
न्यूज डेस्क। भारत को आत्मनिर्भर और ग्रीन एनर्जी का हब बनाने के लिए दिग्गज सरकारी और निजी कंपनियों ने चौतरफा निवेश की बौछार कर दी है। हिताची एनर्जी, जेएसडब्ल्यू, ओएनजीसी (ONGC) और पावरग्रिड जैसी बड़ी कंपनियों ने देश के अलग-अलग राज्यों में मेगा प्रोजेक्ट्स की घोषणा की है।
हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता (Total Installed Power Capacity) 5,42,354 मेगावाट (MW) तक पहुंच गई है। इसमें सबसे बड़ी और ऐतिहासिक बात यह है कि देश की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता (Non-Fossil Capacity) अब कुल बेस का 53.75% पार कर चुकी है, जो पर्यावरण और विकास दोनों के लिहाज से एक टर्निंग पॉइंट (Turning Point) है।
गुजरात में हिताची एनर्जी का बड़ा दांव: ₹2,000 करोड़ का मेगा प्लांट
वैश्विक पावर टेक्नोलॉजी दिग्गज हिताची एनर्जी इंडिया लिमिटेड (Hitachi Energy India) ने गुजरात के वडोदरा (करजन) में एक नया लार्ज पावर ट्रांसफार्मर (LPT) मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने के लिए लगभग ₹2,000 करोड़ के भारी-भरकम निवेश (Huge Investment) का ऐलान किया है।
यह हाई-टेक प्लांट वित्तीय वर्ष 2027-28 (FY28) तक पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। इस प्लांट की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- उत्पादन: यहाँ हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के लिए अत्याधुनिक ट्रांसफार्मर बनाए जाएंगे।
- डिजिटल कनेक्टिविटी: यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से एंड-टू-एंड डिजिटल कनेक्टिविटी और अत्याधुनिक विनिर्माण तकनीकों (Advanced Manufacturing Technologies) से लैस होगा।
- रोजगार के अवसर: कंपनी के मुताबिक, इस नए प्लांट से गुजरात में 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार (Direct and Indirect Jobs) पैदा होंगे।
JSW Energy का धमाका: समय से पहले पूरा किया 150 मेगावाट का हाइड्रो प्रोजेक्ट
सस्टेनेबल एनर्जी (Sustainable Energy) के क्षेत्र में जेएसडब्ल्यू एनर्जी ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। कंपनी ने हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित अपने 150 मेगावाट के टिडोंग जलविद्युत परियोजना (Tidong Hydroelectric Project) को सफलतापूर्वक चालू (Commissioned) कर दिया है।
विशेष बात यह है कि इस रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट को निर्धारित समय-सीमा (अक्टूबर 2026) से काफी पहले ही पूरा कर लिया गया है। कंपनी ने उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के साथ ₹5.57 प्रति किलोवाट घंटे (kWh) की दर से बिजली आपूर्ति का दीर्घकालिक समझौता (PPA) भी कर लिया है। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से JSW की कुल स्थापित क्षमता बढ़कर करीब 13,900 मेगावाट हो गई है।
रिन्यूएबल एनर्जी में ओएनजीसी और एनटीपीसी की बड़ी जुगलबंदी
सरकारी तेल कंपनी ओएनजीसी (ONGC) अब केवल तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (Green Energy Corridor) में भी तेजी से पैर पसार रही है। प्रोज़ील ग्रीन एनर्जी (Prozeal Green Energy) को ओएनजीसी से भारत भर में 250 मेगावाट के कैप्टिव विंड पावर प्रोजेक्ट्स विकसित करने के लिए ₹2,000 करोड़ से अधिक का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट (Notification of Award) मिला है।
इसके साथ ही, एनटीपीसी (NTPC) ने राजस्थान में अपने बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट के तहत 50 मेगावाट की अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता चालू कर दी है। इसके साथ ही एनटीपीसी समूह की कुल स्थापित क्षमता (Total Installed Capacity) अब 90,857 मेगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को मिला बूस्ट: वित्त मंत्रालय ने दी सीमा शुल्क में बड़ी छूट
परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power Generation) को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक नीतिगत फैसला (Policy Decision) लिया है। सरकार ने परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए आयात किए जाने वाले सभी सामानों पर सीमा शुल्क (Customs Duty) को पूरी तरह से माफ कर दिया है।
यह छूट 1 अप्रैल, 2019 से 31 जनवरी, 2026 के बीच किए गए पात्र आयातों पर पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospectively) से लागू होगी। इस बड़ी घोषणा के बाद शेयर बाजार में न्यूक्लियर सेक्टर से जुड़ी कंपनियों जैसे एमटीएआर टेक्नोलॉजीज (MTAR Technologies) और वालचंदनगर इंडस्ट्रीज के शेयरों में 13% तक का भारी उछाल देखा गया।
देश की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता की वर्तमान स्थिति
📊 भारत का पावर पोर्टफोलियो (CEA ताज़ा डेटा)
| ऊर्जा स्रोत (Energy Source) | स्थापित क्षमता (Installed Capacity) |
|---|---|
| ☀️ सौर ऊर्जा (Solar Capacity) | 1,57,046 MW |
| 💨 पवन ऊर्जा (Wind Capacity) | 56,807 MW |
| 🌊 कुल रिन्यूएबल (बड़ी जलविद्युत और बायोमास सहित) | 2,82,745 MW |
| 🪨 कोयला (Coal – सबसे बड़ा एकल स्रोत) | 2,23,498 MW |
| 📈 कुल गैर-जीवाश्म हिस्सेदारी (Non-Fossil Base) | 53.75% |
फ्लोटिंग सोलर में महाराष्ट्र नंबर वन, लेकिन ऑफशोर विंड में अभी भी शून्य
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) की एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत में 102.18 गीगावाट (GWp) की विशाल फ्लोटिंग सोलर क्षमता (Floating Solar Potential) मौजूद है। इस मामले में महाराष्ट्र 16.28 गीगावाट की क्षमता के साथ देश में सबसे आगे है।
हालांकि, इसके विपरीत ग्लोबल ऑफशोर विंड रिपोर्ट 2026 (Global Offshore Wind Report) ने एक चिंताजनक सच भी उजागर किया है। गुजरात और तमिलनाडु के तटों पर 70 गीगावाट की अपार क्षमता होने के बावजूद भारत ने अभी तक एक भी ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट चालू नहीं किया है। सरकार ने इसके लिए ₹74.53 अरब की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना को मंजूरी दी है, और उम्मीद है कि पहला प्रोजेक्ट 2030 के दशक की शुरुआत में चालू हो पाएगा।
ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और चुनौतियां: राजस्थान के लिए ₹31,197 करोड़ का मास्टर प्लान
तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी लोड को संभालने के लिए ग्रिड का मजबूत होना बेहद जरूरी है। नेशनल कमेटी ऑन ट्रांसमिशन (NCT) ने राजस्थान के बीकानेर से 6 गीगावाट ग्रीन एनर्जी की निकासी (Evacuation) के लिए ₹31,197.04 करोड़ की विशाल ट्रांसमिशन योजना (Transmission Scheme) को मंजूरी दी है।
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यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हाल ही में 13 मई, 2026 को खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी कॉम्प्लेक्स में एक बड़े ग्रिड व्यवधान (Grid Disturbance) के कारण 9,000 मेगावाट बिजली का नुकसान हुआ था, जो भारतीय ग्रिड इतिहास का सबसे बड़ा सिंगल-इवेंट आउटेज (Largest Outage) था। इसी तरह ट्रांसमिशन कंजेशन के कारण महाराष्ट्र को भी बार-बार लोड शेडिंग का सामना करना पड़ रहा है, जिसे दुरुस्त करने के लिए अब केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने सख्त टाइमलाइन जारी की है।
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