
रायपुर (चतुरपोस्ट समाचार)। छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के झंझट को समाप्त करने और पर्यावरण अनुकूल ईंधन आपूर्ति को गति देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ‘छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति 2026’ (Chhattisgarh City Gas Distribution Policy 2026) के क्रियान्वयन को लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगर निगम आयुक्तों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
विभाग द्वारा जारी इस आदेश के बाद अब प्रदेश के सभी शहरों, कस्बों, नए आवासीय लेआउट्स और मास्टर प्लान में पाइपलाइन प्राकृतिक गैस (PNG – Piped Natural Gas) और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG – Compressed Natural Gas) के इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल करना प्रशासनिक रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से शहरों में रहने वाले लाखों परिवारों को हर समय सस्ती, सुरक्षित और निर्बाध गैस आपूर्ति मिल सकेगी।
मास्टर प्लान और बिल्डर प्रोजेक्ट्स में अनिवार्य हुआ ‘गैस कॉरिडोर’ (Master Plan Formulation)
नगरीय प्रशासन विभाग के निर्देशानुसार, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और सभी विकास प्राधिकृतियों को अपने-अपने क्षेत्रों के मास्टर प्लान, स्मार्ट सिटी विकास योजनाओं और भवन निर्माण उप-नियमों (Building By-laws) में गैस पाइपलाइन नेटवर्क और सीएनजी स्टेशनों के लिए स्थान आरक्षित करने को कहा गया है।
अब किसी भी नई आवासीय कॉलोनी, व्यावसायिक परिसर या औद्योगिक पार्क के नक्शे को मंजूरी देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि वहां underground pipeline infrastructure के लिए अलग से कॉरिडोर उपलब्ध हो। इससे भविष्य में गैस पाइपलाइन बिछाने के नाम पर नई बनी सड़कों को दोबारा तोड़ने की नौबत नहीं आएगी और बुनियादी ढांचे का नुकसान भी नहीं होगा।
15 दिनों में देनी होगी अनुमति, लागू होगा ‘डीम्ड परमिशन’ का नियम (Deemed Approval Rules)
गैस कंपनियों द्वारा पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया में होने वाली प्रशासनिक देरी को खत्म करने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने सिंगल विंडो पोर्टल और टाइम-बाउंड अप्रूवल सिस्टम को लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सड़क खुदाई और पुनर्स्थापना के लिए तय की गई बैंक गारंटी (Road Restoration Rates)
शहरों के मुख्य मार्गों और अंदरूनी रास्तों को नुकसान से बचाने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने सड़क की चौड़ाई के आधार पर पुनर्स्थापना (Road Restoration) और बैंक गारंटी शुल्क (Bank Guarantee Fees) का स्पष्ट ढांचा तैयार किया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पाइपलाइन बिछाने के तुरंत बाद खुदाई वाले हिस्से की मरम्मत कर ली जाए।
त्रि-स्तरीय निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल (Three-Tier Safety & Governance)
नगरीय प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार, राज्य में गैस पाइपलाइन बिछाने और उसके रखरखाव में सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
- जिला स्तरीय निगरानी समिति: जिला कलेक्टर (District Collector) की अध्यक्षता में गठित समिति में नगरीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे, जो महीने में कम से कम एक बार काम की समीक्षा करेंगे।
- वार्षिक मॉक ड्रिल: आपातकालीन स्थिति (Emergency Response Plan) से निपटने के लिए हर शहरी क्षेत्र में प्रतिवर्ष अनिवार्य रूप से मॉक ड्रिल की जाएगी।
- पाइपलाइन मार्कर और बीमा: underground pipeline के ऊपर स्पष्ट मार्कर लगाए जाएंगे। साथ ही दुर्घटनाओं के वित्तीय जोखिम को कवर करने के लिए गैस वितरण कंपनियों का थर्ड पार्टी और लोक दायित्व बीमा (Public Liability Insurance) अनिवार्य होगा।
आम जनता को होंगे ये 4 बड़े फायदे (Public Utilities & Economic Benefits)
- लगातार और सस्ती गैस आपूर्ति: घरों में 24 घंटे रसोई गैस उपलब्ध रहेगी, जिससे सिलेंडर रिफिल कराने या बुकिंग खत्म होने का झंझट खत्म हो जाएगा।
- सड़कों का समय पर सुधार: नई नीति के तहत जमा होने वाली बैंक गारंटी से सड़कें खुदने के बाद उन्हें जल्द से जल्द पहले जैसी स्थिति में लाया जा सकेगा।
- शहरी प्रदूषण में कमी: वाहनों के लिए सीएनजी स्टेशन आसानी से उपलब्ध होने से डीजल-पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण स्वच्छ रहेगा।
- व्यावसायिक गतिविधियों को गति: होटलों, रेस्टोरेंटों और स्थानीय उद्योगों को सस्ती पीएनजी मिलने से शहरी अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
निगरानी समिति एवं टास्क फोर्स (त्रि-स्तरीय संरचना)
- राज्य स्तरीय निगरानी समिति:
- अध्यक्ष: मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन।
- नोडल अधिकारी: भारसाधक सचिव, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग।
- सदस्य सचिव: आयुक्त/संचालक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग।
- राज्य स्तरीय टास्क फोर्स:
- अध्यक्ष: संचालक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण।
- बैठक: साप्ताहिक आधार पर (ऑनलाइन/ऑफलाइन) समीक्षा।
- जिला स्तरीय निगरानी समिति:
- अध्यक्ष: संबंधित जिला कलेक्टर।
- सदस्य सचिव: खाद्य नियंत्रक / खाद्य अधिकारी।
- बैठक: माह में कम से कम एक बार।
निर्धारित प्रभार और बैंक गारंटी
- आवेदन शुल्क (Application Fee): रु. 1,000/- प्रति किलोमीटर (एकमुश्त)।
- अनुमति प्रभार (ROW Charge): रु. 1,000/- प्रति किलोमीटर। वाल्व चैंबर एवं अन्य सुविधाओं हेतु संबंधित भूमि पर लागू सर्किल रेट का 10%।
- खुदाई और पुनर्स्थापना (Dig & Restore) हेतु बैंक गारंटी (प्रति किमी):
- लोक निर्माण विभाग (PWD) सड़कें:
- बस्तर एवं सरगुजा संभाग: रु. 5,000/-
- § अन्य संभाग: रु. 25,000/-
- o नगरीय प्रशासन विभाग:
- 60 फीट एवं उससे अधिक चौड़ाई: रु. 50,000/-
- § 30 से 60 फीट चौड़ाई: रु. 25,000/-
- § 30 फीट से कम चौड़ाई: रु. 15,000/-
- o अन्य राज्य शासकीय विभाग: रु. 5,000/-
- लोक निर्माण विभाग (PWD) सड़कें:
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