
रायपुर । छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव अब ‘एक्शन मोड’ में आ गए हैं। राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित सर्किट हाउस कन्वेंशन हॉल में सोमवार से शुरू हुई दो दिवसीय मैराथन समीक्षा बैठक के पहले दिन डिप्टी सीएम ने अधिकारियों की जमकर क्लास ली। पेयजल व्यवस्था में लापरवाही बरतने पर उन्होंने धमतरी के कार्यपालन अभियंता (EE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और संबंधित ठेकेदार पर पेनाल्टी लगाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
अगले साल तक ‘जीरो कंप्लेंट’ का लक्ष्य
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने साफ कर दिया है कि अगले वर्ष तक प्रदेश के सभी नगर निगमों में पेयजल से जुड़ी किसी भी समस्या का नामोनिशान नहीं रहना चाहिए। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा, “पेयजल की समस्या होने पर अब जवाबदेही तय की जाएगी। अगर जनता परेशान हुई, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।” उन्होंने अधिकारियों को अस्थाई पैचवर्क के बजाय पेयजल संकट का स्थायी समाधान (Permanent Solution) खोजने के निर्देश दिए।
नगर निगमों को दी ‘प्रेरणा’ बनने की चुनौती
बैठक में साव ने नगर निगमों के आयुक्तों और अभियंताओं को गुणवत्ता से समझौता न करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि नगर निगमों को इस तरह से काम करना चाहिए कि राज्य की नगर पालिकाएं और नगर पंचायतें उनसे प्रेरणा ले सकें। निकायों की छवि सुधारने के लिए अधिकारियों को सक्रियता दिखाने और शहरों की भविष्य की जरूरतों के मुताबिक कार्ययोजना (Action Plan) बनाने को कहा गया है।
“नगर निगम शहर का चेहरा होते हैं। निकायों की व्यवस्था और छवि सुधारने के लिए मैदानी स्तर पर सक्रियता अनिवार्य है। गुणवत्ताहीन काम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” – अरुण साव, उपमुख्यमंत्री
मैराथन बैठक: दो दिनों तक चलेगा समीक्षा का दौर
यह समीक्षा बैठक दो चरणों में आयोजित की जा रही है:
- पहला दिन (सोमवार): सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं के कामकाज की गहन समीक्षा की गई।
- दूसरा दिन (मंगलवार, 21 अप्रैल): कल संभागवार प्रदेश की सभी नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की जाएगी।
इन प्रमुख योजनाओं की हो रही है समीक्षा
बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. और संचालक आर. एक्का भी मौजूद रहे। इस दौरान साव ने निम्न बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की:
- राजस्व और भुगतान: राजस्व वसूली की स्थिति, बिजली बिलों का भुगतान और कर्मचारियों के वेतन की स्थिति।
- विकास कार्य: 15वें वित्त आयोग के कार्य, अधोसंरचना विकास, नालंदा परिसर और नगरोत्थान योजना।
- केन्द्रीय योजनाएं: अमृत मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि।
- तकनीकी पोर्टल: अटल मॉनिटरिंग पोर्टल और आई-गॉट (I-got) कर्मयोगी के माध्यम से कामकाज की निगरानी।
छत्तीसगढ़ में नगरीय विकास की दिशा में यह बैठक मील का पत्थर साबित हो सकती है। धमतरी मामले में हुई कार्रवाई ने पूरे विभाग में यह संदेश दे दिया है कि काम में लेटलतीफी और लापरवाही अब भारी पड़ेगी। कल होने वाली नगर पंचायतों की बैठक में भी कई बड़े फैसले लिए जाने की संभावना है।







