
Electricity (Amendment) Rules, 2025 न्यूज डेस्क। विद्युत अधिनियम 2003 में बड़े बदलाव की तैयारी है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय Ministry of Energy ने इस बदलाव का मसौदा जारी कर दिया है। इसमें विद्युत अधिनियम में ऐतिहासिक संशोधन का प्रस्ताव रखा है। मंत्रालय ने इस पर दावा-आपत्ति आमंत्रित किया है।
सस्ती होगी उद्योगों की बिजली
अधिनियम में संशोधन के लिए जारी मसौदा में अनिवार्य लागत-प्रतिबिंबित शुल्क Reflected Fees लागू करने, उद्योगों के लिए बिजली की ऊंची दरों को कम करने और रेलवे प्रणालियों और विनिर्माण कंपनियों को क्रॉस-सब्सिडी Cross-subsidy के बोझ से छूट प्रदान करने का प्रस्ताव है।
वितरण कंपनियों को घाटे से निकालने की कवायद
अधिनियम में संशोधन को घाटे में चल रही बिजली वितरण कंपनियों power distribution companies को उबारने की कवायद के रुप में देखा जा रहा है। जानकारों के अनुसार इस संशोधन का उद्देश्य मजबूत और दूरदर्शी कानूनी ढांचा तैयार करना है जिससे 6.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक के घाटे का सामना कर रही बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय दबाव को दूर करेगा है।
यह भी उद्देश्य में शामिल
उच्च औद्योगिक शुल्कों High industrial tariffs पर लगाम और स्वच्छ ऊर्जा अपनाए जाने को बढ़ावा देने के लिए यह संशोधन किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बिजली की ऊंची दरों से औद्योगिक प्रतिस्पर्धा industrial competition प्रभावित हुई है और इसका आर्थिक विकास पर भी असर पड़ता है।
Electricity (Amendment) Rules, 2025 आयोगों को ज्यादा शक्ति
इस संशोधन के जरिये विद्युत नियामक आयोगों Electricity Regulatory Commission को ज्यादा शक्ति देने की तैयारी है। विद्युत मंत्रालय ने विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 के प्रस्ताव में कहा है कि विद्युत अधिनियम में संशोधन के जरिये विद्युत नियामक आयोगों के लिए लागत-प्रतिबिंबित शुल्क तय करना अनिवार्य होगा। राज्य सरकारों के लिए विशिष्ट उपभोक्ता श्रेणियों Specific consumer categories को अग्रिम सब्सिडी Advance subsidy देने की सुविधा जारी रहेगी ताकि किसी भी उपभोक्ता समूह पर अनुचित बोझ न पड़े।
स्वत: संज्ञान पर शुल्क निर्धारित कर सकेगा आयोग
संशोधन विधेयक में राज्य विद्युत नियामक आयोगों को स्वत: संज्ञान Automatic Cognitive Processing पर शुल्क निर्धारित करने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संशोधित दरें हर साल 1 अप्रैल से लागू किए जाएं, जिससे बिजली क्षेत्र में समग्र वित्तीय अनुशासन Financial discipline में सुधार होगा।
बिजली की दरों को युक्तिसंगत बनाना
इस संशोधन विधेयक में कहा गया है कि उच्च औद्योगिक शुल्क, क्रॉस-सब्सिडी और बिजली की बढ़ती खरीद लागत ने भारतीय उद्योग Indian Industry, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम Micro, Small and Medium उपक्रमों की प्रतिस्पर्धात्मकता को कमजोर कर दिया है। इसमें कहा गया है कि प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य बिजली की दरों को युक्तिसंगत बनाना, मांग में तेजी लाना और लॉजिस्टिक्स लागत logistics costs को कम करना है, जिससे भारत की आर्थिक उत्पादकता को सुदृढ़ बनाया जा सके।
दक्षता में सुधार
विधेयक में परिवहन और लॉजिस्टिक लागत कम करने के साथ दक्षता में सुधार लाने और वैश्विक बाजारों global markets में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए विनिर्माण उद्यमों, रेलवे और मेट्रो रेल Metro Rail को पांच वर्षों के भीतर क्रॉस-सब्सिडी के बोझ से छूट देने का भी प्रस्ताव है।
Electricity (Amendment) Rules, 2025 रेलवे की बिजली सस्ती
संशोधन विधेयक में भारतीय रेलवे और मेट्रो रेल Metro Rail प्रणालियों के लिए बिजली की दर में क्रॉस-सब्सिडी और अधिभार लगता है इससे यह और महंगा हो जाता है। इसकी वजह से मालवहन और लोगों के परिवहन की लागत बढ़ जाती है। ये उच्च लागतें अंतत: पूरी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमत बढ़ाती हैं।
सीईआरसी को सशक्त बनाने का प्रस्ताव
भारत के स्वच्छ ऊर्जा clean energy परिवर्तन को रफ्तार देने के लिए विधेयक में केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) को बाजार संचालित साधनों को पेश करने के लिए विशेष रूप से सशक्त बनाने का भी प्रस्ताव है। इससे निवेश आकर्षित होगा, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि सुनिश्चित होगी।



