
रायपुर/भोपाल: छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के लाखों बुजुर्ग पेंशनरों के लिए एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। दोनों राज्यों के पेंशनरों को महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) मिलने में होने वाली सालों पुरानी प्रशासनिक अड़चन को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया है। मध्य प्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक ई-1077487/2026/नियम/04/वित्त के माध्यम से वर्तमान पारस्परिक सहमति की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है।
इस नए आदेश के बाद अब दोनों राज्यों के पेंशनरों को केंद्र सरकार के समान समय पर महंगाई राहत मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
अब नहीं काटने पड़ेंगे दूसरे राज्य के चक्कर, सीधे जारी होंगे आदेश
जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, प्रशासनिक सुगमता और बुजुर्ग पेंशनरों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित तीन बड़े बदलाव किए गए हैं:
- सहमति की अनिवार्यता समाप्त: अब छत्तीसगढ़ या मध्य प्रदेश में से किसी भी राज्य को अपने पेंशनरों के लिए महंगाई राहत (DR) घोषित करने के लिए दूसरे राज्य से एनओसी (NOC) या सहमति लेने की कोई जरूरत नहीं होगी।
- विधायी संशोधन की बाध्यता खत्म: पेंशनरों को देय महंगाई राहत में बढ़ोतरी करने के लिए अब किसी भी प्रकार के विधायी संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी। दोनों ही राज्य सरकारें सीधे अपने स्तर पर कार्यकारी आदेश (Executive Orders) जारी कर सकेंगी।
- वित्तीय भार की सूचना: दोनों राज्य महंगाई राहत में वृद्धि से संबंधित वित्तीय भार की जानकारी एक-दूसरे को पत्र के माध्यम से उपलब्ध कराएंगे। हालांकि, शर्त यह होगी कि कोई भी राज्य केंद्र सरकार द्वारा घोषित महंगाई राहत की दर से अधिक दर घोषित नहीं करेगा।
यह ऐतिहासिक संयुक्त आदेश छत्तीसगढ़ शासन के वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव और मध्य प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी के हस्ताक्षरों से जारी हुआ है।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के लंबे संघर्ष की जीत
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक श्री कमल वर्मा एवं पेंशनर्स फोरम के संयोजक श्री बी. पी. शर्मा ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि राज्य के पेंशनरों को महंगाई राहत में हो रहे लगातार विलंब और आर्थिक नुकसान को लेकर फेडरेशन लंबे समय से संघर्षरत था।
फेडरेशन का मजबूत तर्क: फेडरेशन ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) के नाम पर लागू इस सहमति की बाध्यता को खत्म करने की मांग की थी। फेडरेशन ने स्पष्ट किया था कि धारा 49(6) में महंगाई राहत स्वीकृत करने के लिए दूसरे राज्य की सहमति का कोई स्पष्ट प्रावधान ही नहीं था, फिर भी अधिकारी फाइलों को अटका कर रखते थे।
उत्तराखंड और झारखंड का दिया गया था हवाला
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने अपनी मांगों में इस बात को प्रमुखता से उठाया था कि मध्य प्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ के साथ ही देश के अन्य राज्य जैसे उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड और बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य का गठन हुआ था। लेकिन उत्तराखंड या झारखंड में पेंशनरों को महंगाई राहत देने के लिए क्रमशः उत्तर प्रदेश या बिहार की सहमति नहीं ली जाती। ऐसे में छत्तीसगढ़ के बुजुर्गों के साथ यह अलग और जटिल व्यवस्था अपनाना समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत था।
मुख्यमंत्रियों और वित्त मंत्री का जताया आभार
वर्षों पुरानी प्रशासनिक बाधा समाप्त होने और लाखों पेंशनरों को समय पर आर्थिक लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त होने पर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन एवं पेंशनर्स फोरम ने आभार व्यक्त किया है। उन्होंने इस संवेदनशील फैसले के लिए:
- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी
के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया है और दोनों राज्यों के वित्त विभाग के अधिकारियों के इस सकारात्मक रुख का दिल से स्वागत किया है।
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