
चतुरपोस्ट डेस्क। यदि आप एक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी (Central Government Employee) हैं या सरकारी विभागों में नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System) का काम संभालते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के अधीन महालेखा नियंत्रक (Controller General of Accounts – CGA) कार्यालय ने एनपीएस अंशदान (NPS Contribution) को जमा करने में हो रही देरी को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
सीजीए (CGA) द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी एक आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) में स्पष्ट किया गया है कि एनपीएस अंशदान को नियमों के तहत तय समय सीमा में जमा न करने पर अब भारी ब्याज देना होगा। इतना ही नहीं, इस देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी अनुशासनात्मक और आर्थिक कार्रवाई की जाएगी। आइए जानते हैं क्या हैं नए कड़े निर्देश।
देरी होने पर PPF की दर से मिलेगा ब्याज (Interest Rate on Delay)
अक्सर प्रशासनिक कारणों या लापरवाही की वजह से कर्मचारियों का एनपीएस अंशदान समय पर पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के पास ट्रांसफर नहीं हो पाता है। इस संबंध में नियमों को याद दिलाते हुए सीसीएस (एनपीएस का कार्यान्वयन) नियमावली [CCS (Implementation of NPS) Rules] के तहत महत्वपूर्ण प्रावधान स्पष्ट किए गए हैं:
- ब्याज का भुगतान: यदि सरकार द्वारा तय समय सीमा के बाद सब्सक्राइबर के व्यक्तिगत पेंशन खाते (Individual Pension Account) में मासिक योगदान क्रेडिट किया जाता है, तो इस देरी की अवधि के लिए ब्याज (Interest) भी दिया जाएगा।
- ब्याज की दर: इस देरी के लिए दी जाने वाली ब्याज दर वही होगी जो सरकार द्वारा समय-समय पर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) जमा के लिए तय की जाती है।
- क्रेडिट की समय सीमा: योगदान राशि जमा होने के 30 दिनों के भीतर ब्याज की इस राशि को कर्मचारी के एनपीएस खाते में ट्रांसफर करना अनिवार्य होगा।
रजिस्ट्रेशन न होने पर भी सैलरी से कटेगा कंट्रीब्यूशन
अक्सर ऐसा देखा गया है कि नए कर्मचारियों का सरकारी सेवा में आने के बाद पहले या दूसरे महीने तक प्रान (PRAN) यानी परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर जनरेट नहीं हो पाता है। नियम 4(10) के मुताबिक:
अंशदान की कटौती (Withholding of Contribution): > “यदि किसी सरकारी कर्मचारी का एनपीएस में पंजीकरण (Registration) पहले महीने या उसके बाद के महीनों का वेतन आहरण (Salary Drawal) होने तक पूरा नहीं हो पाता है, तो भी उसका वेतन एनपीएस कंट्रीब्यूशन काटकर ही जारी किया जाएगा।”
जैसे ही सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) द्वारा कर्मचारी का प्रान नंबर जारी कर दिया जाएगा और इसकी सूचना वेतन एवं लेखा अधिकारी (PAO) को मिलेगी, वैसे ही रोकी गई अंशदान राशि और उस पर बनने वाला ब्याज तत्काल कर्मचारी के खाते में जमा कर दिया जाएगा।
लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज: अपनी जेब से भरना होगा नुकसान
वित्त मंत्रालय ने इस बार केवल ब्याज देने की बात नहीं कही है, बल्कि देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही (Fixation of Responsibility) तय करने के भी कड़े निर्देश दिए हैं। नियम 8(2) के तहत:
- प्रशासनिक चूक पर व्यक्तिगत देनदारी: विभाग के प्रमुख (Head of Department) या मुख्य नियंत्रक लेखा (Chief Controller of Accounts) हर देरी के मामले की जांच करेंगे। यदि यह पाया गया कि देरी प्रशासनिक चूक (Administrative Lapse) के कारण हुई है, तो जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी को अपनी जेब से इस ब्याज की राशि का भुगतान करना होगा।
- आयकर कानून की तरह वसूली: जिम्मेदार अधिकारी की देनदारी और वसूली का निर्धारण उसी तरह किया जाएगा जैसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 201(1A) के तहत टीडीएस (TDS) कटौती या प्रेषण में देरी के मामलों में किया जाता है।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई: यह वित्तीय पेनल्टी उस विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) के अतिरिक्त होगी जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रशासनिक चूक के लिए की जा सकती है।
हेड 8342-117 को लेकर विशेष निर्देश और रिपोर्ट की अंतिम तारीख
कार्यालय ज्ञापन में यह भी संज्ञान में लाया गया है कि कई कार्यालयों में बड़ी राशि हेड ‘8342-117’ के अंतर्गत बिना किसी वैध कारण के जमा पड़ी हुई है।
सभी प्रधान मुख्य नियंत्रक लेखा (Pr. CCAs), मुख्य नियंत्रक लेखा (CCAs) और नियंत्रक लेखा (CAs) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि इस हेड के तहत केवल वही राशि रखी जाए जो 22 अप्रैल 2022 के सीजीए कार्यालय के ज्ञापन (TA-3-6/3/2020-TA-II/cs-4308) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के 14 अक्टूबर 2024 के ज्ञापन के अनुरूप हो। इसके अलावा कोई भी अन्य राशि इस हेड के तहत नहीं छोड़ी जानी चाहिए।
रिपोर्ट सौंपने की अंतिम तिथि: > देश के सभी संबंधित विभागों को इस आदेश के तहत अब तक की गई कार्रवाई और अनुपालन पर 31 जुलाई 2026 तक एक विस्तृत रिपोर्ट (Detailed Report) महालेखा नियंत्रक कार्यालय को सौंपनी होगी। यह आदेश संयुक्त महालेखा नियंत्रक संचिता शुक्ला के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।







