
Korba Power Plant Black Start रायपुर । ´अंतरराज्यीय ग्रिड ठप होने या किसी बड़े विद्युत संकट जैसी गंभीर आपात स्थितियों से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ में एक बहुत बड़ा और सफल अभ्यास किया गया है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ (Chhattisgarh State Power Companies) की तरफ से बिजली व्यवस्था को तुरंत बहाल करने की तैयारियों का परीक्षण करने के लिए एक सफल ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल (Black Start Mock Drill) का आयोजन किया गया।
इस मॉक ड्रिल के दौरान बांगो जल विद्युत गृह (Bango Hydro Power Station) के टरबाइन से तत्काल बिजली का उत्पादन किया गया। इसके बाद स्टार्ट-अप पावर (Start-up Power) को कोयला आधारित ताप विद्युत गृहों तक मात्र 32 मिनट के भीतर ही सफलतापूर्वक पहुंचा दिया गया। वहीं, इस पूरी ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन (Grid Synchronization) की प्रक्रिया को लगभग 41 मिनट में पूरी तरह से पूर्ण कर लिया गया।

कंट्रोल रूम से लगातार मॉनिटरिंग
- एसटीएलडीसी (SLDC) की भूमिका: इस महत्वपूर्ण अभ्यास के दौरान ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला (Rajesh Kumar Shukla) डंगनिया मुख्यालय स्थित स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर में विशेष रूप से उपस्थित रहे।
- सीधी निगरानी: उन्होंने कंट्रोल रूम से ही पूरी प्रक्रिया की पल-पल की लगातार मॉनिटरिंग की।
- टीम वर्क: इस सफल अभ्यास में ट्रांसमिशन, जनरेशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन—तीनों प्रमुख कंपनियों के कुशल इंजीनियरों और तकनीकी कर्मियों ने पूरी तरह से समन्वित रूप से भाग लिया।
कैसे काम करती है ब्लैक स्टार्ट प्रक्रिया?
ड्रिल के सबसे पहले चरण के तहत हसदेव, हसदेव-बांगो, जमनीपाली तथा कोरबा पूर्व के चयनित विद्युत तंत्र को एक-दूसरे से पृथक करके एक आइलैंडेड सब-सिस्टम (Islanded Sub-system) तैयार किया गया। इसके बाद इस विशेष सब-सिस्टम पर नियंत्रित रूप से उत्पादन और विद्युत भार को कम करते हुए इसे पूर्ण ब्लैकआउट (Total Blackout) की कृत्रिम स्थिति में लाया गया।
इसके पश्चात, बांगो जल विद्युत गृह में पहले से उपलब्ध डीजल जनरेटर सेट की सहायता से इकाई क्रमांक-1 को प्रारंभ किया गया और सफलतापूर्वक सिंक्रोनाइज किया गया। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से हसदेव और जमनीपाली से होते हुए कोरबा पूर्व तक स्टार्ट-अप विद्युत आपूर्ति को धीरे-धीरे बहाल किया गया।
कोरबा पश्चिम तक विद्युत आपूर्ति का विस्तार
मॉक ड्रिल के अगले और बेहद महत्वपूर्ण चरण में 160 एमवीए ट्रांसफार्मर (160 MVA Transformer) के माध्यम से 220 केवी प्रणाली को पूरी तरह से ऊर्जीकृत किया गया। इसके जरिए कोरबा पश्चिम तक स्टार्ट-अप विद्युत आपूर्ति का दायरा बढ़ाया गया।
निर्धारित क्रम और तकनीकी मानकों के अनुसार जमनीपाली उपकेंद्र पर विद्युत भार (Electrical Load) जोड़ा गया और उसके बिल्कुल अनुरूप बांगो इकाई क्रमांक-1 का उत्पादन भी बढ़ाया गया।

मुख्य ग्रिड के साथ सफल सिंक्रोनाइजेशन
इस अभ्यास के अंतिम चरण में आइलैंडेड सब-सिस्टम का मुख्य ग्रिड के साथ बहुत ही सफलतापूर्वक सिंक्रोनाइजेशन किया गया। इसके साथ ही सभी विद्युत उपकरणों पर सामान्य विद्युत व्यवस्था को सुचारू रूप से पुनः स्थापित कर दिया गया।
- कुल समय: सिंक्रोनाइजेशन की इस पूरी जटिल प्रक्रिया में लगभग 41 मिनट का समय लगा।
- रिकॉर्ड समय: बांगो जल विद्युत संयंत्र से लेकर कोरबा पावर प्लांट तक स्टार्ट-अप विद्युत आपूर्ति महज 32 मिनट के रिकॉर्ड समय में सफलतापूर्वक पहुंचा दी गई।
बांगो संयंत्र की रणनीतिक और तकनीकी विशेषता
आपको बता दें कि बांगो जल विद्युत संयंत्र पूरे प्रदेश का एकमात्र ऐसा संयंत्र है जो ब्लैक स्टार्ट सक्षम (Black Start Capable) जल विद्युत संयंत्र है।
- स्थापित क्षमता: इस संयंत्र की कुल स्थापित क्षमता 3×40 मेगावाट है।
- संकट मोचन भूमिका: जब कभी भी कोई बड़ा ग्रिड व्यवधान या फिर पूर्ण ब्लैकआउट जैसी आपात स्थिति आती है, तो यही एकमात्र संयंत्र अन्य सभी उत्पादन इकाइयों के पुनर्संचालन (Restart) के लिए आवश्यक स्टार्ट-अप पावर प्रदान करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उपस्थित प्रमुख अधिकारीगण
इस सफल मॉक ड्रिल के अवसर पर जनरेशन कंपनी के कार्यपालक निदेशक श्री सी.एल. नेताम (C. L. Netam), स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर की मुख्य अभियंता श्रीमती शारदा सोनवानी (Sharda Sonwani), अधीक्षण अभियंता श्री संजय चौधरी (Sanjay Chaudhary) तथा श्री अभिषेक जैन (Abhishek Jain) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे।
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