
रायपुर (Chaturpost): छत्तीसगढ़ में अब रसोई गैस (Cooking Gas) की पुरानी व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव (Revolutionary Change) होने जा रहा है। राज्य सरकार की सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) योजना के तहत अब आपको भारी-भरकम सिलेंडर के खत्म होने का इंतज़ार नहीं करना होगा। अब सीधे पाइपलाइन (Pipeline) के जरिए आपके किचन तक गैस पहुंचेगी।
मुख्य सचिव (Chief Secretary) ने इस प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को काम में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में तैयार की गई नई नीति (New Policy) को 15 अप्रैल को होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है।
कैसे काम करेगी यह आधुनिक व्यवस्था? (Modern System)
इस योजना के तहत प्राकृतिक गैस (PNG) को मुख्य ट्रांसपोर्ट पाइपलाइन से जोड़ा जाएगा। इसके बाद शहरों में बिछाए गए पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए इसे आपकी कॉलोनियों और घरों तक पहुंचाया जाएगा।
- आपके किचन में एक मीटर (Meter) लगेगा।
- गैस की सप्लाई प्रेशर रेगुलेटर (Pressure Regulator) के जरिए सुरक्षित तरीके से होगी।
- जितनी गैस आप जलाएंगे, उतना ही बिल देना होगा।
2030 तक 42 लाख घरों का लक्ष्य (Big Target)
छत्तीसगढ़ सरकार ने इस योजना को लेकर एक बड़ा विजन (Vision) तैयार किया है। राज्य को 7 भौगोलिक क्षेत्रों (Geographical Areas) में बांटा गया है:
- 42 लाख घरों को साल 2030 तक पीएनजी कनेक्शन देने का लक्ष्य है।
- 1100 CNG स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिससे वाहनों को भी सस्ता और स्वच्छ ईंधन मिलेगा।
- परिवहन क्षेत्र में Eco-friendly फ्यूल को बढ़ावा मिलेगा।
सिलेंडर से 30% सस्ती और बेहद सुरक्षित
विशेषज्ञों के अनुसार, Natural Gas न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह आपकी जेब पर भी बोझ कम करेगी।
- बचत (Saving): यह गैस मौजूदा एलपीजी सिलेंडर के मुकाबले लगभग 30 प्रतिशत सस्ती होगी।
- निर्बाध आपूर्ति (Uninterrupted Supply): गैस खत्म होने का डर नहीं रहेगा, सप्लाई 24 घंटे चालू रहेगी।
- पारदर्शिता (Transparency): मीटर आधारित बिलिंग होने से कोई अतिरिक्त शुल्क या चोरी का डर नहीं होगा।
- सुरक्षा (Safety): पीएनजी को एलपीजी से अधिक सुरक्षित माना जाता है क्योंकि यह हवा से हल्की होती है।
सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेगी मंजूरी
परियोजना में देरी न हो, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम (Single Window System) लागू किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि रोड कटिंग और राइट ऑफ वे (Right of Way) जैसी तकनीकी स्वीकृतियां समय पर दी जाएं। अब नए भवनों, अस्पतालों और संस्थानों के नक्शों में भी PNG इंफ्रास्ट्रक्चर को अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ में इस नेटवर्क के विस्तार से न केवल शहरी जीवन आसान होगा, बल्कि उद्योगों को भी सस्ता ईंधन (Cheap Fuel) मिलेगा, जिससे राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कैसे काम करता है पीएनजी” (How PNG System Works)
1. स्रोत से मुख्य पाइपलाइन (Source to Transmission)
सबसे पहले प्राकृतिक गैस को जमीन के अंदर से निकालकर साफ किया जाता है। इसके बाद, इसे हाई-प्रेशर वाली ट्रांसमिशन पाइपलाइन के जरिए अलग-अलग राज्यों और शहरों तक पहुँचाया जाता है।
2. सिटी गेट स्टेशन (City Gate Station – CGS)
शहर की सीमा पर एक मुख्य स्टेशन होता है जिसे ‘सिटी गेट स्टेशन’ कहते हैं। यहाँ दो मुख्य काम होते हैं:
- प्रेशर को कम करना: मुख्य पाइपलाइन में प्रेशर बहुत ज्यादा होता है, यहाँ उसे शहर में वितरण के लायक बनाया जाता है।
- गंध मिलाना (Odourization): प्राकृतिक गैस की अपनी कोई गंध नहीं होती। सुरक्षा के लिए इसमें एक खास गंध वाला केमिकल (Mercaptan) मिलाया जाता है, ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके।
3. वितरण नेटवर्क (Distribution Network)
CGS से गैस शहर के अंदर बिछाई गई स्टील या पॉलिथीन (MDPE) की पाइपलाइनों में जाती है।
- ये पाइपलाइनें सड़क के किनारे जमीन के काफी नीचे दबी होती हैं।
- हर कॉलोनी या वार्ड के लिए छोटे डिस्ट्रिक्ट रेगुलेटिंग स्टेशन (DRS) लगे होते हैं जो दबाव को और कम करते हैं।
4. घरेलू कनेक्शन (Domestic Connection)
जब पाइपलाइन आपकी बिल्डिंग या घर तक पहुँचती है, तो इसके तीन मुख्य भाग होते हैं:
- राइजर (Riser): जमीन से ऊपर की तरफ उठने वाली पाइप।
- रेगुलेटर और मीटर (Regulator & Meter): घर के बाहर एक रेगुलेटर लगाया जाता है जो गैस के दबाव को बहुत कम (हवा के दबाव जैसा) कर देता है। इसके साथ ही एक गैस मीटर लगा होता है जो आपकी खपत को रिकॉर्ड करता है।
- किचन पाइपिंग: मीटर से एक छोटी पाइप आपके किचन में चूल्हे तक जाती है।
एक्सप्लेनर: कैसे काम करता है पीएनजी (How PNG System Works)
प्राकृतिक गैस (Natural Gas) को आपके किचन तक पहुँचाने की प्रक्रिया बहुत ही सुरक्षित और हाई-टेक है। आइए जानते हैं यह सिस्टम कैसे काम करता है:
1. स्रोत से मुख्य पाइपलाइन (Source to Transmission)
सबसे पहले प्राकृतिक गैस को जमीन के अंदर से निकालकर रिफाइन किया जाता है। इसके बाद, इसे हाई-प्रेशर वाली ट्रांसमिशन पाइपलाइन (Transmission Pipeline) के जरिए राज्यों और शहरों तक पहुँचाया जाता है।
2. सिटी गेट स्टेशन (City Gate Station – CGS)
शहर की सीमा पर स्थित इस मुख्य स्टेशन पर दो महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं होती हैं:
- प्रेशर कंट्रोल (Pressure Control): यहाँ गैस के उच्च दबाव को शहर में वितरण के लायक कम किया जाता है।
- गंध मिलाना (Odourization): प्राकृतिक गैस गंधहीन होती है। सुरक्षा के लिए इसमें Mercaptan नामक केमिकल मिलाया जाता है ताकि लीकेज (Leakage) होने पर गंध से पता चल सके।
3. वितरण नेटवर्क (Distribution Network)
गैस शहर के भीतर स्टील या MDPE (Medium Density Polyethylene) पाइपलाइनों के जरिए बहती है। सड़क किनारे जमीन के नीचे दबे ये नेटवर्क कॉलोनी और वार्ड स्तर पर लगे DRS (District Regulating Station) से जुड़ते हैं, जो गैस के दबाव को और सुरक्षित स्तर तक घटाते हैं।
4. घरेलू कनेक्शन (Domestic Connection)
आपके घर तक गैस पहुँचने के तीन मुख्य हिस्से होते हैं:
- राइजर (Riser): जमीन से ऊपर आने वाली मुख्य पाइप।
- रेगुलेटर और मीटर (Regulator & Meter): घर के बाहर लगा मीटर आपकी खपत (Consumption) को रिकॉर्ड करता है और रेगुलेटर दबाव को चूल्हे के अनुकूल बनाता है।
- किचन पाइपिंग: मीटर से एक लचीली पाइप सीधे आपके गैस चूल्हे (Gas Stove) से जुड़ती है।
पीएनजी की खास विशेषताएं (Key Features)
- ✅ सुरक्षा वाल्व (Isolation Valve): घर में अलग-अलग वाल्व होते हैं जिन्हें आप ज़रूरत पड़ने पर बंद कर सकते हैं।
- ✅ हल्की गैस (Lightweight): पीएनजी हवा से हल्की होती है, इसलिए लीक होने पर यह एलपीजी की तरह नीचे जमा नहीं होती, बल्कि हवा में उड़ जाती है।
- ✅ स्मार्ट मॉनिटरिंग: पूरे नेटवर्क की निगरानी SCADA सिस्टम द्वारा कंट्रोल रूम से की जाती है।







