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चिंताजनक: छत्तीसगढ़ में लड़कों से 5 गुना ज्‍यादा लड़कियां हो रहीं गायब, सामने आए चौकाने वाले आंकड़ें; जानें वजह

रायपुर: छत्तीसगढ़ में बच्चों के लापता होने (Missing Children) के मामलों को लेकर विधानसभा में एक बेहद डरावना और आंखें खोल देने वाला सच सामने आया है। विधायक श्री विक्रम मंडावी के एक अतारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में सूबे के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री (Deputy CM & Home Minister) श्री विजय शर्मा ने जो आधिकारिक आंकड़े पेश किए हैं, वे बेहद संवेदनशील हैं। इन आंकड़ों का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि छत्तीसगढ़ में लापता होने वाले बच्चों में लड़कों की तुलना में बालिकाओं (Girls) की संख्या कई गुना ज्यादा है।

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की “क्राइम इन इंडिया 2024” रिपोर्ट में बच्चों के गायब होने के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में 10वें स्थान पर है। लेकिन जब इन आंकड़ों का जिलावार विश्लेषण (Data Analysis) किया गया, तो पता चला कि गायब होने वाले बच्चों में लगभग 80 से 85 फीसदी संख्या सिर्फ लड़कियों की है।

रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में लड़कियों के गायब होने की बाढ़ (Shocking Statistics)

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के “मिशन वात्सल्य” पोर्टल (Mission Vatsalya Portal) पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों और संभागों में लड़कों और लड़कियों के गायब होने का अनुपात (Ratio) बेहद चौंकाने वाला है।

प्रदेश के तीन सबसे बड़े जिलों के आंकड़े इस भयावह स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं:

1. रायपुर जिला (Raipur District)

  • वर्ष 2024: जहां केवल 83 लड़के गायब हुए, वहीं उसके मुकाबले 457 लड़कियां लापता हो गईं।
  • वर्ष 2025: इस साल 119 लड़कों के मुकाबले रिकॉर्ड 513 लड़कियां गायब हुईं। पुलिस इनमें से केवल 350 बालिकाओं को ही बरामद कर सकी।
  • वर्ष 2026 (25 जून तक): महज 6 महीने के भीतर 66 लड़के और 288 लड़कियां लापता हो चुकी हैं।

2. बिलासपुर जिला (Bilaspur District)

  • वर्ष 2024: बिलासपुर में 45 लड़कों के मुकाबले 358 लड़कियां लापता हुईं।
  • वर्ष 2025: इस वर्ष भी आंकड़ा गंभीर रहा, जहां 67 लड़कों के सामने 359 लड़कियां गुम हुईं।
  • वर्ष 2026 (25 जून तक): चालू वर्ष में अब तक 44 लड़कों के मुकाबले 232 लड़कियां गायब हुई हैं, जिनमें से पुलिस अब तक केवल 111 लड़कियों को ही खोज पाई है।

3. दुर्ग जिला (Durg District)

  • वर्ष 2024: दुर्ग में 55 लड़कों के मुकाबले 246 लड़कियां लापता दर्ज की गईं।
  • वर्ष 2025: यह संख्या और बढ़कर 70 लड़कों के मुकाबले 273 लड़कियां हो गई।
  • वर्ष 2026 (25 जून तक): इस साल 25 जून तक 45 लड़के और 142 लड़कियां गुम हो चुकी हैं।

अन्य जिलों में भी लड़कों से कई गुना आगे लड़कियां

यह ट्रेंड सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी और ग्रामीण अंचलों वाले जिलों (Rural Districts) में भी लड़कियों के लापता होने की दर लड़कों से 5 से 10 गुना तक अधिक है:

जिला (District)2026 की अवधि (25 जून तक)गायब लड़के (Boys)गायब लड़कियां (Girls)
जांजगीर चांपा01.01.26 से 25.06.269119 (लगभग 13 गुना ज्यादा)
बलौदाबाजार01.01.26 से 25.06.2613140 (लगभग 10 गुना ज्यादा)
रायगढ़01.01.26 से 25.06.2618103 (लगभग 6 गुना ज्यादा)
महासमुंद01.01.26 से 25.06.261071 (लगभग 7 गुना ज्यादा)
कबीरधाम01.01.26 से 25.06.26676 (लगभग 12 गुना ज्यादा)

बड़ा सवाल: आखिर छत्तीसगढ़ में बेटियां इतनी बड़ी संख्या में क्यों गायब हो रही हैं? क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह है या फिर सामाजिक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं? पुलिस के सामने इन लापता बच्चियों (Missing Girls Recovery) को सुरक्षित ढूंढना एक सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

लड़कियां क्यों हो रही हैं ज्यादा लापता? सरकार ने बताई ये 5 वजहें (Root Causes)

गृह मंत्रालय की ओर से विधानसभा में बच्चों, विशेषकर किशोरियों के इस तरह अचानक लापता होने या घर छोड़ने के पीछे के संवेदनशील सामाजिक और मानसिक कारणों (Psychological & Social Factors) को साझा किया गया है:

  • सोशल मीडिया का भ्रामक जाल: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Networks) पर अनजान लोगों से दोस्ती और उनके झूठे वादों या झांसे (Digital Traps) में आकर घर छोड़ देना।
  • करियर व अच्छी नौकरी की चाह: पिछड़े या ग्रामीण क्षेत्रों से रोजगार (Employment Opportunities) या किसी अच्छी नौकरी के सुनहरे जाल में फंसकर बिना बताए बाहर चले जाना।
  • घरेलू कलह और डांट: पारिवारिक अशांति, घरेलू विवाद या माता-पिता की अत्यधिक डांट-फटकार से क्षुब्ध होकर बच्चियों का आत्मघाती कदम उठाना या घर छोड़ देना।
  • परीक्षा का मानसिक दबाव: पढ़ाई और बोर्ड परीक्षाओं का अत्यधिक मानसिक तनाव (Academic Stress) होना।
  • असफलता का डर: परीक्षा में कम नंबर आने या फेल होने के डर से लोकलाज के चलते घर से भाग जाना।

पुलिस प्रशासन और अभिभावकों को होना होगा मुस्तैद

गृह विभाग ने कहा है कि पुलिस मिसिंग बच्चों को फॉर्म (M) के जरिए ट्रैक कर उन्हें बरामद करने के लिए लगातार ऑपरेशन (Rescue Operations) चला रही है। लेकिन इस संकट से निपटने के लिए माता-पिता और अभिभावकों (Parents) को भी आगे आना होगा। बेटियों के साथ संवादहीनता को खत्म कर उनके मानसिक तनाव और सोशल मीडिया एक्टिविटी पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है ताकि उन्हें किसी भी प्रकार के जाल में फंसने से बचाया जा सके।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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