Power Sector

CSPTCL IPO से पहले डैमेज कंट्रोल में जुटी सरकार, उपभोक्‍ताओं व कर्मचारियों के लिए बताए ये चमत्कारी फायदे; जानें क्या होगा असर?

रायपुर न्‍यूज डेस्‍क। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की बिजली ट्रांसमिशन कंपनी (CSPTCL) के शेयरों को बाजार में उतारने को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट में लिए गए इस फैसले के बाद प्रशासनिक और कर्मचारी संगठनों में हलचल तेज हो गई है। इस बड़े बदलाव के बीच, कर्मचारी विरोध की आशंकाओं को दूर करने और राजनीतिक उठापटक से बचने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार अब पूरी तरह डैमेज कंट्रोल (Damage Control) में जुट गई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कैबिनेट मंजूरी के बाद ऊर्जा विभाग (Energy Department) ने एक प्रेस नोट जारी किया है। इसमें विभाग ने इस ऐतिहासिक कदम से न केवल कर्मचारियों और आम उपभोक्ताओं के मन में उठने वाले संदेहों को खारिज किया है, बल्कि इस लिस्टिंग से राज्य को होने वाले चमत्कारी फायदे भी गिनाए हैं।

जनभागीदारी बढ़ाने और कंपनी के विस्तार के लिए लिया गया निर्णय

छत्तीसगढ़ शासन की शत-प्रतिशत अंशधारित (100% State-Owned) कंपनी CSPTCL द्वारा राज्य में बुनियादी विद्युत संरचना के विकास के लिए लगातार बड़े स्तर पर काम किए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि इस नई पूंजीगत व्यवस्था (Capital Investment) से जहां कंपनी के विकास कार्यों में आमजन की भागीदारी बढ़ेगी, वहीं भविष्य की बड़ी परियोजनाओं के लिए फंड जुटाना भी काफी आसान हो जाएगा।

मंत्रिपरिषद ने इस बड़े कार्य को अमलीजामा पहनाने के लिए पारेषण कंपनी के संचालक मंडल (Board of Directors) को समस्त आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने और इससे जुड़े सभी अनुषांगिक निर्णय लेने के लिए पूर्णतः अधिकृत कर दिया है। इसके साथ ही, इस संबंध में समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए ऊर्जा विभाग को भी जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (NTPC, Power Grid) की तर्ज पर होगा विकास

शासन के पूर्ण स्वामित्व वाली वे सरकारी कंपनियां जिनका आर्थिक (Financial) एवं तकनीकी परिचालन (Technical Operation) बेहतरीन है और जो निरंतर लाभ कमा रही हैं, उनके शेयर्स को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग कराने के कई फायदे होते हैं।

  • विस्तार में जनभागीदारी: अंशपूंजी (Equity Capital) का एक हिस्सा आम पब्लिक और निवेशकों द्वारा खरीदे जाने पर कंपनी के विस्तार में जनता सीधे तौर पर भागीदार बनती है।
  • फंड की सुगमता: कंपनी को भविष्य में किए जाने वाले बड़े और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचागत कार्यों के लिए राशि की उपलब्धता बेहद आसानी से हो जाती है।
  • पारदर्शिता और गवर्नेस: बाजार में लिस्ट होने के बाद कंपनी के दैनिक परिचालन में प्रचालनात्मक पारदर्शिता (Operational Transparency) आती है और कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) मजबूत होता है।

गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा पूर्व में एनटीपीसी (NTPC), पावर ग्रिड (Power Grid), एसजेव्हीएन लिमिटेड (SJVN) और एनएचपीसी लिमिटेड (NHPC) जैसी दिग्गज सरकारी कंपनियों की सफलतापूर्वक शेयर लिस्टिंग की जा चुकी है, जो आज बाजार में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। इसी तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ की बिजली कंपनी भी आगे बढ़ेगी।

वित्तीय सेहत है बेहद मजबूत, विशेषज्ञ फर्म ने की है ‘फिजिब्लिटी स्टडी’

पारेषण कंपनी के संचालक मंडल द्वारा इस बड़े फैसले पर मुहर लगाने से पहले देश की शीर्ष पूंजी क्षेत्र की विशेषज्ञ फर्म मेसर्स एस.बी.आई. कैपिटल लिमिटेड (M/s SBI Capital Limited) से एक विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) कराया गया था। इस स्टडी के निष्कर्षों में साफ कहा गया है कि कंपनी के शेयर्स को आईपीओ के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जाना तकनीकी और आर्थिक रूप से पूरी तरह से संभव, साध्य और सफल होने योग्य है।

अगले 4 वर्षों में होगा 15,000 करोड़ का बड़ा निवेश, ब्लैकआउट से मिलेगी मुक्ति

छत्तीसगढ़ की तेजी से बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं और प्रदेश के उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कंपनी ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CGSERC) द्वारा नेटवर्क विस्तार के लिए आगामी 4 वर्षों हेतु लगभग 15,000 करोड़ रुपये की विशाल निवेश योजना (Investment Plan) को मंजूरी दी गई है। इसके तहत राज्य भर में कई अति उच्चदाब (EHV) के सब-स्टेशन और पारेषण लाइनें बनाई जानी हैं।

सेन्ट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) द्वारा प्रकाशित “मैनुअल ऑन ट्रांसमिशन प्लानिंग” के कड़े नियमों के अनुसार, राज्य की ट्रांसमिशन प्रणाली को अब (N-1) सिक्योरिटी लेवल पर स्थापित किया जाना आवश्यक है।

इसका सीधा और सरल मतलब यह होता है कि यदि भविष्य में किसी तकनीकी खराबी के कारण कोई एक बड़ी पारेषण लाइन या भारी-भरकम ट्रांसफार्मर अचानक बंद भी हो जाता है, तो भी उपभोक्ताओं की बिजली सप्लाई बाधित नहीं होगी और सिस्टम अल्टरनेट रूट से चालू रहेगा। आज कैबिनेट द्वारा लिए गए आईपीओ के फैसले से इस 15,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम पूंजीगत कार्यों के लिए फंड जुटाने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।

समझिए आम जनता और सरकार को इस लिस्टिंग से क्या-क्या मिलेंगे बड़े लाभ?

शेयर बाजार में लिस्टिंग होने के बाद कंपनी और राज्य को मिलने वाले फायदों को हम कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं के माध्यम से समझ सकते हैं:

  • लो-कॉस्ट कैपिटल (Low-cost Capital): पारेषण कंपनी को अपने आधुनिकीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure) के लिए अब पूरी तरह से राज्य सरकार के बजट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वह सीधे बाजार से कम लागत वाली इक्विटी पूंजी जुटा सकेगी।
  • छिपी संपत्ति का आकलन (Hidden Assets Value): शेयर बाजार में लिस्टिंग होने से कंपनी की वास्तविक बाजार कीमत यानी मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) का सटीक पता चलता है, जिससे सरकार को अपनी परिसंपत्तियों के वास्तविक मूल्य का अंदाजा होता है।
  • कड़ा नियंत्रण और पारदर्शिता: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और स्टॉक एक्सचेंजों के कड़े नियमों के कारण कंपनी में स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इससे वित्तीय प्रबंधन (Financial Management) और मजबूत होगा।
  • संस्थागत निवेशकों का आकर्षण: बिजली और यूटिलिटी क्षेत्र की सरकारी कंपनियों में निवेश का जोखिम बेहद कम होता है। इस वजह से बड़े विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशक (FIIs/DIIs) इसमें लंबी अवधि के लिए निवेश करने के लिए आकर्षित होंगे।

क्या बदल जाएगी कंपनी? जानिए नियंत्रण और आईपीओ का पूरा गणित

हालांकि, आईपीओ आने के बाद निवेशकों के प्रति कंपनी की जवाबदेही निश्चित रूप से बढ़ जाएगी। कंपनी को हर तिमाही में अपने वित्तीय परिणाम (Quarterly Financial Results) सार्वजनिक रूप से घोषित करने होंगे और सेबी के एलओडीआर (SEBI LODR – Listing Obligations and Disclosure Requirements) नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।

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कैसा होगा आईपीओ का ढांचा (IPO Structure)? समग्र लाभों को ध्यान में रखते हुए, इस आईपीओ की पूरी संरचना को इस प्रकार डिजाइन करने की अनुशंसा की गई है, जिसमें कंपनी द्वारा बाजार में लगभग 5% मूल्य के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे और इसके साथ ही राज्य सरकार अपनी मौजूदा शेयरधारिता में से 5% का विनिवेश (Divestment) करेगी। इस तरह कुल मिलाकर कम से कम 10% हिस्सेदारी का डायलूशन (Dilution) किया जाएगा, जिससे सेबी द्वारा निर्धारित पब्लिक लिस्टिंग की आवश्यक कानूनी शर्त को आसानी से पूरा किया जा सके।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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