
कोरबा। छत्तीसगढ़ की सरकारी पावर कंपनियों में इन दिनों पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme – OPS) का मुद्दा पूरी तरह गरमाया हुआ है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी (Chhattisgarh State Power Company) के हजारों कर्मचारी, जो लंबे समय से इस योजना के लाभ की प्रतीक्षा कर रहे थे, अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। राज्य सरकार की सैद्धांतिक सहमति (In-principle approval) और आदेश जारी होने के बावजूद इसका क्रियान्वयन (Implementation) न हो पाना, कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष (Dissatisfaction) का कारण बना हुआ है।
क्यों हो रहा है विरोध?
हाल ही में विद्युत कंपनी के 12 प्रमुख अधिकारी-कर्मचारी संगठनों (Employee Unions) ने एकजुट होकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में ‘विद्युत अधिकारी-कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली अधिकार मंच’ का गठन किया गया है। मंच का स्पष्ट मानना है कि सरकार की सहमति के बाद भी यदि लाभ नहीं मिल रहा है, तो यह प्रशासनिक विफलता (Administrative failure) है। इससे कर्मचारियों में हताशा (Frustration) का माहौल है।
“शासन ने आदेश दे दिए हैं, लेकिन फाइलें फाइलों में ही दबी हुई हैं। कर्मचारी अपना भविष्य असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।” – कर्मचारी प्रतिनिधि।
48 सदस्यीय ‘केंद्रीय समिति’ का मास्टर प्लान
इस पूरे आंदोलन को गति देने और उसे एक संगठनात्मक रूप (Organized structure) देने के लिए, इंजीनियर मनोज वर्मा की अध्यक्षता में एक बड़ी रणनीति तैयार की गई है। बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि:
- केंद्रीय समिति का गठन: आंदोलन को धार देने के लिए 48 सदस्यीय केंद्रीय समिति (Central Committee) बनाई गई है।
- प्रतिनिधित्व: इस समिति में सभी 12 संगठनों के अध्यक्षों और महासचिवों के अलावा, प्रत्येक संगठन से ‘नई पेंशन प्रणाली’ (NPS) के दो-दो सदस्यों को शामिल किया गया है।
- समन्वय और रणनीति: यह समिति विभिन्न संगठनों के बीच आपसी समन्वय (Coordination) स्थापित करेगी और शासन-प्रशासन के स्तर पर लगातार संपर्क बनाए रखेगी।
आगे की रणनीति और CM से मुलाकात
आंदोलनरत कर्मचारियों का अगला कदम बेहद रणनीतिक (Strategic) है। मंच ने तय किया है कि एक प्रतिनिधिमंडल (Delegation) जल्द ही राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पावर कंपनीज के चेयरमैन सुबोध कुमार सिंह से मुलाकात करेगा।
इस मुलाकात के दौरान वे मुख्यमंत्री को एक ‘संयुक्त ज्ञापन’ (Joint Memorandum) सौंपेंगे। इस ज्ञापन के माध्यम से वे मांग करेंगे कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी प्रबंधन को पुरानी पेंशन योजना को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए कड़े निर्देश दिए जाएं। इसके अलावा, समिति के सदस्य कंपनी के अध्यक्ष सुबोध सिंह से भी मिलकर प्रशासनिक आदेश (Administrative Order) जारी करने की मांग करेंगे।
प्रमुख संगठन जो शामिल हैं:
इस लड़ाई में राज्य के सभी प्रमुख कर्मचारी संघ शामिल हैं, जो अपनी एकता का परिचय दे रहे हैं:
- इंजीनियर मनोज वर्मा (अभियंता संघ)
- श्रीकांत बड़गैया (पत्रापाधि संघ)
- डॉ. केबी बनसोडे (डॉक्टर्स एसोसिएशन)
- तेज प्रताप सिन्हा (महासंघ)
- आरसी छेत्री (फेडरेशन-01)
- अनिल द्विवेदी (जनता यूनियन)
- आरएल ध्रुव (आरक्षित वर्ग संघ)
- एनपी मिश्रा (फेडरेशन-56)
- श्रीकांत सिंह ठाकुर (एकता यूनियन)
- गोपाल कृष्ण राठी (ऑफिसर्स संघ)
- जीताराम खूंते (तकनीकी संघ)
- धर्मेंद्र (कार्यालयीन कर्मचारी संघ)
निष्कर्ष और भविष्य की दिशा
यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी के कर्मचारी अब कोई भी ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। यदि जल्द ही पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलता है, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी व्यापक (Massive) रूप ले सकता है।
क्या सरकार और कंपनी प्रबंधन इन कर्मचारियों की जायज मांगों को मानकर इस असंतोष को खत्म करेगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि पुरानी पेंशन बहाली (OPS Restoration) का मुद्दा अब सीधे मुख्यमंत्री के दरवाजे तक पहुंच चुका है।







