस्था में पारदर्शिता
संघ द्वारा उठाए गए अन्य बिंदुओं में मांग क्रमांक 4 के तहत कर्मचारियों के जी.पी.एफ़. (GPF) और डी.पी.एफ़. (DPF) के लंबित भुगतान की प्रक्रिया को सुगम बनाने पर सहमति बनी। इसके अलावा, मांग क्रमांक 5 के तहत जिले भर के शासकीय छात्रावासों और आश्रमों में कर्मचारियों के पारदर्शी युक्तियुक्तकरण (Rationalization Policy) को लागू करने का निर्णय लिया गया है, ताकि किसी भी कर्मचारी के साथ भेदभाव न हो और प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।
कर्मचारियों के अधिकारों की इस लड़ाई में दैनिक वेतनभोगी (Daily Wager Employees) भाइयों के हितों को भी प्राथमिकता दी गई है।
7वीं मांग पर भी कलेक्टर ने दिया ठोस आश्वासन
मांग क्रमांक 7, जो कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के एरियर (Pending Arrears) भुगतान और उनकी नौकरी के संरक्षण (Job Security) से जुड़ी है, उस पर भी सकारात्मक मोड़ आया है।
कलेक्टर नम्रता जैन ने संघ के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया है कि इस संवेदनशील विषय पर विभागीय स्तर पर त्वरित तकनीकी व वित्तीय परीक्षण (Technical & Financial Verification) कराकर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद दैनिक वेतन भोगियों में भी न्याय की उम्मीद जगी है।
कर्मचारियों में उत्साह, नतीजों पर टिकी निगाहें
कलेक्ट्रेट में चल रही उच्च स्तरीय बैठकों के बाद जिले के हजारों चतुर्थ वर्ग और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों में खुशी की लहर है। वर्षों से पदोन्नति, समयमान और नियमितीकरण का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को अब उम्मीद है कि छानबीन समिति (Scrutiny Committee) की रिपोर्ट आते ही उनके नियमितीकरण के आदेश जारी हो जाएंगे।
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