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छत्तीसगढ़ में बदल गया किराया कानून: जाने नए भाड़ा नियंत्रण संशोधन से मकान मालिक और किरायेदार पर क्या असर पड़ेगा

छत्तीसगढ़ में लागू हुआ नया भाड़ा नियंत्रण कानून

रायपुर (chaturpost.com) छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच वर्षों से चले आ रहे विवादों को समाप्त करने तथा प्रॉपर्टी रेंटल मार्केट (Property Rental Market) को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026 लागू कर दिया है। यह नया कानून केंद्र सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट (Model Tenancy Act 2021) की तर्ज पर तैयार किया गया है। 15 जुलाई 2026 को आधिकारिक छत्तीसगढ़ राजपत्र (Gazette Notification) में प्रकाशन के साथ ही यह अधिनियम पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है।

इस ऐतिहासिक कानून का मुख्य ध्येय खाली पड़ी संपत्तियों को किराये पर देने के लिए मकान मालिकों को प्रोत्साहित करना है, साथ ही किरायेदारों को अनुचित बेदखली और मनमाने किराये से सुरक्षा (Tenant Protection) प्रदान करना है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस नए भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) कानून से आपकी जेब और अधिकारों पर क्या असर पड़ेगा।

1. प्रॉपर्टी मैनेजर (Property Manager) का नया कानूनी प्रावधान

छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) अधिनियम, 2026 की धारा 2 और 4अ के तहत पहली बार ‘प्रॉपर्टी मैनेजर’ (Property Manager) की कानूनी भूमिका तय की गई है। अक्सर एनआरआई (NRI) या दूसरे शहरों में रहने वाले मकान मालिक अपनी प्रॉपर्टी की देखरेख के लिए किसी व्यक्ति या कंपनी को अधिकृत करते हैं।

अब मकान मालिक के लिए अनिवार्य होगा कि वह किरायेदार को प्रॉपर्टी मैनेजर का नाम, प्राधिकार पत्र (Authorization Letter), अधिकृत उद्देश्य और समयावधि की लिखित जानकारी उपलब्ध कराए।

प्रॉपर्टी मैनेजर के प्रमुख कर्तव्य एवं दायित्व:

  • रसीद देकर समय पर भाड़ा संग्रह (Rent Collection) करना।
  • मकान मालिक की ओर से परिसर की आवश्यक मरम्मत (Maintenance & Repairs) कराना।
  • समय-समय पर परिसर का निरीक्षण (Inspection) करना और रखरखाव संबंधी नोटिस जारी करना।
  • भाड़ा पुनरीक्षण (Rent Revision) और लीज रिन्यूअल (Lease Renewal) का प्रबंधन करना।
  • मकान मालिक और किरायेदार के मध्य किसी भी विवाद में मध्यस्थता (Dispute Resolution) करना।

महत्वपूर्ण नियम: यदि प्रॉपर्टी मैनेजर अपने अधिकारों का दुरुपयोग करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो भाड़ा नियंत्रक (Rent Controller) उसे पद से हटा सकता है और उस पर जुर्माना भी लगा सकता है।

2. मकान मालिक किराया लेने से मना करे तो क्या करें? (Rent Deposit Process)

अक्सर देखा जाता है कि विवाद होने पर मकान मालिक किरायेदार से किराया लेने या रसीद देने से मना कर देते हैं, ताकि बाद में किरायेदार को डिफॉल्टर घोषित करके मकान खाली कराया जा सके। धारा 5 में संशोधन करके इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला गया है।

कानूनी प्रक्रिया:

  1. यदि मकान मालिक देय किराया स्वीकार करने से मना करता है, तो किरायेदार लगातार 2 महीने तक डाक (Post), मनीऑर्डर या ऑनलाइन डिजिटल ट्रांसफर से किराया भेजेगा।
  2. यदि 2 महीने बाद भी मकान मालिक किराया स्वीकार नहीं करता है, तो किरायेदार सीधे भाड़ा नियंत्रक (Rent Controller Court) के समक्ष निर्धारित प्रक्रिया के तहत किराया जमा कर सकता है।
  3. भाड़ा नियंत्रक मामले की जांच करेगा और मकान मालिक विधिवत आवेदन प्रस्तुत करके उस राशि को अदालत से आहरित (Withdrawal) कर सकेगा।

3. मुकदमों का 60 दिनों में निपटारा और 3 से ज्यादा तारीखों पर रोक (Fast-Track Legal Relief)

किरायेदारी विवादों को वर्षों तक अदालतों में लटके रहने से बचाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया (Legal Remedies) में बड़े बदलाव किए गए हैं:

  • 60 दिनों में फैसला (60 Days Disposal): भाड़ा नियंत्रण अधिकरण (Rent Control Tribunal) को आवेदन या अपील प्राप्त होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना होगा। यदि 60 दिनों में फैसला नहीं हो पाता है, तो अधिकरण को इसका लिखित कारण दर्ज करना होगा।
  • अधिकतम 3 स्थगन (Maximum 3 Adjournments): पूरी सुनवाई के दौरान किसी भी पक्षकार को 3 से अधिक तारीख या स्थगन नहीं दिया जाएगा।
  • लोक सेवक का दर्जा (Public Servant Status): अधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों को भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) की धारा 2(28) के तहत लोक सेवक माना जाएगा।
  • शपथ पत्र पर साक्ष्य: सभी कार्यवाहियों में गवाहों के बयान हलफनामे (Affidavit Evidence) पर दर्ज किए जाएँगे।

4. सिक्योरिटी डिपॉजिट और सालाना किराया वृद्धि की सीमा तय (Security Deposit Rules)

नए कानून की धारा 12अ के अंतर्गत वित्तीय पारदर्शिता (Financial Transparency) सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं:

  • सिक्योरिटी डिपॉजिट की सीमा: मकान मालिक केवल अधिकतम 3 महीने के भाड़े के बराबर ही सुरक्षा निधि (Security Deposit) मांग सकता है।
  • सालाना किराया वृद्धि नियम (Annual Rent Hike Limit):
    • यदि किसी संपत्ति का मासिक किराया ₹2,000 या उससे कम है, तो सालाना किराया वृद्धि अधिकतम 5% ही हो सकती है।
    • ₹2,000 से अधिक मासिक किराये वाले मामलों में सालाना भाड़ा वृद्धि अधिकतम 10% से अधिक नहीं होगी।
  • बिजली और पानी की गारंटी: मकान मालिक या उसका एजेंट किसी भी परिस्थिति में जानबूझकर बिजली, पानी या अन्य आवश्यक आपूर्ति (Essential Services) को रोक नहीं सकता।

5. वरिष्ठ नागरिकों और कर्मचारियों को 1 महीने का बेदखली नोटिस (Tenant Eviction Rules)

आमतौर पर किसी किरायेदार को मकान खाली कराने के लिए मकान मालिक को 3 से 6 महीने का लिखित नोटिस देना होता है। लेकिन विशेष वर्ग के मकान मालिकों के लिए नियमों में बड़ी राहत दी गई है।

यदि निम्नलिखित श्रेणियों के मकान मालिक को अपने स्वयं के उपयोग या परिवार के अधिभोग (Personal Occupation) के लिए अपना मकान वापस चाहिए, तो नोटिस की अवधि केवल 1 महीना होगी:

  • सेवारत या सेवानिवृत्त शासकीय सेवक (Government Employees)।
  • सशस्त्र बलों के कार्मिक (Armed Forces Personnel)।
  • विधवा महिलाएँ (Widows)।
  • दिव्यांगजन (Persons with Disability)।
  • वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizens – 65 वर्ष से अधिक आयु)।

6. सामाजिक उपताप (Social Nuisance) और उप-किरायेदारी पर सख्त रोक

धारा 12स के तहत किरायेदारों के लिए भी स्पष्ट बाध्यताएँ तय की गई हैं:

  • सब-लेटिंग पर प्रतिबंध (Sub-letting Ban): किरायेदार मकान मालिक की लिखित अनुमति के बिना किसी भी स्थिति में मकान को उप-किराये (Sub-tenancy) पर नहीं दे सकता।
  • सामाजिक उपताप (Social Nuisance Definition): यदि किरायेदार नशा करके झगड़ा करता है, देर रात तक तेज आवाज में शोर मचाता है, सामान्य सीढ़ियों पर थूकता है, खतरनाक या बदबूदार सामान जमा करता है या कचरा बिखेरता है, तो मकान मालिक उसे तुरंत बेदखल कराने के लिए भाड़ा नियंत्रक के पास आवेदन दे सकता है।
  • पुलिस सत्यापन (Police Verification): किरायेदार के रहने आने के 7 दिनों के भीतर स्थानीय पुलिस थाने में फॉर्म-ग पर जानकारी प्रस्तुत करना मकान मालिक का कानूनी दायित्व है।

चतुर विचार

छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) अधिनियम 2026 राज्य में किरायेदारी व्यवस्था को एक आधुनिक, न्यायसंगत और पारदर्शी ढांचा प्रदान करता है। यह कानून मकान मालिकों के स्वामित्व अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ किरायेदारों को अनुचित उत्पीड़न और अत्यधिक किराया वृद्धि से सुरक्षा देता है। इससे अदालती मुकदमों का बोझ घटेगा और राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।

Chhattisgarh Rent Control Act 2026

❓ छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) अधिनियम 2026: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. नया भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) कानून कब से लागू हुआ है?

यह नया अधिनियम छत्तीसगढ़ राजपत्र (Gazette Notification) में प्रकाशन की तिथि 15 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू हो गया है।

Q2. मकान मालिक अधिकतम कितना सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security Deposit) ले सकता है?

नए कानून की धारा 12अ के अनुसार, मकान मालिक अब किसी भी स्थिति में अधिकतम 3 महीने के किराये से अधिक सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि नहीं मांग सकता।

Q3. सालाना किराया कितना प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है?

नियमों के तहत ₹2,000 या उससे कम मासिक किराये वाले मामलों में सालाना किराया वृद्धि अधिकतम 5% और अन्य सभी मामलों में अधिकतम 10% से अधिक नहीं होगी।

Q4. यदि मकान मालिक किराया लेने या रसीद देने से इंकार करे तो क्या करें?

किरायेदार लगातार 2 महीने तक पोस्ट, मनीऑर्डर या ऑनलाइन माध्यम से किराया भेजेगा। फिर भी न लेने पर किरायेदार सीधे भाड़ा नियंत्रक (Rent Controller) के पास निर्धारित प्रक्रिया से किराया जमा करा सकता है।

Q5. अदालती मामलों के निपटारे के लिए क्या समय सीमा तय की गई है?

भाड़ा नियंत्रण अधिकरण को आवेदन या अपील प्राप्त होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर फैसला सुनाना होगा। साथ ही पूरी कार्यवाही में किसी पक्षकार को 3 से अधिक तारीख (Adjournment) नहीं मिलेगी।

Q6. किन मकान मालिकों को केवल 1 महीने के नोटिस पर मकान खाली कराने की छूट है?

वरिष्ठ नागरिक (65 वर्ष से अधिक), शासकीय/सेना के सेवानिवृत्त या सेवारत कर्मचारी, विधवाएँ और दिव्यांग व्यक्ति स्वयं के रहने के लिए केवल 1 माह का नोटिस देकर मकान खाली करा सकते हैं।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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