
रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने संवेदनशील फैसला लेते हुए वर्षों से भटक रहे पीड़ित परिवारों के हित में एक बेहद बड़ा कदम उठाया है। राज्य शासन ने विघटित परिवहन निगम (Disbanded Transport Corporation) के दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) दिलाने के लिए एक नई और व्यावहारिक नीति (New Policy Development) बनाने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सीधी पहल पर सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) द्वारा इसके लिए एक उच्च स्तरीय 7 सदस्यीय अंतर्विभागीय समिति (Inter-departmental Committee) का गठन कर दिया गया है। सरकार के इस कदम से उन परिवारों में उम्मीद की नई किरण जगी है, जो पिछले कई सालों से आर्थिक तंगी और दफ्तरों के चक्करों से परेशान थे। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला और नई नीति से परिवारों को कैसे मिलेगा बड़ा सहारा।
क्यों फंसा था पेंच और क्यों पड़ी नई नीति की जरूरत? (The Policy Crisis)
पूर्व में परिवहन निगम के विघटन के बाद उसके कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम (CIDC) के अंतर्गत समायोजित किया गया था। इस दौरान इन दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को पूर्व में शिक्षाकर्मी वर्ग-तीन के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान था। लेकिन राज्य में शिक्षाकर्मी संवर्ग (Shikshakarmi Cadre) समाप्त होने के बाद यह रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।
इसके बाद:
- जल संसाधन विभाग (Water Resources Department) ने 13 दिसंबर 2022 को एक वैकल्पिक आदेश जारी किया था।
- इस आदेश के तहत सीआईडीसी (CIDC) के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान किया गया।
- असल समस्या: सीआईडीसी में स्वीकृत पद बेहद सीमित हैं और वहां पद रिक्त न होने के कारण अनुकंपा नियुक्ति के कई अत्यंत संवेदनशील प्रकरण लंबे समय से धूल खा रहे थे।
- परिणाम: नौकरी न मिलने से आश्रित परिवारों को गंभीर आर्थिक संकट और तंगी का सामना करना पड़ रहा था।
नई नीति और गठित समिति की 5 सबसे बड़ी बातें
कर्मचारियों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए और माननीय उच्च न्यायालय (High Court Directions) के निर्देशों का पालन करने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस समस्या का स्थायी और ठोस समाधान (Permanent Solution) निकालने के निर्देश दिए हैं:
- जीएडी सचिव करेंगे अगुवाई: इस नवगठित 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग (Secretary, GAD) करेंगे।
- एक महीने की समय सीमा (Tight Deadline): इस समिति को अपनी विस्तृत जांच और व्यावहारिक नीतिगत रिपोर्ट केवल 1 माह के भीतर शासन को सौंपनी होगी।
- कैबिनेट से मिलेगी अंतिम मंजूरी: समिति की रिपोर्ट आने के बाद इसे अंतिम रूप देकर राज्य कैबिनेट (Cabinet Approval) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहां से मंजूरी मिलते ही नई नीति को पूरे प्रदेश में अधिसूचित (Notify) कर दिया जाएगा।
- सरल और व्यावहारिक नियम: नई नीति का मुख्य फोकस यह होगा कि सीआईडीसी में पद खाली न होने की स्थिति में आश्रितों को अन्य विभागों या निगमों के रिक्त पदों पर किस प्रकार समायोजित किया जाए।
- पेंडिंग केसों का तुरंत निपटारा: नीति लागू होते ही सालों से अटके हुए सभी लंबित आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निराकरण किया जाएगा।
शासन का मुख्य उद्देश्य: आर्थिक संबल और त्वरित न्याय (Empowering Families)
इस नीति को बनाने के पीछे छत्तीसगढ़ सरकार का स्पष्ट विजन है कि जिन परिवारों ने अपने कमाऊ मुखिया को खोया है, उन्हें किसी भी तरह के आर्थिक संकट (Financial Crisis) से जूझना न पड़े। सरकारी प्रक्रियाओं के फेर में किसी भी पीड़ित परिवार का हक न मारा जाए, इसके लिए नियमों का सरलीकरण (Simplification of Rules) किया जा रहा है।
इस निर्णय से छत्तीसगढ़ के हजारों प्रभावित परिवारों को सीधे तौर पर सरकारी नौकरी (CG Govt Jobs) और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार मिल सकेगा, जिससे उनका भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो सके।







