Chiraag रायपुर। छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में लागू हुई चिराग परियोजना अफसरों की लापरवाही के कारण बंद हो गई। विश्व बैंक से सहायता प्राप्त इस योजना में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण इस योजना का फंड राज्य से वापस ले लिया गया। विधानसभा के बजट सत्र में शुक्रवार को यह मुद्दा उठा तो इस परियोजना के तहत काम करने वाली बस्तर की दर्जनों लड़कियों का दर्द फिर जाता हो गया।
चिराग परियोजना में काम करने वाली दर्जनों लड़कियां नई दिल्ली की एनजीओ के शोषण का शिकार हुई हैं। एजेंसी ने लड़कियों से काम लिया, लेकिन पैसे बिना दिए ही कामकाज समेट कर निकल गई। अब लड़कियां करीब एक साल से अपने वेतन के लिए भटक रही हैं। हर स्तर पर आवेदन और निवेदन के बाद भी उन्हें अब तक वेतन नहीं मिला है।
पीड़ित लड़कियां PCI संस्था के अंतर्गत थर्ट पार्टी के अप हिल एडवाइजरी (दिल्ली) मे चिराग परियोजना मे पोषण, सामाजिक व्यवहार और संचार परिवर्तन के विषय पर बस्तर संभाग के अलग-अलग ब्लॉक में काम कर रही थीं।
इनका वेतन 28000 से 30000 हजार रुपए संस्था PCI ने तय किया था जिसमें केवल नवंबर 2023 से जुलाई 2024 तक की कुल आठ माह की वेतन ही दिया गया।
इसके बाद अगस्त 2024 से फरवरी 2025 तक की 7 माह की वेतन राशि बकाया है। दिसंबर 2023 से दिसंबर 2024 तक की यात्रा भत्ता राशि संस्था द्वारा नहीं दिया गया है।
पीड़ित लड़कियों ने बताया कि संस्था को मौखिक और मोबाईल के माध्यम से वाट्सअप ग्रुप मे निवेदन करने पर केवल आश्वासन दिया जाता था, लेकिन अब तक पैसा नहीं मिला है।