
Dhan Kharidi रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य (MSP) पर धान बेचने के लिए इस बार किसानों को दोहरा पंजीयन कराना होगा। किसानों को केंद्र सरकार की बेवसाइट एग्री स्टेक के (Agri Stake) साथ ही राज्य सरकार के एकीकृत किसान पोर्टल (Integrated Farmer Portal) पर भी रजिस्ट्रेशन करना होगा।
यह फैसला राज्य की धान खरीदी के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपमिति की बैठक में लिया गया है। अफसरों के अनुसार दोहरे पंजीयन से किसानों को फायदा होगा। धान खरीदी में होने वाले फर्जीवाड़ा पर रोक लगेगा। किसानों को समय पर भुगतान प्राप्त होगा।
अभी तक ऐसे होता था पंजीयन
सरकारी धान खरीदी केंद्रों में धान बेचने के लिए किसानों का अभी तक पंजीयन पंजीकरण समिति और सहकारी संस्थाओं के जरिये होता था। इसमें किसानों को आधार, बैंक पासबुक और जमीन का खसरा-खतैनी जैसे दस्तावेजों की फोटो कॉपी जमा करना पड़ता था। इसमें काफी वक्त लगता था। कई बार गलत इंट्री समेत अन्य कारणों किसानों को धान का भुगतान समय पर नहीं हो पाता था।
Dhan Kharidi किसानों का डिजिटल डाटा बेस
अफसरों ने बताया कि नए सिस्टम में पुरानी कमियों और खामियों को दूर करने का प्रयास किया गया है। एग्री स्टेक और किसान पोर्टल Integrated Farmer Portal पर पंजीयन से किसानों की पहचान और उनकी जमीन का डिटेल डटाबेस Database तैयार हो जाएगा। इससे धान खरीदी समेत दूसरी शासकीय योजनाओं में फर्जीवाड़ा को रोकने में मद्द मिलेगा। किसानों को समय पर भुगतान भी संभवन होगा।
धान तस्करी रोकने बनेगी स्पेशल टीम
अफसरों ने बताया कि बैठक में मंत्रिमंडलीय उपमिति ने सीमावर्ती जिलों में अवैध धान की रोकथाम के लिए स्पेशल टीम बनाने का निर्देश दिया है। उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग के लिए मिलों को पहले से तैयार करने पर भी जोर दिया गया।
अभी तक ऐसे होता था पंजीयन
पिछले साल तक धान बेचने वाले किसानों का पंजयन समिति/समिति कार्यालय या सहकारी समितियों के स्तर पर किया जाता था।
किसानों को पंजीयन के लिए खसरा-खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक आदि की फोटो कॉपी जमा करना पड़ता था।
कागजी प्रक्रिया लंबी और जटिल थी, जिससे कई बार दोहरे पंजीयन, फर्जीवाड़े और धान रिसाइक्लिंग जैसी समस्याएं सामने आती थीं।
भुगतान की प्रक्रिया भी कई बार विलंबित रहती थी क्योंकि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण सीमित था।
Dhan Kharidi इस बार ऐसे हो रहा पंजीयन
अब किसानों का पंजीकरण एग्रीस्टेक पोर्टल (Agri Stake Portel) और एकीकृत किसान पोर्टल दोनों पर किया जाएगा।
यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल और केंद्रीकृत डेटाबेस से जुड़ी होगी, जिससे किसान की पहचान और उसकी वास्तविक भूमि का विवरण रियल टाइम में देखा जा सकेगा।
दोहरे पंजीकरण या फर्जी किसानों के नाम से धान बेचने की संभावना काफी हद तक खत्म होगी।
खरीदी और भुगतान दोनों की ऑनलाइन ट्रैकिंग होगी। इससे किसानों को समर्थन मूल्य का भुगतान समय पर मिलने की संभावना बढ़ेगी।
सीमावर्ती जिलों में अवैध धान रोकने के लिए पोर्टल से जुड़े क्रॉस वेरिफिकेशन और विशेष जांच दल दोनों का उपयोग किया जाएगा।







