
नवा रायपुर: छत्तीसगढ़ के व्यापारिक जगत और उद्योगपतियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने करदाताओं, विशेष रूप से निर्यातकों (Exporters) और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले व्यवसायों के लिए नियमों को अधिक सरल, पारदर्शी और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के तहत ‘छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026′ (क्रमांक 12 सन् 2026) को जनसाधारण की सूचना के लिए आधिकारिक राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित कर दिया गया है। यह विधेयक वाणिज्यिक कर मंत्री (Commercial Tax Minister) ओ.पी. चौधरी ने हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सदन में पुरःस्थापित किया था।
केंद्र सरकार द्वारा वित्त अधिनियम, 2025 में किए गए नीतिगत संशोधनों की निरंतरता में राज्य सरकार का यह फैसला प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
Post-Supply Discount का सरलीकरण: अब एग्रीमेंट की झंझट खत्म
विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के कथन के अनुसार, इस संशोधन का सबसे बड़ा फोकस बिक्री के बाद मिलने वाली छूट (Post-Sale/Post-Supply Discount) के मूल्यांकन को सरल बनाना और व्यापारियों पर अनुपालन (Compliance) के बोझ को कम करना है।
विधेयक के माध्यम से मूल अधिनियम की धारा 15 और धारा 34 में महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं:
- करार (Agreement) की बाध्यता समाप्त: पहले आपूर्ति के बाद दी जाने वाली छूट को पहले से तय करार (Agreement) से संबद्ध करना अनिवार्य था। अब इस जटिल शर्त को स्पष्ट रूप से समाप्त किया जा रहा है।
- क्रेडिट नोट का सुगम रास्ता: अब यदि माल या सेवा प्राप्त करने वाले (Recipient) ने इनपुट कर प्रत्यय यानी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को उलट (Reverse) दिया है, तो प्रदायकर्ता आसानी से धारा 34 के तहत क्रेडिट नोट (जमापत्र) जारी कर सकेगा। इससे डीलरों और सप्लायर्स के बीच आपसी विवाद और कागजी औपचारिकताएं काफी कम हो जाएंगी।
इनवर्टेड ड्यूटी और निर्यातकों के लिए रिफंड प्रक्रिया में तेजी
व्यापारियों को नकदी संकट (Liquidity) से बचाने और उनके रिफंड दावों को तेजी से निपटाने के लिए धारा 54 में दो बेहद क्रांतिकारी संशोधन किए जा रहे हैं:
1. इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को अनंतिम रिफंड का लाभ (Section 54(6))
अब तक प्रोविजनल यानी अनंतिम आधार पर 90% रिफंड की सुविधा मुख्य रूप से शून्य अंकित (Zero-Rated) आपूर्तियों तक सीमित थी। लेकिन अब इस दायरे को विस्तारित करते हुए इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (Inverted Duty Structure – जहां इनपुट पर टैक्स ज्यादा और फाइनल प्रोडक्ट पर कम होता है) से उत्पन्न होने वाले रिफंड दावों को भी शामिल कर लिया गया है। इससे छोटे व मध्यम उद्योगों के पास वर्किंग कैपिटल की कमी नहीं होगी।
2. निर्यातकों के लिए हटी रिफंड की ऊपरी सीमा (Section 54(14))
अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, कर के भुगतान के साथ भारत से बाहर निर्यात (Export Outside India) किए गए माल की दशा में, रिफंड दावे की स्वीकृति के लिए लागू ऊपरी सीमा (Upper Limit) को हटाने का बड़ा प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश के बड़े निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में आसानी होगी।
विधेयक के मुख्य संशोधनों की एक नजर में तालिका (Key Amending Provisions)
| प्रभावित धारा (Amended Section) | मूल अधिनियम (Principal Act) | नया प्रस्तावित प्रावधान (Proposed Amendment) | सीधा प्रभाव (Direct Impact) |
| धारा 15 (3)(ख) | आपूर्ति के बाद छूट के लिए पूर्व करार और इनवॉइस लिंकेज अनिवार्य था। | प्राप्तकर्ता द्वारा ITC उलटने पर सप्लायर द्वारा जारी जमापत्र ही पर्याप्त होगा। | पोस्ट-सप्लाई डिस्काउंट का दावा करना बेहद सरल हुआ। |
| धारा 34 (1) | केवल इनवॉइस मूल्य में कमी या माल वापसी पर क्रेडिट नोट का प्रावधान था। | धारा 15(3)(ख) के तहत छूट मिलने की स्थिति में भी क्रेडिट नोट जोड़ने की अनुमति दी गई। | वाणिज्यिक लेन-देन में पारदर्शिता आएगी। |
| धारा 54 (6) व (14) | अनंतिम रिफंड केवल शून्य रेटेड माल के लिए था और रिफंड पर कुछ सीमाएं थीं। | इनवर्टेड ड्यूटी रिफंड को जोड़ा गया और टैक्स भुगतान वाले निर्यात के लिए ऊपरी सीमा हटाई गई। | निर्यातकों की रिफंड राशि जल्द बैंक खातों में आएगी। |
व्यापारिक जगत ने किया फैसले का स्वागत
छत्तीसगढ़ के चैंबर ऑफ कॉमर्स और औद्योगिक संगठनों ने वित्त व वाणिज्यिक कर मंत्री ओ.पी. चौधरी के इस कदम की सराहना की है। यह बिल राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। विभागीय जानकारों का मानना है कि इन संशोधनों से न केवल जीएसटी विसंगतियां दूर होंगी, बल्कि टैक्स चोरी पर लगाम कसने के साथ-साथ ईमानदारी से व्यापार करने वालों को प्रशासनिक प्रताड़ना से भी मुक्ति मिलेगी।







