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CG Power Company: आम उपभोक्ताओं को 745 करोड़ की राहत, पर अपने ही पेंशनरों से 8 करोड़ की वसूली पर मचा बवाल

रायपुर (चतुरपोस्ट समाचार)। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) में इन दिनों एक अजीबोगरीब और विरोधाभासी स्थिति देखने को मिल रही है। एक तरफ राज्य सरकार ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना’ के तहत आम जनता को करोड़ों रुपये की छूट देकर वाहवाही लूट रही है, वहीं दूसरी तरफ पावर कंपनी के करीब 1,920 सेवानिवृत्त इंजीनियरों, अधिकारियों और कर्मचारियों से 8 करोड़ रुपये से अधिक की एकतरफा वसूली (Electricity Recovery Controversy) की जा रही है।

विद्युत उपभोक्ता फोरम और लोकपाल (Electricity Ombudsman Orders) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पावर मैनेजमेंट द्वारा की जा रही इस कठोर कार्रवाई से प्रदेशभर के पेंशनरों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों का आरोप है कि विभागीय सॉफ्टवेयर और सिस्टम की गलतियों का खामियाजा अब बुढ़ापे में पेंशनरों को भुगतना पड़ रहा है।

क्या है पूरा विवाद? समझें 50% बनाम 25% छूट का गणित (The Core Issue)

पावर कंपनी के नियमों के अनुसार, सेवारत (नियमित) अधिकारियों और कर्मचारियों को बिजली बिल में 50 प्रतिशत की छूट मिलती है, जबकि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशनरों को 25 प्रतिशत छूट का प्रावधान है।

हालांकि, पिछले 10 वर्षों के दौरान विभागीय ‘सैप सिस्टम’ (SAP Billing System Fault) की तकनीकी खामी के कारण लगभग 1,920 पेंशनरों के खातों में 25% की जगह 50% छूट दर्ज होती रही। जब यह मामला जांच में सामने आया, तो प्रबंधन ने अपनी गलती सुधारने के बजाय पेंशनरों को सालों पुराने एरियर्स (Arrears Recovery Notice) थमा दिए और उनकी पेंशन से सीधे कटौती शुरू कर दी।

कोरबा में सबसे ज्यादा पेंशनर प्रभावित, रायपुर-दुर्ग भी पीछे नहीं (Region-Wise Affected Pensioners)

बिजली बिल में 25 प्रतिशत के बजाय नियमित कर्मचारियों की तरह 50 प्रतिशत छूट लेने वाले पेंशनरों की सूची में कोरबा वृत्त (Korba Circle) सबसे आगे है, जहाँ सर्वाधिक 406 पेंशनर प्रभावित हुए हैं।

इस प्रकार, प्रदेश के लगभग सभी सर्कलों में पावर कंपनी प्रबंधन ने एक साथ वसूली का शिकंजा कसा है। 1,920 पेंशनरों के खातों की पहचान कर एरियर्स के भारी-भरकम बिल थमा दिए गए हैं, जिससे बुढ़ापे में सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों के समक्ष बड़ा वित्तीय संकट खड़ा हो गया है।

समाधान योजना में आम जनता को राहत, पेंशनरों को क्यों नहीं? (Contrasting Policy Discrepancy)

एक तरफ पावर कंपनी ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना’ के जरिए आम उपभोक्ताओं पर मेहरबान है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी ने 8 लाख 61 हजार से अधिक उपभोक्ताओं के बकाये में से 745.61 करोड़ रुपये माफ (Bill Waiver Scheme) कर दिए हैं और बदले में मात्र 85.22 करोड़ रुपये की ही वसूली की है।

इतना ही नहीं, अदालतों में लंबित मुकदमों को वापस लेने पर भी ब्याज व अधिभार में छूट दी जा रही है। ऐसे में पेंशनर एसोसिएशन का सवाल है कि जब आम डिफॉल्टरों के करोड़ों रुपये माफ किए जा सकते हैं, तो जीवन भर कंपनी की सेवा करने वाले पेंशनरों को समाधान योजना का लाभ देकर राहत क्यों नहीं दी जा रही?

पेंशनर एसोसिएशन का कड़ा हमला: “यह हठधर्मिता और घोर अपमानजनक” (Pensioner Union Statement)

विद्युत मंडल पेंशनर एसोसिएशन  के महासचिव सुधीर नायक ने पावर कंपनी प्रबंधन के इस एकतरफा और अड़ियल रुख की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा:

एक तरफ पावर प्रबंधन ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना’ के तहत आम उपभोक्ताओं का 745.61 करोड़ रुपये का बकाया माफ कर मात्र 85.22 करोड़ रुपये की वसूली कर रहा है और वाहवाही व प्रशंसा लूटने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जीवन भर कंपनी को अपनी सेवाएं देने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। विभागीय ‘सैफ सिस्टम’ (SAP System) की तकनीकी गलती के कारण पिछले कई वर्षों से पेंशनरों को 50% छूट का लाभ मिल रहा था। इसमें पेंशनरों की कोई गलती नहीं थी। इसके बावजूद विद्युत उपभोक्ता फोरम और लोकपाल (Electricity Ombudsman) के स्पष्ट आदेशों को दरकिनार कर पेंशनरों से सालों पुराने बकाये की घोर अपमानजनक और निंदनीय वसूली की जा रही है।”

महासचिव सुधीर नायक ने चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन ने उपभोक्ता फोरम के आदेशों का पालन करते हुए पेंशनरों से की जा रही इस अन्यापूर्ण कटौती को तुरंत बंद नहीं किया और उन्हें समाधान योजना का लाभ प्रदान नहीं किया, तो एसोसिएशन पूरे प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

राजनैतिक श्रेय की होड़ में उपेक्षित हुए पूर्व कर्मचारी (Management Inefficiency)

पेंशनर नेताओं का स्पष्ट आरोप है कि पावर कंपनी प्रबंधन सिर्फ आंकड़ेबाजी करके शासन स्तर पर अपनी वाहवाही लूटने में व्यस्त है। 85 करोड़ की वसूली के बदले 745 करोड़ रुपये की छूट देना प्रबंधन की अक्षमता और नीतिगत राजनीतिकरण को दर्शाता है।

पेंशनरों ने चेतावनी दी है कि यदि उपभोक्ता लोकपाल के आदेशों का सम्मान करते हुए इस अन्यापूर्ण वसूली को तुरंत नहीं रोका गया और पेंशनरों को समाधान योजना का लाभ नहीं दिया गया, तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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