
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले पांच दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी (बढ़ोतरी लगभग ₹4 प्रति लीटर तक) हो चुकी है। वहीं, सरकार के दावों के बावजूद प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल पंप ड्राई हैं और जहां है, वहां कतारें देखी जा रही है।
पेट्रोल-डीजल संकट के कारण अब पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था (Power Supply System) के प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
इस आपातकालीन स्थिति (Emergency Situation) को भांपते हुए ‘छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन’ ने सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (Chief Minister Vishnu Deo Sai) को एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
यूनियन ने चेतावनी दी है कि ईंधन की राशनिंग के कारण बिजली कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे पूरे राज्य की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
बिजली कर्मचारियों की बड़ी चेतावनी: अत्यावश्यक सेवाएं हो सकती हैं ठप
यूनियन के प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी (Union President Anil Dwivedi) ने मुख्यमंत्री को भेजे गए अपने पत्र में बेहद कड़े शब्दों में जमीनी हकीकत को बयां किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्युत सेवा कोई सामान्य सेवा नहीं है, बल्कि यह Essential Services (अत्यावश्यक सेवाओं) के अंतर्गत आती है। बिजली सुधार, लाइनों का रखरखाव और लगातार विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए फील्ड कर्मचारियों को दिन-रात यानी 24 घंटे मुस्तैद रहना पड़ता है।
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अनिल द्विवेदी ने पत्र में लिखा, “विद्युत विभाग के तकनीकी और मैदानी कर्मचारियों को चौबीसों घंटे फील्ड में कार्य करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, जो कर्मचारी पावर हाउस (Power House) में कार्यरत हैं, उनकी शिफ्ट ड्यूटी (Shift Duty) होती है, जिसके कारण उनका लगातार आना-जाना बना रहता है। ऐसे में पेट्रोल पंपों पर ईंधन की सीमित मात्रा में बिक्री या लंबी लाइनों के कारण बिजली कर्मियों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है, जो राज्य के लिए एक बड़े संकट (Major Crisis) का संकेत है।”
सीमित वितरण व्यवस्था (Fuel Rationing) से बढ़ा बिजली संकट का खतरा
वर्तमान में प्रदेश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर ईंधन का वितरण सीमित मात्रा में किया जा रहा है। इस Restricted Distribution (सीमित वितरण) नीति के कारण बिजली विभाग की गाड़ियां और कर्मचारियों के निजी वाहन पेट्रोल पंपों पर घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं।
Transition words (परिणामस्वरूप): Consequently, स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि यदि किसी क्षेत्र में अचानक बिजली का ट्रांसफार्मर जल जाए या हाई-टेंशन लाइन टूट जाए, तो कर्मचारियों के पास मौके पर पहुंचने के लिए पर्याप्त ईंधन ही उपलब्ध नहीं है। यूनियन का कहना है कि बिजली व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए वाहनों की गतिशीलता (Mobility of Vehicles) सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, और ईंधन की कमी सीधे इस कड़ी पर प्रहार कर रही है।
विद्युत कर्मचारी यूनियन की मुख्यमंत्री से प्रमुख मांगें (Bullet Points)
यूनियन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने अपनी आपातकालीन योजना (Contingency Plan) रखते हुए निम्नलिखित मांगों को तुरंत लागू करने का आग्रह किया है:
- नियमित, संविदा और ठेका कर्मियों को प्राथमिकता (Priority to All Staff): विद्युत विभाग के अंतर्गत काम करने वाले चाहे वे स्थायी (Regular) कर्मचारी हों, संविदा (Contractual) पर हों या फिर आउटसोर्सिंग/ठेका कर्मी हों, उनके दोपहिया (Two-wheelers) और चारपहिया (Four-wheelers) वाहनों को पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जाए।
- बिना लाइन के ईंधन की व्यवस्था (No-Queue Fueling Service): बिजली सुधार, रखरखाव और आपातकालीन तकनीकी कार्यों में लगे विभागीय वाहनों को पेट्रोल पंपों पर बिना किसी कतार (Line) के, प्राथमिकता के आधार पर तुरंत ईंधन देने की विशेष व्यवस्था (Green Channel Supply) सुनिश्चित की जाए।
- कर्मचारियों के लिए विशेष श्रेणी (Special Category Tag): पावर हाउस, ग्रिड सब-स्टेशन और विद्युत आपूर्ति नियंत्रण कक्ष से जुड़े सभी कर्मचारियों को ‘निर्बाध ड्यूटी संचालन’ हेतु एक विशेष श्रेणी (Special Exemption Category) में रखा जाए, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में भी उनकी आवाजाही पर कोई असर न पड़े।
- ईंधन का रिजर्व स्टॉक सक्रिय करना (Activation of Fuel Reserve Stock): भविष्य में यदि ईंधन संकट और अधिक गहराता है, तो राज्य सरकार अपने आकस्मिक कोटे या रिजर्व स्टॉक (Strategic Fuel Reserve) से बिजली कर्मचारियों और विभागीय वाहनों के लिए ईंधन की उपलब्धता को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करे।
जनता को निर्बाध बिजली देना हमारी प्राथमिकता: यूनियन
छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया है कि प्रदेश की सम्मानित जनता को बिना किसी रुकावट के Continuous Power Supply (सतत बिजली) उपलब्ध कराना विभाग और सरकार दोनों की संयुक्त प्राथमिक जिम्मेदारी (Primary Responsibility) है।
यूनियन ने साफ किया है कि कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर भी 45 डिग्री से अधिक के तापमान में फील्ड में काम करने को तैयार हैं, लेकिन उनके वाहनों को चलाने के लिए पेट्रोल-डीजल जैसी आवश्यक सुविधाएं (Essential Amenities) उपलब्ध कराना पूरी तरह से शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कर्मचारियों की कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
रायपुर में आज के ईंधन के दाम (Current Fuel Rates in Raipur)
स्थानीय करों और वैट (VAT) के आधार पर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में कीमतों में आंशिक भिन्नता हो सकती है, लेकिन राजधानी रायपुर में आज की स्थिति बेहद चिंताजनक है:
- रायपुर में आज पेट्रोल की कीमत (Petrol Price in Raipur): ₹104.46 प्रति लीटर
- रायपुर में आज डीजल की कीमत (Diesel Price in Raipur): ₹97.51 प्रति लीटर
बढ़ती कीमतों और सीमित सप्लाई के इस दोहरे संकट (Twin Crisis) ने विद्युत विभाग के फील्ड स्टाफ के मासिक बजट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। ठेका और संविदा पर काम करने वाले कम वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए इतने महंगे दाम पर ईंधन खरीदना और वह भी लंबी लाइनों में लगकर ड्यूटी समय गंवाना, अब बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है।
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