
नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ में अपराधियों और कानून के दायरे में आने वाले संदिग्धों पर नकेल कसने के लिए पुलिस और जेल विभाग को सीधे और बड़े अधिकार दे दिए गए हैं। राज्य शासन के गृह (पुलिस) विभाग ने ‘आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022′ (The Criminal Procedure (Identification) Act, 2022) के तहत एक बेहद महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है।
इस नए आदेश के बाद जमीन पर जो सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है, वह इन तीन मुख्य बिंदुओं में छुपा है:
- मापों का संग्रहण (Collection): अब पुलिस और जेल प्रशासन के पास अपराधियों या कानून के दायरे में आए व्यक्तियों के विभिन्न प्रकार के शारीरिक और जैविक माप (जैसे फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन आदि) लेने की स्पष्ट वैधानिक शक्ति होगी।
- रिकॉर्ड का संरक्षण (Preservation): एकत्रित किए गए डेटा और मापों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे पुराने और शातिर अपराधियों की पहचान आसानी से हो सकेगी।
- डेटा शेयरिंग (Sharing): आपराधिक जांच को गति देने के लिए दोनों विभाग (पुलिस और जेल) अपने-अपने क्षेत्राधिकार में इन मापों और रिकॉर्ड्स को आपस में साझा कर सकेंगे।
राजपत्र में प्रकाशित हुआ आदेश छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी आधिकारिक असाधारण राजपत्र के अनुसार, यह व्यवस्था पूरे राज्य में तुरंत प्रभावी कर दी गई है। गृह विभाग के उप-सचिव श्रीकांत वर्मा के हस्ताक्षर से यह अधिसूचना राज्यपाल के नाम और आदेशानुसार जारी की गई है।
केंद्रीय कानून की धारा 4(3) का मिला आधार इस अधिसूचना (संख्या ESTB/11458/2025-HOME SECTION) के जरिए राज्य सरकार ने आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 की धारा 4 की उप-धारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पुलिस और जेल विभाग को इसके लिए ‘उपयुक्त एजेंसी’ के रूप में अधिकृत किया है। इससे अब दोनों ही विभागों के पास किसी भी अपराधी का पुख्ता डेटाबेस तैयार करने का सीधा कानूनी अधिकार होगा।








