
रायपुर। छत्तीसगढ़ में लोगों के घरेलू बजट पर फिर महंगाई की बड़ी मार पड़ने वाली है। प्रदेशभर के लगभग 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं को इस चालू माह में बिजली का नया टैरिफ New Tariff Policy जारी होने के बाद, इसी महीने से या फिर आने वाले अगले महीने से महंगी बिजली का एक और तगड़ा झटका लगने वाला है। यद्यपि विद्युत नियामक आयोग द्वारा अभी तक आधिकारिक रूप से नया टैरिफ घोषित नहीं किया गया है, लेकिन उससे ठीक पहले ही ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन यानी वीपीपीएएस (VPPAS) शुल्क का जून महीने के बिल में भारी-भरकम इजाफा कर दिया गया है।
इस बार जून के महीने में उपभोक्ताओं के घरों में जो मई महीने की बिजली खपत का बिल Electricity Bill Assessment आएगा, उसमें अप्रैल की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और खपत पर वीपीपीएएस शुल्क करीब साढ़े 9 फीसदी (9.5%) की दर से वसूला जाएगा। ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बात यह है कि बीते महीने यह वीपीपीएएस शुल्क चार फीसदी से भी कम के स्तर पर था, लेकिन इस बार इसमें दोगुनी से भी अधिक की बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है। बिजली कंपनी की इस कार्यप्रणाली के कारण प्रदेश के मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के मासिक खर्च का पूरा संतुलन बिगड़ गया है।
हर महीने बदल रहे दाम: जानिए क्या है वीपीपीएएस का गणित
बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में अब हर महीने वीपीपीएएस शुल्क Fuel Cost Adjustment तय होने की व्यवस्था लागू हो चुकी है, जिसके कारण उपभोक्ताओं के लिए हर महीने बिजली के दाम गतिशील रूप से बदल जाते हैं। इस साल की शुरुआत से ही यह उतार-चढ़ाव लगातार जारी है। अगर हम इस साल के पहले महीने यानी जनवरी की बात करें, जिसमें दिसंबर की बिजली खपत का बिल आया था, तो उसमें उपभोक्ताओं से 13.64 फीसदी का भारी-भरकम वीपीपीएएस शुल्क वसूला गया था।
इस 13.64 फीसदी के भारी शुल्क के भीतर भी बिजली कंपनी ने बड़ा खेल किया था। इसमें जहां 5.43 फीसदी पुराना बकाया शुल्क शामिल था, वहीं दिसंबर महीने का अपना खुद का 8.21 फीसदी का शुल्क भी जुड़ा हुआ था। असल में, दिसंबर के महीने में कुल एफपीपीएईएस शुल्क FPPAS Charges Rate 16.42 फीसदी तय हुआ था। बिजली उपभोक्ताओं को तात्कालिक आघात से बचाने के लिए इसमें से आधा हिस्सा दिसंबर के बिल के साथ लिया गया था, और बचा हुआ आधा यानी 8.21 फीसदी शुल्क जनवरी के बिल में ट्रांसफर कर दिया गया था।
बीते साल का इतिहास: उपभोक्ताओं को लगातार मिले कई ‘डबल झटके‘
यदि हम पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो बिजली उपभोक्ताओं को कई महीनों तक लगातार ‘डबल झटका’ झेलना पड़ा था। पिछले साल जुलाई महीने से नया टैरिफ लागू होने के कारण वैसे ही पूरे राज्य में बिजली के दाम काफी महंगे हो गए थे। इसके तुरंत बाद जब बीते साल अगस्त के बिल के समय वीपीपीएएस शुल्क की गणना की गई, तो वह अप्रत्याशित रूप से 14.20 प्रतिशत पर पहुंच गया। उपभोक्ताओं में बढ़ते जन आक्रोश और भारी विरोध को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी State Power Distribution Company ने इसका आधा यानी केवल 7.10 फीसदी ही अगस्त के बिल में वसूलने का निर्णय लिया था।
लेकिन यह राहत बेहद अस्थायी साबित हुई। जब सितंबर महीने में अगस्त की खपत का बिल जारी हुआ, तो उसमें नए बढ़े हुए टैरिफ के साथ-साथ पिछला बचा हुआ 7.10 फीसदी वीपीपीएएस शुल्क भी जोड़कर थमा दिया गया। हालांकि उस विशेष महीने के नए शुल्क से तो थोड़ी राहत मिली, लेकिन उसके ठीक अगले ही महीने यानी सितंबर में फिर से नया वीपीपीएएस शुल्क तय हुआ, जो बढ़कर 9.46 फीसदी पर आ गया। पावर कंपनी ने फिर से वही रणनीति अपनाई और इसका केवल 2.46 फीसदी हिस्सा ही सितंबर के बिल में जोड़ा, लेकिन इसके साथ ही अगस्त का पुराना बकाया सात फीसदी शुल्क भी वापस वसूल लिया गया, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पूरी तरह ढीली हो गई।
बिजली बिल बढ़ोतरी का ऐतिहासिक डेटा विश्लेषण
नीचे दी गई सारणी से आप समझ सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में महीने-दर-महीने वीपीपीएएस शुल्क किस प्रकार बदल रहा है और उपभोक्ताओं पर इसका क्या असर हो रहा है:
| बिलिंग का महीना | खपत का महीना | वीपीपीएएस शुल्क दर (%) | उपभोक्ता प्रभाव स्थिति (Consumer Impact) |
| जनवरी | दिसंबर | 13.64% | अत्यधिक भारी बोझ (पुराना बकाया शामिल) |
| फरवरी | जनवरी | 12.35% (संयुक्त) | डबल झटका (8.21% पुराना + 4.14% नया) |
| मार्च | फरवरी | 5.91% | आंशिक राहत की स्थिति |
| अप्रैल | मार्च | 4.24% | सामान्य नियंत्रण में |
| मई | अप्रैल | 3.98% | वर्ष का सबसे निचला स्तर |
| जून (आगामी) | मई | ~ 9.50% | तगड़ा झटका (दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी) |
आम जनता और उद्योग जगत पर पड़ने वाला व्यापक असर
इस लगातार होने वाली मूल्य वृद्धि Utility Price Inflation का सीधा असर राज्य के 65 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में वैसे ही एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों के अत्यधिक संचालन के कारण बिजली की कुल यूनिट खपत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में मूल टैरिफ दरों के ऊपर अतिरिक्त रूप से साढ़े 9 फीसदी का सरचार्ज जोड़ दिए जाने से आम आदमी का मासिक बिजली बिल सीधे तौर पर 500 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक बढ़ जाने की पूरी आशंका है।
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इसके अलावा, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और लघु उद्योगों पर भी इसका बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उत्पादन लागत बढ़ने से बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। छत्तीसगढ़ की जनता अब मांग कर रही है कि पावर कंपनियों की आंतरिक अक्षमता और कोयला खरीद की ऊंची दरों का खामियाजा आम उपभोक्ताओं पर इस तरह हर महीने अतिरिक्त शुल्क थोपकर नहीं निकाला जाना चाहिए। नियामक आयोग को इसमें हस्तक्षेप कर आम जनता को दीर्घकालिक राहत प्रदान करनी चाहिए।







