कर्मचारी हलचल

छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को समय पर नहीं मिल रहा DR का लाभ, महंगाई राहत में देरी पर भड़का महासंघ, सरकार से लगाई गुहार

रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों बुजुर्ग नागरिकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ (Bharatiya Rajya Pensioners Mahasangh) ने राज्य के पेंशनर्स एवं परिवार पेंशनर्स (Family Pensioners) को समय पर महंगाई राहत यानी Dearness Relief (DR) का लाभ न मिलने पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।

महासंघ का स्पष्ट रूप से यह मानना है कि सरकारी कर्मचारियों के हितों से जुड़े हुए महत्वपूर्ण मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों (Employee Organizations) की वर्तमान उदासीनता का खामियाजा केवल सक्रिय कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि सबसे अधिक सेवानिवृत्त पेंशनर्स को भुगतना पड़ रहा है।

कर्मचारी संगठनों की आंतरिक कलह और उदासीनता

  • आपसी मतभेद: छत्तीसगढ़ के कर्मचारी संगठन आज कई अलग-अलग गुटों में बंटे हुए हैं, जिसके कारण राज्य स्तर पर कोई भी दमदार आंदोलन या विरोध प्रदर्शन संभव नहीं हो पा रहा है।
  • मंत्रालय कर्मचारियों की स्थिति: मंत्रालय स्तर पर संगठन निर्गुट होने के बावजूद सरकार को दबाव में लाने के लिए कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाते हैं। वे केवल अपनी पदोन्नति (Promotion) और रुतबे तक ही सीमित रहना पसंद करते हैं।
  • संगठनों का बिखराव: पेंशनर्स संगठन भी वर्तमान में पूरी तरह बिखरे हुए हैं, जिससे सरकार पर सीधा दबाव नहीं बन पाता है, जबकि एकजुट कर्मचारी और अधिकारी मिलकर सरकार को गंभीर संदेश दे सकते हैं।

जनवरी 2026 से देय डीआर की प्रतीक्षा

प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव (State President Virendra Namdev) ने एक तीखा बयान देते हुए कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2026 से महंगाई राहत की घोषणा किए जाने के बावजूद, छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स आज भी इसके औपचारिक आदेश और लाभ की प्रतीक्षा में हैं।

लगातार बढ़ती महंगाई (Inflation), स्वास्थ्य सेवाओं (Healthcare Services) पर बढ़ते भारी खर्च और दैनिक आवश्यकताओं की कीमतों में उछाल ने वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक कमर तोड़ दी है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में समय पर डीआर का भुगतान केवल उनकी एक साधारण मांग नहीं, बल्कि उनका कानूनी और वैधानिक अधिकार (Statutory Right) है।

पड़ोसी राज्यों से तुलना और न्यायसंगत व्यवहार

वीरेन्द्र नामदेव ने आगे कहा कि यह बहुत बड़ी विडंबना है कि अधिकांश पेंशनर्स की वित्तीय स्थिति ऐसी बिल्कुल नहीं होती कि वे अपने वैध एरियर (Arrears) के लिए महीनों या वर्षों तक लंबा इंतजार कर सकें।

इसके विपरीत, यदि हम पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश की बात करें, तो मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) का एरियर भी समय पर प्रदान कर रही है। वहीं दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ के कर्मचारी और पेंशनर्स अभी तक महंगाई राहत के पहले आदेश के लिए भी तरस रहे हैं। यह स्थिति पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और अन्यायपूर्ण है।

प्रांतीय नेतृत्व की दो टूक मांग

महासंघ के प्रदेश महामंत्री द्वय अनिल गोल्हानी (Anil Golhani) एवं प्रवीन कुमार त्रिवेदी (Praveen Kumar Trivedi) ने संयुक्त रूप से कहा कि जब कर्मचारी संगठनों को अपने साथियों के हितों की मजबूत पैरवी करनी चाहिए थी, तब उनकी चुप्पी का सीधा नकारात्मक प्रभाव पेंशनर्स पर पड़ रहा है।

पेंशनर्स भी इसी प्रशासनिक व्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा रहे हैं, इसलिए उन्हें भी सेवारत कर्मचारियों के समान ही समय पर महंगाई राहत और अन्य वित्तीय लाभ मिलने चाहिए।

सरकार से प्रमुख मांगें

भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने राज्य के माननीय मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के सामने अपनी कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • तत्काल आदेश जारी हो: केंद्र सरकार के अनुरूप जनवरी 2026 से देय महंगाई राहत (DR) को तत्काल प्रभाव से स्वीकृत किया जाए।
  • बकाया राशि का भुगतान: पेंशनर्स के रुके हुए एरियर और बकाया राशि का भुगतान शीघ्र अति शीघ्र सुनिश्चित किया जाए।
  • एक साथ हों आदेश: भविष्य में डीए और डीआर (DA/DR) के आदेश हमेशा कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक साथ ही जारी किए जाएं, ताकि वरिष्ठ नागरिकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

“पेंशन बख्शीश नहीं, हमारा अधिकार है”

अंत में, महासंघ के संभागीय अध्यक्षों—आर.एन. ताटी (बस्तर), राजेन्द्र कश्यप (बिलासपुर), बी.एल. गजपाल (दुर्ग), शैलेन्द्र सिन्हा (रायपुर) तथा गुरुचरण सिंह (अंबिकापुर)—ने एक स्वर में दो टूक कहा है कि “पेंशन कोई भीख या बख्शीश नहीं, बल्कि हमारा मौलिक अधिकार है।”

पेंशनर्स के इन संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन लगातार संघर्ष के पथ पर अग्रसर रहेगा। यदि सरकार ने जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आने वाले समय में एक व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन (Democratic Movement) की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।

Also Read कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, 8वें वेतन आयोग के दौरों का नया शेड्यूल जारी, देखें तारीखें

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
Back to top button