
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनियों में पुरानी पेंशन योजना OPS लागू करने की मांग तेज हो गई है। कर्मचारी संगठन ओपीएस की बहाली की मांग को लेकर आर-पार के मूड में आ गए हैं। वहीं दूसरी तरफ chaturpost.com की पड़ताल (Exclusive Investigation) में यह साफ हो गया है कि इस मांग पर बहुत पहले ही मुहर लग चुकी है।
कर्मचारियों ने बनाया संयुक्त मोर्चा (Joint Organization)
आपको बता दें कि पिछले लंबे समय से अपनी इस मांग को लेकर अलग-अलग स्तर पर आवाज उठा रहे बिजली कर्मियों ने अब एकजुट होने का फैसला किया है। अब तक अलग-अलग संघर्ष कर रहे कर्मचारियों और अधिकारियों ने इसके लिए एक मजबूत संयुक्त संगठन (Joint Front) बना लिया है।
इस नवगठित मोर्चे में बिजली कंपनी के छोटे-बड़े करीब 12 प्रमुख कर्मचारी संगठन शामिल हैं। कर्मचारियों का यह संयुक्त मोर्चा अब सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी में था, लेकिन इसी बीच सामने आए सरकारी दस्तावेजों ने पूरी कहानी ही बदलकर रख दी है।
साल 2023 में ही मिल चुकी है कैबिनेट की हरी झंडी (Cabinet Approval 2023)
chaturpost.com के हाथ लगे आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, पावर कंपनीज में ओपीएस बहाल करने की मंजूरी साल 2023 में ही कैबिनेट से मिल चुकी है। तत्कालीन सरकार ने चुनावी आचार संहिता लगने से ठीक पहले 6 अक्टूबर 2023 को हुई कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक में इस पर अपनी पूर्ण मंत्रिपरिषद की सहमति दे दी थी।
कैबिनेट की इस बेहद अहम बैठक के ठीक बाद सरकार की तरफ से जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति (Press Release) और तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सोशल मीडिया हैंडल (X – ट्विटर) पर किए गए पोस्ट में भी इस बड़े फैसले का बहुत ही स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था।
क्या थी मुख्यमंत्री की घोषणा? कांकेर के गोविंदपुर में आयोजित एक भव्य ‘नगरीय निकाय एवं पंचायती राज महासम्मेलन’ के मंच से तत्कालीन मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले बिजली कर्मियों के हित में यह ऐतिहासिक घोषणा की थी।
इस घोषणा के अनुसार, स्टेट पॉवर कंपनीज के वे सभी भाग्यशाली अधिकारी और कर्मचारी, जो 1 जनवरी 2004 या उसके बाद सरकारी सेवा में नियुक्त हुए हैं, उनके लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (New Pension Scheme – NPS) के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का अंतिम निर्णय लिया गया था। कैबिनेट के इस दूरदर्शी निर्णय से पावर कंपनीज के लगभग 10,000 अधिकारी और कर्मचारी सीधे तौर पर लाभान्वित होने वाले थे।

ऊर्जा विभाग की सैद्धांतिक सहमति का यह रहा पुख्ता प्रमाण (Departmental Consent)
कैबिनेट की इस बड़ी मंजूरी के साथ ही पर्दे के पीछे ऊर्जा विभाग ने भी अपनी फाइलें पूरी तरह से दुरुस्त कर ली थीं। वर्तमान में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा ऊर्जा विभाग का यह बेहद महत्वपूर्ण पत्र भी 6 अक्टूबर 2023 का ही है, जो इस बात की पुष्टि करता है।

अधिकारियों-कर्मचारियों के सामने अब क्या हैं बड़ी चुनौतियां? (Future Process)
अब सवाल यह उठता है कि जब साल 2023 में ही सरकार और कैबिनेट स्तर पर इस योजना को मंजूरी दे दी गई थी, तो फिर आज तक इसे जमीनी स्तर पर लागू क्यों नहीं किया जा सका? इस तकनीकी पेंच के पीछे कई बड़े प्रशासनिक कारण माने जा रहे हैं:
- चुनावी आचार संहिता का प्रभाव (Impact of Model Code of Conduct): अक्टूबर 2023 में इस फैसले के तुरंत बाद राज्य में विधानसभा चुनावों की घोषणा हो गई थी, जिसके कारण इसकी आगे की कागजी कार्यवाही ठंडे बस्ते में चली गई।
- सत्ता परिवर्तन और नई समीक्षा (Change of Governance): राज्य में सत्ता बदलने के बाद कई पुरानी फाइलों और वित्तीय प्रस्तावों की नए सिरे से समीक्षा शुरू कर दी गई।
क्या अब बदलेगा बिजली कर्मियों का रुख?
chaturpost.com के इस बड़े खुलासे के बाद अब बिजली कंपनी के 12 कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मोर्चे को एक नया कानूनी और प्रशासनिक आधार मिल गया है। अब कर्मचारी सीधे तौर पर सरकार के सामने इन पुराने आदेशों और कैबिनेट के मिनट्स को रखकर अपनी ओपीएस बहाली की मांग को और भी अधिक आक्रामक तरीके से उठा सकते हैं।
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आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि ऊर्जा विभाग इस पुराने स्वीकृत प्रस्ताव पर वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के तहत क्या नया रुख अपनाता है। बिजली विभाग से जुड़ी हर छोटी-बड़ी और अंदरूनी खबर को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए chaturpost.com के साथ।








