
रायपुर: छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) में हुए बहुचर्चित उपकरण खरीदी घोटाले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई की है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज अपराध क्रमांक 05/2025 में आज न्यायालय के समक्ष चार आरोपियों के विरुद्ध पूरक चालान (Supplementary Charge Sheet) पेश किया गया है।
इन आरोपियों के नाम शामिल
इस पूरक चालान में मुख्य रूप से रिकॉडर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, श्री शारदा इंडस्ट्रीज के प्रोप्राईटर राकेश जैन, प्रिंस जैन (शशांक चोपड़ा का रिश्तेदार) और डायसिस इंडिया के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा का नाम शामिल है। जांच में पाया गया है कि इन सभी ने मिलकर निविदा प्रक्रिया को प्रभावित किया।
‘हमर लैब’ योजना में हुई धांधली
राज्य की आम जनता को मुफ्त जांच (Free Diagnostic Test) उपलब्ध कराने के लिए “हमर लैब” योजना शुरू की गई थी। इसके तहत जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए मेडिकल उपकरण एवं रिएजेंट्स खरीदे जाने थे। आरोप है कि इस निविदा प्रक्रिया (Tender Process) में ‘पुल टेण्डरिंग’ के माध्यम से मोक्षित कॉर्पोरेशन को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
फर्जी दस्तावेजों का खेल
विवेचना (Investigation) के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि तीनों फर्मों ने अपनी योग्यता (Eligibility) साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेजों (Fake Documents) का सहारा लिया। आरोपियों ने उत्पादक क्षमता और मेंटेनेंस से जुड़े झूठे रिकॉर्ड पेश किए, जिसमें प्रिंस कोचर ने समन्वय (Coordination) की मुख्य भूमिका निभाई।
कार्टलाइजेशन और तीन गुना अधिक दर
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि प्रतिस्पर्धा को खत्म करने के लिए फर्मों ने आपसी तालमेल यानी कार्टलाइजेशन (Cartelization) किया। डायसिस कंपनी के कुंजल शर्मा ने मोक्षित कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर रिएजेंट्स की दरें वास्तविक एमआरपी (MRP) से तीन गुना तक अधिक दिखाईं।
550 करोड़ की आर्थिक क्षति
सरकारी खजाने को चपत लगाते हुए मोक्षित कॉर्पोरेशन ने मनमानी दरों पर आपूर्ति (Supply) की। इस पूरे षडयंत्र के कारण शासन को लगभग 550 करोड़ रुपये की बड़ी आर्थिक क्षति (Financial Loss) हुई है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल 10 आरोपियों के विरुद्ध चालान पेश किया जा चुका है।
प्रकरण में साक्ष्यों (Evidence) के आधार पर आगे भी अन्य संबंधितों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।







