कर्मचारी हलचल

Chhattisgarh Electricity बिजली कंपनी प्रबंधन को जगाना ढोल बजाएंगे कर्मचारी: चार सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी

कोरबा (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है। यूनियन की तरफ से कर्मचारियों एवं बेरोजगार युवाओं के हित में चलाया जा रहा प्रदेशव्यापी आंदोलन (Statewide Protest) अब अपने सबसे निर्णायक चरण (Decisive Phase) में प्रवेश कर गया है। संगठन का आरोप है कि राज्य में Chhattisgarh Electricity Crisis को खुद प्रबंधन द्वारा जन्म दिया जा रहा है क्योंकि स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे से अधिक पद वर्षों से खाली रखे गए हैं।

यूनियन ने अपनी चार सूत्रीय मांगों (4-Point Demands) को लेकर अब तक प्रदेश के 65 मंत्रियों, सांसदों व विधायकों को सीधे तौर पर ज्ञापन सौंपकर उनका नैतिक और नीतिगत समर्थन प्राप्त किया जा चुका है। कर्मचारियों के इस आक्रामक रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय (Positive Decision) नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में पूरे छत्तीसगढ़ की बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है, जिससे आम जनता को भीषण समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

6000 से अधिक पद रिक्त: स्वीकृत पदों का 60% हिस्सा खाली होने का दावा

जनता यूनियन के प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी ने प्रबंधन की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए मीडिया के सामने बेहद संवेदनशील आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की विभिन्न सरकारी विद्युत कंपनियों (Power Distribution, Generation, and Transmission Companies) में विभिन्न संवर्गों के 6 हजार से अधिक पद वर्तमान में पूरी तरह रिक्त पड़े हुए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह संख्या कुल स्वीकृत पदों का लगभग 60 प्रतिशत है। इसका सीधा अर्थ यह है कि वर्तमान में विभाग केवल 40 प्रतिशत कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है, जो सीधे तौर पर एक गंभीर प्रशासनिक विफलता (Administrative Failure) को दर्शाता है।

लगातार बढ़ते कार्यभार (Increasing Workload) और वर्क प्रेशर के बीच सीमित कर्मचारियों से दिन-रात काम लिया जा रहा है। अनिल द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि कर्मचारियों की कमी के कारण मैदानी स्तर पर कार्यरत तकनीकी अमले पर मानसिक एवं शारीरिक दबाव (Mental and Physical Pressure) खतरनाक स्तर तक बढ़ता जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप, विद्युत आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी अब उन गिने-चुने कर्मचारियों पर आ गई है, जो बिना किसी साप्ताहिक अवकाश या अतिरिक्त सुरक्षा उपकरणों के काम करने को मजबूर हैं।

जोखिमपूर्ण कार्य और बढ़ती दुर्घटनाएं: दांव पर लगी है बिजली कर्मियों की जान

इस विकट स्थिति का सबसे डरावना और दुखद पहलू यह है कि कर्मचारियों की कमी के चलते संविदा (Contractual) एवं ठेका कर्मियों को भी अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर अत्यधिक जोखिमपूर्ण कार्य (Hazardous and Risky Work) करना पड़ रहा है। तकनीकी कौशल और उचित प्रशिक्षण के अभाव में इन संविदा कर्मियों को हाई-वोल्टेज लाइनों पर चढ़ाया जा रहा है। इसके कारण हाल के महीनों में बिजली सब-स्टेशनों और ट्रांसफार्मर मरम्मत के दौरान होने वाली जानलेवा दुर्घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि (Spike in Accidents) दर्ज की गई है।

यूनियन के नेतृत्व ने अत्यंत भावुक और आक्रामक लहजे में कहा कि प्रबंधन की इस लापरवाही के कारण कई विभागीय और आउटसोर्स कर्मचारी असमय अपनी जान गंवा चुके हैं। कई परिवार पूरी तरह तबाह हो गए हैं, लेकिन प्रबंधन केवल मुआवजे का आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेता है। द्विवेदी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सरकार और शीर्ष प्रबंधन पिछले कई वर्षों से नियमित भर्ती प्रक्रिया (Regular Recruitment Process) को जानबूझकर टाल रहे हैं। ऐसा करके वे पूरी विद्युत व्यवस्था को एक सोची-समझी रणनीति के तहत पूरी तरह ‘ठेका आधारित मॉडल’ (Contract-based Model) की ओर धकेल रहे हैं, जो अंततः निजीकरण का ही एक गुप्त रूप है।

🔴 विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन की प्रमुख 4-सूत्रीय मांगें (Key Operational Demands):

  • पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली: सभी संवर्ग के विद्युत अधिकारियों और कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) को तत्काल पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
  • संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण: सालों से अल्प मानदेय पर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाले समस्त संविदा और अनियमित कर्मियों का बिना शर्त नियमितीकरण (Regularization) हो।
  • 6000 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती: Chhattisgarh Electricity Crisis को समाप्त करने के लिए रिक्त पड़े 60 प्रतिशत पदों पर तत्काल पारदर्शी एवं सीधी भर्ती प्रक्रिया (Direct Recruitment) शुरू की जाए।
  • बेहतर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएं: मैदानी क्षेत्र में चौबीसों घंटे काम करने वाले सभी श्रेणी के कर्मचारियों एवं उनके आश्रित परिवारों के लिए कैशलेस इलाज और उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं (Medical Facilities) अनिवार्य रूप से प्रदान की जाएं।

ढोल बजाओ, प्रबंधन जगाओअभियान: 5 से 12 जून तक प्रदेशव्यापी शंखनाद

जनता यूनियन के प्रांतीय महासचिव अजय बाबर ने आंदोलन की आगामी रणनीतियों का विवरण साझा करते हुए बताया कि जनप्रतिनिधियों तक कर्मचारियों की बुलंद आवाज पहुंचाने के बाद, संगठन अब आंदोलन के द्वितीय चरण (Second Phase of Protest) में पूरी ताकत के साथ प्रवेश कर रहा है। इसके तहत आगामी 5 जून से 12 जून 2026 तक पूरे प्रदेश में एक अनोखा और आक्रामक आंदोलन चलाया जाएगा, जिसे ढोल बजाओ, प्रबंधन जगाओअभियान (Dhol Bajao, Prabhandhan Jagao Campaign) का नाम दिया गया है।

इस सप्ताह भर चलने वाले अभियान के दौरान प्रदेश के सभी क्षेत्रीय मुख्यालयों (Regional Headquarters) में मुख्य अभियंताओं (Chief Engineers) एवं कार्यपालक निदेशकों (Executive Directors) के कार्यालयों के समक्ष भारी संख्या में कर्मचारी एकत्रित होंगे। ये कर्मचारी दफ्तरों के ठीक सामने खड़े होकर पारंपरिक ढोल बजाकर, गगनभेदी नारे लगाकर तथा कड़े शब्दों में लिखित ज्ञापन सौंपकर शीर्ष प्रबंधन (Top Management) का ध्यान कर्मचारियों की सुलगती समस्याओं की ओर आकर्षित करेंगे। यूनियन का स्पष्ट कहना है कि यदि बहरे हो चुके प्रबंधन ने ढोल की आवाज सुनकर भी आंखें नहीं खोलीं, तो इसके बाद अगला कदम ‘काम बंद करो’ आंदोलन होगा।

क्षेत्रीय स्तर पर मोर्चाबंदी: रीज़नवार प्रभारियों की नियुक्तियां पूरी

आंदोलन को जमीनी स्तर पर अचूक और पूरी तरह संगठित बनाने के लिए जनता यूनियन ने अपनी सांगठनिक मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश को 10 प्रमुख क्षेत्रों (Zones/Regions) में विभाजित किया गया है और प्रत्येक क्षेत्र के लिए वरिष्ठ और अनुभवी पदाधिकारियों को प्रभारी नियुक्त (Appointment of Regional In-charges) किया गया है। यह रणनीति सुनिश्चित करेगी कि दूरदराज के सब-स्टेशनों पर तैनात कर्मचारी भी इस आंदोलन का हिस्सा बन सकें।

क्र.निर्धारित क्षेत्र (Region)नियुक्त वरिष्ठ प्रभारियों के नाम (Appointed In-charges)मुख्य जिम्मेदारी (Key Responsibility)
1कोरबा पश्चिम क्षेत्रसम्मेलन श्रीवास एवं गेंदाराम साहूऊर्जा संयंत्रों और उत्पादन इकाइयों में आंदोलन का नेतृत्व
2कोरबा पूर्व क्षेत्रटीपी गुप्ता व उदय राठौरशहरी एवं ग्रामीण वितरण नेटवर्क के कर्मियों को एकजुट करना
3मड़वा (जांजगीर-चांपा) क्षेत्ररवि साइमन व राहुल धुरंधरमड़वा थर्मल पावर प्लांट के समस्त स्टाफ का समन्वय

निजीकरण और अधिकारों पर कुठाराघात के खिलाफ आर-पार की लड़ाई

इंटरव्यू के अंत में प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी ने दोटूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जनता यूनियन किसी भी स्थिति में विद्युत कंपनियों के निजीकरण (Privatization) अथवा कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों पर किसी भी प्रकार के कुठाराघात को स्वीकार नहीं करेगी। वर्तमान सरकार की नीतियों से ऐसा प्रतीत होता है कि वे कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए इस सार्वजनिक उपक्रम को कमजोर कर रहे हैं। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई केवल उनके अस्तित्व की नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के युवाओं के रोजगार और प्रदेश की जनता को मिलने वाली सस्ती बिजली को बचाने की भी है। इसके खिलाफ उनका यह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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